देहरादून में दृष्टिबाधित छात्रों की आवाज बनी आंदोलन की ताकत: छात्रवृत्ति, महंगी किताबों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन, आखिरकार झुका प्रशासन
देहरादून। शिक्षा केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर विद्यार्थी को समान अवसर और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अधिकार देने का माध्यम भी है। इसी अधिकार और अपनी बुनियादी मांगों को लेकर देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) के दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया।

विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं, महंगी व सुलभ अध्ययन सामग्री, शिक्षा की गुणवत्ता, भोजन-पानी और छात्रावास सहित कई सुविधाओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विद्यार्थियों का कहना था कि लंबे समय से अपनी समस्याएं उठाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला।
भूख हड़ताल तक जाने की थी तैयारी
आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों का आक्रोश इतना बढ़ गया था कि उन्होंने मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी तक दे दी थी।
प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच शुरुआती दौर की बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद आंदोलन जारी रखने का फैसला किया गया था।
विद्यार्थियों की मांगें केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं थीं। आंदोलन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ अध्ययन सामग्री, बेहतर भोजन और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। विद्यार्थियों ने संस्थान में कथित दुर्व्यवहार और शोषण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
महंगी किताबें बनीं बड़ी परेशानी
दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल, ऑडियो, ई-पब और अन्य सुलभ प्रारूपों में अध्ययन सामग्री शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में इन सामग्रियों की उपलब्धता या कीमत सीधे उनकी पढ़ाई को प्रभावित कर सकती है।
महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि NIEPVD स्वयं केंद्र सरकार की Development of Accessible Learning Materials (DALM) परियोजना की नोडल एजेंसी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस परियोजना का उद्देश्य दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल टेक्स्टबुक, टॉकिंग बुक, ई-पब और लार्ज-प्रिंट जैसी सुलभ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है।
ऐसे में उसी संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा सुलभ और किफायती अध्ययन सामग्री का मुद्दा उठाया जाना व्यवस्था के सामने महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है।

सप्ताह भर के आंदोलन के बाद मिली राहत
इस पूरे घटनाक्रम में अब महत्वपूर्ण बदलाव आया है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद विद्यार्थियों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है।
प्रशासन के साथ बातचीत के बाद विद्यार्थियों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। इनमें सुलभ शिक्षण सामग्री और छात्रावास की सुविधाओं में सुधार सहित विद्यार्थियों से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिन मांगों पर सहमति बनी है, उन्हें धरातल पर कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
Shubhda Shakti का सवाल—अपने अधिकारों के लिए आंदोलन की नौबत क्यों?
यह घटनाक्रम केवल एक संस्थान या कुछ विद्यार्थियों की समस्या भर नहीं है। यह दिव्यांग विद्यार्थियों के समान और सुलभ शिक्षा के अधिकार से जुड़ा विषय है।
जब किसी दृष्टिबाधित विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई के लिए जरूरी सुलभ सामग्री, छात्रवृत्ति या बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करना पड़े, तो व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दिव्यांग विद्यार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध कराना किसी प्रकार की दया या उपकार नहीं, बल्कि समावेशी शिक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
Shubhda Shakti का मानना है कि दिव्यांगजनों की आवाज केवल आंदोलन के दौरान नहीं सुनी जानी चाहिए। उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जहां शिकायतों और जरूरतों पर समय रहते कार्रवाई हो।

क्योंकि—
“जानकारी से जागरूकता, जागरूकता से अधिकार और अधिकार से सशक्तिकरण।”
प्रमुख मांगें/मुद्दे
छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता से जुड़ी समस्याओं का समाधान
सुलभ एवं किफायती अध्ययन सामग्री की उपलब्धता
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना
बेहतर भोजन और स्वच्छ पेयजल
छात्रावास एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार
विद्यार्थियों की शिकायतों पर जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था





