अंतरिक्ष में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत से बढ़ी चिंता, भारत समेत दुनिया की नजर
नई दिल्ली। अंतरिक्ष अब केवल वैज्ञानिक खोज और संचार का माध्यम नहीं रह गया है। दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियों के बीच अंतरिक्ष में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। इस बीच चीन की बढ़ती सैन्य अंतरिक्ष क्षमता ने अमेरिका समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, चीन के पास 2026 में अब तक 1,500 से अधिक ऑर्बिटल पेलोड हैं और उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को 510 से अधिक निगरानी, खुफिया और टोही (ISR) क्षमता वाले उपग्रहों से मदद मिल रही है। इन उपग्रहों में ऑप्टिकल, मल्टीस्पेक्ट्रल, रडार और रेडियो-फ्रीक्वेंसी सेंसर शामिल हैं।
सैन्य निगरानी क्षमता में बड़ा विस्तार
चीन इन उपग्रहों की मदद से समुद्र, जमीन और सैन्य गतिविधियों पर दूर से नजर रखने की अपनी क्षमता मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आधुनिक युद्ध में उपग्रहों से मिलने वाली खुफिया जानकारी किसी सैन्य अभियान की योजना और लक्ष्य निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
चीन ने 2026 में जून तक 37 ऑर्बिटल लॉन्च किए थे और पूरे वर्ष में 140 लॉन्च का लक्ष्य रखा है। इससे उसकी अंतरिक्ष क्षमताओं के तेजी से विस्तार का संकेत मिलता है।

एंटी-सैटेलाइट क्षमता भी चुनौती
चिंता का एक बड़ा कारण चीन की काउंटर-स्पेस क्षमता भी है। इसमें ऐसी तकनीकें शामिल हैं जिनका इस्तेमाल विरोधी देश के उपग्रहों को बाधित, नुकसान पहुंचाने या उनकी गतिविधियों पर असर डालने के लिए किया जा सकता है।
विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्टों में चीन की डायरेक्ट-असेंट एंटी-सैटेलाइट क्षमता और अंतरिक्ष में उपग्रहों के नजदीक जाकर उनकी गतिविधियों की निगरानी करने वाली तकनीकों का भी उल्लेख किया गया है।
भारत के लिए क्यों अहम है मामला?

भारत और चीन के बीच लंबे समय से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। ऐसे में चीन की बढ़ती अंतरिक्ष निगरानी क्षमता भारत के लिए भी महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दा बन जाती है।
भारत भी अपनी सीमाओं की निगरानी, संचार और रक्षा जरूरतों के लिए अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों को मजबूत कर रहा है। 24 घंटे निगरानी और तेज खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने वाली सैटेलाइट क्षमता भविष्य की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।
अंतरिक्ष में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

अंतरिक्ष में चीन की बढ़ती ताकत को केवल अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के तौर पर नहीं देखा जा रहा। भारत सहित कई देश अपनी अंतरिक्ष सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में किसी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति में संचार, नेविगेशन, निगरानी और खुफिया उपग्रह बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ऐसे में अंतरिक्ष का सैन्यीकरण दुनिया के सामने एक नई चुनौती है। इसके साथ ही उपग्रहों की बढ़ती संख्या से अंतरिक्ष मलबे और अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं।
शुभदा शक्ति की खास रिपोर्ट: अंतरिक्ष की यह प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में वैश्विक सुरक्षा और सैन्य रणनीति की दिशा को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।






