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अब चलते-चलते बिजली बनाएगी ट्रेनें, सोलर पैनल लगेंगे, हजारों यूनिट बिजली बनेगी

हर साल 13 यूनिट बिजली का होगा उत्पादन
अजमेर। भारत में ट्रेनें चलते चलते बिजली बनाएगी। इसके लिए सोलर लगा यात्री कोच तैयार किया है। कोच की छत पर सोलर पैनल लगाए गए है। सूर्य की ऊर्जा से बिजली बनेगी।  इस बिजली से कोच की बैटरी चार्ज होगी। इससे लागत कम होगी।
कोच में करीब सात किलोवाट-पीक क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया है। इससे हर साल करीब 13 हजार यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। रेलवे के अनुसार इससे एक कोच पर सालाना करीब 2.80 लाख रुपए की बचत होगी। साथ ही करीब 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। आमतौर पर कोचों में बिजली उत्पादन एक्सल-चालित अल्टरनेटर से होता है। पहिए घूमने पर अल्टरनेटर बिजली बनाता है। फिलहाल इसे एक गैर-वातानुकूलित कोच में पायलट परियोजना के रूप में लगाया गया है। रेलवे द्वारा इसके प्रदर्शन और ऊर्जा बचत का आकलन किया जाएगा। बाद में इस तकनीक का अन्य यात्री कोचों में प्रयोग किया जाएगा।

पारंपरिक तरीके से बिजली उत्पादन पर निर्भरता घटेगी
इससे पारंपरिक तरीके से बिजली उत्पादन पर निर्भरता घटेगी और यात्री सुविधाओं के लिए बिजली की उपलब्धता भी बेहतर होगी।सफल प्रयोग के बाद इसे पूरे देश में लगाने की तैयारी है।आईसीएफ यात्री कोचों में अब तक बिजली उत्पादन के लिए मुख्य रूप से कोच के नीचे लगे एक्सल-चालित अल्टरनेटर का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रेन के पहिए और एक्सल घूमने पर बेल्ट सिस्टम के जरिए अल्टरनेटर संचालित होता है। इससे बैटरी बैंक चार्ज होता है और लाइट, पंखे व मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाओं के लिए बिजली मिलती है।हालांकि, इस व्यवस्था में बिजली उत्पादन ट्रेन की गति पर निर्भर रहता है। यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने के दौरान कुछ ऊर्जा का नुकसान भी होता है।

Amit
Author: Amit

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