Alcohol Addiction: शराब की लत युवाओं के कूल्हों पर भारी, 35-40 की उम्र में पहुंच रहे हिप रिप्लेसमेंट तक
पहले 60 साल के बाद होती थी सर्जरी, अब युवाओं में बढ़ रहे एवस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) के मामले; लगातार दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

अजमेर शराब का अत्यधिक और लंबे समय तक सेवन शरीर के सिर्फ लिवर और किडनी को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि इसका गंभीर असर हड्डियों और जोड़ों पर भी पड़ सकता है। राजधानी रायपुर में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के पास ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जो महज 35 से 40 वर्ष की उम्र में ही कूल्हे की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और कुछ मामलों में उन्हें हिप रिप्लेसमेंट तक कराना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक शराब का सेवन कूल्हे की हड्डी तक रक्त की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण हड्डी का ऊपरी हिस्सा धीरे-धीरे कमजोर होकर क्षतिग्रस्त होने लगता है। इस स्थिति को एवस्कुलर नेक्रोसिस (Avascular Necrosis-AVN) कहा जाता है। समय पर पहचान और उपचार न होने पर कूल्हे का जोड़ पूरी तरह खराब हो सकता है।
पहले 60 साल की उम्र के बाद होती थी जरूरत, अब युवा भी प्रभावित
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों का कहना है कि हिप रिप्लेसमेंट की जरूरत पहले मुख्य रूप से उम्र बढ़ने के साथ जोड़ घिसने वाले मरीजों में देखी जाती थी। सड़क दुर्घटना, गंभीर फ्रैक्चर और सिकल सेल जैसी बीमारियां भी इसके प्रमुख कारण रहे हैं।
लेकिन अब कम उम्र के मरीजों में भी कूल्हे की हड्डी को गंभीर नुकसान पहुंचने के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें लंबे समय तक शराब का सेवन और कुछ अन्य जोखिम कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक दशक में हिप रिप्लेसमेंट की जरूरत वाले मरीजों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। हालांकि, स्थानीय अस्पतालों के आंकड़ों को व्यापक आबादी पर लागू करने से पहले आधिकारिक और बड़े पैमाने के डेटा से इसकी पुष्टि जरूरी है।

केस-1: दर्द समझकर खाते रहे पेनकिलर, MRI ने खोली बीमारी की पोल
35 वर्षीय युवक को लंबे समय से जांघ और कमर के बीच दर्द रहता था। धीरे-धीरे चलते समय लंगड़ापन भी शुरू हो गया। शुरुआत में इसे सामान्य मांसपेशियों या कमर का दर्द समझकर पेनकिलर लेते रहे। दवाओं से कुछ समय राहत मिली, लेकिन दर्द दोबारा लौट आता था।
रायपुर के अस्पताल में एमआरआई कराने पर कूल्हे की हड्डी में गंभीर क्षति सामने आई। डॉक्टरों के अनुसार, युवक की मेडिकल हिस्ट्री में छात्र जीवन से ही नियमित शराब सेवन की जानकारी सामने आई। बीमारी बढ़ जाने के कारण हिप रिप्लेसमेंट की सलाह दी गई।
केस-2: एक्स-रे सामान्य, लेकिन MRI में सामने आया गंभीर नुकसान
36 वर्षीय व्यक्ति को जमीन पर बैठने और उठने में परेशानी होने लगी। कूल्हे में दर्द बढ़ने के बावजूद शुरुआती एक्स-रे में कोई बड़ी समस्या स्पष्ट नहीं हुई।
बाद में दर्द और चलने-फिरने में परेशानी बढ़ने पर एमआरआई कराया गया। जांच में कूल्हे की हड्डी और कार्टिलेज में गंभीर क्षति सामने आई। मरीज का हिप रिप्लेसमेंट किया गया। डॉक्टरों ने उसे शराब पूरी तरह छोड़ने और नियमित चिकित्सकीय निगरानी की सलाह दी।
आखिर शराब से कैसे खराब होता है कूल्हा?
लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। कुछ मरीजों में यह कूल्हे की हड्डी तक रक्त की आपूर्ति बाधित होने से जुड़ा हो सकता है।
रक्त की पर्याप्त आपूर्ति न मिलने पर हड्डी का ऊपरी हिस्सा धीरे-धीरे कमजोर और क्षतिग्रस्त हो सकता है। यही स्थिति आगे चलकर एवस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) का रूप ले सकती है।
शुरुआत में दर्द हल्का हो सकता है, लेकिन बीमारी बढ़ने पर चलने, सीढ़ियां चढ़ने, जमीन पर बैठने और पैर को घुमाने जैसी सामान्य गतिविधियां भी मुश्किल हो सकती हैं।

ये लक्षण दिखें तो न करें नजरअंदाज
– जांघ और कमर के बीच लगातार दर्द
– चलते समय लंगड़ापन
– जमीन पर बैठने या उठने में परेशानी
– सीढ़ियां चढ़ने में दर्द या कठिनाई
– लंबे समय तक खड़े रहने पर दर्द बढ़ना
– पैर घुमाने या हिप मूवमेंट में परेशानी
– लगातार दर्द के कारण चलने की क्षमता कम होना
खास बात: शुरुआती चरण में एक्स-रे हमेशा बीमारी की गंभीरता नहीं दिखा सकता। लक्षणों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर डॉक्टर जरूरत पड़ने पर MRI जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।
सबसे बड़ी गलती—दर्द को मामूली समझना
विशेषज्ञों के अनुसार मरीज अक्सर शुरुआत में तीन गलतियां करते हैं—
पहली, लंबे समय तक खुद से पेनकिलर लेते रहना।
दूसरी, बिना विशेषज्ञ की सलाह के स्थानीय स्तर पर इलाज कराते रहना।
तीसरी, एक्स-रे सामान्य आने के बाद आगे की जांच की जरूरत को नजरअंदाज कर देना।
कूल्हे के लगातार दर्द को केवल सामान्य कमर या मांसपेशियों का दर्द समझना उचित नहीं है। समय पर ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श बीमारी की पहचान और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
डॉ. सुनील खेमका, सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं डायरेक्टर, श्री नारायणा अस्पताल के अनुसार, बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरॉयड दवाओं का सेवन और लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। अब कम उम्र के मरीजों में भी हिप रिप्लेसमेंट की जरूरत देखने को मिल रही है। युवाओं को शराब से दूरी बनाने और शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
डॉ. सत्येंद्र फुलझेले, एचओडी, ऑर्थोपेडिक्स के अनुसार, पहले सड़क दुर्घटना, गंभीर चोट और सिकल सेल जैसी स्थितियां हिप जॉइंट खराब होने के प्रमुख कारणों में थीं। अब शराब के लंबे समय तक सेवन से जुड़े मामलों पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उनका कहना है कि शराब का अत्यधिक सेवन शरीर के कई अंगों के साथ-साथ हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।

शराब का असर सिर्फ लिवर तक सीमित नहीं
लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन शरीर पर कई तरह से असर डाल सकता है। इसके कारण—
– हड्डियों का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
– कुछ लोगों में हिप जॉइंट को गंभीर नुकसान हो सकता है।
– मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।
– गिरने और फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ सकता है।
– शरीर की रिकवरी प्रभावित हो सकती है।
– लिवर की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
हिप रिप्लेसमेंट कब पड़ सकती है जरूरत?
यदि कूल्हे का जोड़ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका हो, दर्द लगातार और असहनीय हो, चलना-फिरना बेहद मुश्किल हो जाए और दवाओं या अन्य उपचारों से पर्याप्त राहत न मिले, तो विशेषज्ञ हिप रिप्लेसमेंट पर विचार कर सकते हैं।
हालांकि, हर मरीज में हिप रिप्लेसमेंट जरूरी नहीं होता। बीमारी का चरण, उम्र, हड्डी की स्थिति और अन्य स्वास्थ्य कारकों के आधार पर डॉक्टर उपचार तय करते हैं।
युवाओं के लिए जरूरी संदेश
कूल्हे का दर्द हमेशा उम्र बढ़ने की समस्या नहीं है। खासकर यदि दर्द लगातार बना रहे, चलने में लंगड़ापन हो या जमीन पर बैठने-उठने में परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज न करें।
दर्द दबाने के बजाय दर्द का कारण तलाशना जरूरी है।
समय पर विशेषज्ञ से परामर्श, आवश्यक जांच और शराब जैसी जोखिमकारी आदतों से दूरी कई गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकती है।
शुभदा शक्ति की अपील
शराब से दूरी बनाएं, दर्द को नजरअंदाज न करें और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या में योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
शुभदा शक्ति — स्वास्थ्य और जागरूकता से जुड़ी हर जरूरी खबर आपके साथ।






