पान मसाला की पैकेजिंग पर FSSAI का बड़ा फैसला, प्लास्टिक और एल्युमीनियम फॉयल पर रोक
अब पेपर, सेलुलोज, टिन या कांच की पैकेजिंग में ही पैक करना होगा पान मसाला

नई दिल्ली | 11 अगस्त 2026
पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक, प्लास्टिक-लैमिनेटेड सामग्री, एल्युमीनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसका उद्देश्य पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को कम करना और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना है।
किन चीजों की पैकेजिंग पर रोक?
नए प्रावधानों के अनुसार पान मसाला को पैक करने के लिए ऐसी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा जिसमें प्लास्टिक या प्लास्टिक की लेयर मौजूद हो। इसके अलावा एल्युमीनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर भी अनुमत पैकेजिंग सामग्री की सूची से बाहर हैं।
इसका मतलब है कि बाजार में आम तौर पर दिखाई देने वाले कई प्लास्टिक आधारित या प्लास्टिक-लैमिनेटेड पाउच अब नए नियमों के अनुरूप नहीं होंगे।
अब किन सामग्रियों का हो सकेगा इस्तेमाल?
FSSAI के संशोधित प्रावधानों के तहत पान मसाला की पैकेजिंग के लिए मुख्य रूप से ये विकल्प उपलब्ध होंगे—
– पेपर
– पेपर बोर्ड
– सेलुलोज
– अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री, बशर्ते उनमें प्लास्टिक न हो
– टिन कंटेनर
– ग्लास कंटेनर

प्राकृतिक सामग्री भी पूरी तरह प्लास्टिक से मुक्त होनी चाहिए।
नियम क्यों महत्वपूर्ण है?
पान मसाला और इसी तरह के उत्पादों की छोटी-छोटी पाउच पैकेजिंग से प्लास्टिक कचरे की समस्या बढ़ती है। FSSAI के नए प्रावधानों का उद्देश्य ऐसे पैकेजिंग विकल्पों को बढ़ावा देना है जिनसे प्लास्टिक कचरे को कम किया जा सके। सरकार ने पहले भी पान मसाला, गुटखा और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर नियम बनाए हैं।
पुराने नियमों से आगे बढ़कर नया प्रावधान
FSSAI ने अप्रैल 2026 में पान मसाला की पैकेजिंग के लिए संशोधित नियमों का ड्राफ्ट जारी किया था। इसमें स्पष्ट किया गया था कि पेपर, पेपर बोर्ड या सेलुलोज जैसी सामग्री में पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिएस्टर, PVC या अन्य सिंथेटिक पॉलिमर/लैमिनेट नहीं होने चाहिए। साथ ही एल्युमीनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर को भी प्रतिबंधित किया गया।
अब संशोधित नियमों के लागू होने के साथ पान मसाला निर्माताओं के लिए पैकेजिंग में बदलाव करना जरूरी होगा।

उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
नियमों का सीधा असर पान मसाला बनाने वाली कंपनियों की पैकेजिंग पर पड़ेगा। आने वाले समय में उपभोक्ताओं को पान मसाला के ऐसे पैकेट दिखाई दे सकते हैं जिनमें पारंपरिक प्लास्टिक-आधारित पाउच के बजाय पेपर, प्राकृतिक सामग्री, टिन या ग्लास का इस्तेमाल किया गया हो।
हालांकि, यह बदलाव पान मसाला के सेवन को सुरक्षित या स्वास्थ्य के लिए लाभकारी नहीं बनाता। यह नियम मुख्य रूप से पैकेजिंग सामग्री और उसके पर्यावरणीय प्रभाव से संबंधित है।
SHUBHDA SHAKTI की बात
प्लास्टिक कचरा आज पर्यावरण के सामने बड़ी चुनौती है। पान मसाला जैसे उत्पादों की छोटी पैकेजिंग बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करती है। ऐसे में प्लास्टिक-मुक्त पैकेजिंग की दिशा में उठाया गया कदम पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, इसके प्रभाव का वास्तविक आकलन इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां नए नियमों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती हैं और उपभोक्ताओं तक वैकल्पिक पैकेजिंग किस रूप में पहुंचती है।
नोट: पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह खबर केवल FSSAI के पैकेजिंग नियमों में हुए बदलाव से संबंधित है।







