निपुण भारत मिशन: कक्षा 2 से 5 तक के विद्यार्थियों की दक्षता की परीक्षा 22 अगस्त को
हिंदी और गणित में होगा आकलन, प्रत्येक विषय में पूछे जाएंगे 20-20 प्रश्न

बीकानेर। निपुण भारत मिशन के तहत देश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 2 से 5 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों की बुनियादी पढ़ने-लिखने और गणितीय दक्षताओं का आकलन किया जाएगा। यह आकलन 22 अगस्त को केंद्रीयकृत एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) आकलन के माध्यम से कराया जाएगा।
शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आकलन का उद्देश्य विद्यार्थियों के वास्तविक अधिगम स्तर का पता लगाना तथा बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षताओं में सुधार के लिए आगे की जरूरतों को चिन्हित करना है।
हर विषय में होंगे 20 प्रश्न
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप होने वाले इस आकलन में प्रत्येक विषय के 20 प्रश्न होंगे। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की हिंदी एवं गणित विषय में मूलभूत दक्षताओं का आकलन किया जाएगा।

स्कूल स्तर पर होगी उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच
आकलन पूरा होने के बाद विद्यार्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच विद्यालय स्तर पर की जाएगी। विद्यार्थियों के प्राप्तांक दर्ज करने के साथ-साथ उत्तर-पुस्तिकाओं को सुरक्षित रखना भी अनिवार्य होगा।
शाला दर्पण पर संबंधित मॉड्यूल लाइव होने के बाद प्रत्येक विद्यार्थी के अंक 30 अगस्त तक ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
प्रत्येक विषय के लिए एक घंटे का समय
आकलन के लिए प्रत्येक विषय हेतु एक घंटे का समय निर्धारित किया गया है। हिंदी का प्रश्नपत्र प्रथम एवं द्वितीय कालांश में तथा गणित का प्रश्नपत्र पंचम एवं षष्ठम कालांश में कराया जाएगा।
आकलन से संबंधित प्रश्नपत्र 22 अगस्त से पहले शाला दर्पण पोर्टल और शिक्षक ऐप पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

आकलन का उद्देश्य क्या है?
इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के अंक जानना नहीं, बल्कि उनके वास्तविक अधिगम स्तर का आकलन करना है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि विद्यार्थी बुनियादी पढ़ने-लिखने और संख्यात्मक कौशल में किस स्तर पर हैं तथा उन्हें आगे किस प्रकार के शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है।
शुभदा शक्ति की नजर में: निपुण भारत मिशन के तहत इस तरह के आकलन प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की सीखने की बुनियाद को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।






