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जी,सुना क्या ?? “वृद्धजनों का आशीर्वाद, गुरुओं का सम्मान — अजमेर में 51 शिक्षकों का अभिनंदन”

अजमेर में शिक्षा, संस्कार और सम्मान का संगम: वृद्धजनों के आशीर्वाद के बीच 51 गुरुओं का हुआ अभिनंदन

अजमेर, 13 सितम्बर 2026। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में अजमेर में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम देखने को मिला। सामाजिक संस्था ‘प्रथम एक पहल’ के मुख्य प्रकल्प ‘स्माइल टू लाइफ – एक छोटी सी मुस्कुराहट’ के तत्वावधान में आयोजित भव्य ‘प्रथम-गुरु प्रज्ञा-सम्मान समारोह’ में जिलेभर से आए 51 शिक्षकों एवं विभिन्न क्षेत्रों में मार्गदर्शन देने वाले गुरुओं को सम्मानित किया गया।

समारोह की खास बात यह रही कि इसका आयोजन वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के सान्निध्य और आशीर्वाद के बीच किया गया। आयोजकों ने इसके माध्यम से गुरु सम्मान के साथ समाज में बुजुर्गों के प्रति आदर, जुड़ाव और संवेदनशीलता का संदेश भी दिया।

वृद्धाश्रम बना गुरु सम्मान का साक्षी

कार्यक्रम अजमेर के कोटड़ा स्थित दाहर सेन स्मारक के निकट जय अम्बे सेवा समिति के वृद्धाश्रम परिसर में आयोजित हुआ। संस्था के चंद्र भान प्रजापति ने बताया कि गुरुओं का सम्मान वृद्धजनों की उपस्थिति में करने का उद्देश्य नई पीढ़ी को बुजुर्गों के अनुभव, सान्निध्य और आशीर्वाद के महत्व से जोड़ना है।

समारोह संस्था के संरक्षक सोम रतन आर्य के सान्निध्य में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में पारंपरिक शिक्षक की परिभाषा से आगे बढ़ते हुए उन व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में लोगों के जीवन को दिशा देने और प्रेरित करने का कार्य किया है। सम्मान की विभिन्न श्रेणियों में ‘द लाइफ-चेंजर’, ‘द गाइडिंग लाइट’, ‘द अनसंग हीरो’, ‘द स्पार्क’ और ‘लाइफटाइम इंस्पिरेशन’ जैसी श्रेणियां शामिल रहीं।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि रमेश अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि हनुमान प्रसाद बंसल एवं विष्णु गर्ग द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में राजू मल प्रजापति भी उपस्थित रहे।

आयोजक सोम रतन आर्य ने अतिथियों का स्वागत करते हुए समाज निर्माण में गुरुओं और शिक्षकों के योगदान को अमूल्य बताया।

“अध्यापक ज्ञान देता है, गुरु जीवन की दिशा”

समारोह में राजेंद्र गुंजन ने गुरु और अध्यापक के बीच अंतर को प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अध्यापक जहां पाठ्यक्रम और विषय का ज्ञान प्रदान करता है, वहीं सच्चा गुरु व्यक्ति को जीवन जीने की कला, संस्कार, मूल्य और सही मार्ग की पहचान कराता है। उनके उद्बोधन ने उपस्थित लोगों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाई समारोह की गरिमा

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। शुरुआत में निक्की ने वंदना की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके बाद पूजा एवं उनके ग्रुप ने शानदार नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।

संपूर्ण कार्यक्रम का सहज और ऊर्जावान संचालन शिखना शर्मा ने किया।

आयोजन को सफल बनाने में चंद्र भान प्रजापति, कमल शर्मा, टीनू गुर्जर, मुकेश मिश्रा, ऋषभ मिश्रा, महेंद्र मंडार, गुंजन शर्मा, संजय कुमार, मोनू, हेमंत वर्मा, शिखा शर्मा सहित संस्था की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

यह आयोजन केवल शिक्षकों के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान—दोनों सामाजिक मूल्यों को एक मंच पर जोड़कर समाज को सकारात्मक संदेश देने का माध्यम बना।

शुभदा शक्ति न्यूज़ | नि:शक्त की शक्ति

 

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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