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शुभदा : आस्था और समावेश का अनूठा संगम

आस्था और समावेश का अनूठा संगम: शुभदा के विशेष बच्चों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा

अजमेर। आस्था, उल्लास और सामाजिक समावेश का खूबसूरत संदेश देते हुए शुभदा के विशेष बच्चों ने श्री श्याम फाउंडेशन ट्रस्ट के सहयोग से भव्य कांवड़ यात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। भगवान भोलेनाथ के जयकारों और भक्ति गीतों के बीच निकली इस विशेष कांवड़ यात्रा में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

शुभदा समय-समय पर विशेष बच्चों को सामाजिक परिवेश से जोड़ने और समाज की मुख्यधारा में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न समावेशी (Inclusion) कार्यक्रमों का आयोजन करती रही है। इसी कड़ी में आयोजित इस कांवड़ यात्रा ने आस्था के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता और समावेश का भी संदेश दिया।

परशुराम सर्किल से शुरू हुई कांवड़ यात्रा

 

श्री श्याम फाउंडेशन ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित कांवड़ यात्रा का शुभारंभ पुष्कर रोड स्थित परशुराम सर्किल से हुआ। शुभदा के विशेष बच्चे अपने अध्यापकों के साथ भगवान शिव के सहस्रधारा एवं रुद्राभिषेक के लिए पवित्र जल लेकर कांवड़ यात्रा में शामिल हुए।

यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए कोटड़ा स्थित बाबा रामदेव जी मंदिर पहुंची, जहां भगवान शिव को जल अर्पित करने के साथ यात्रा का समापन हुआ।

रास्ते में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने शुभदा के विशेष बच्चों का आत्मीय स्वागत किया। बच्चों पर पुष्प वर्षा की गई और प्रसाद वितरित किया गया। समाज की ओर से मिले इस स्नेह और सम्मान ने यात्रा को और भी विशेष बना दिया।

भोलेनाथ के भजनों पर झूमे बच्चे

कांवड़ यात्रा के दौरान विशेष बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भगवान भोलेनाथ के भजनों और गीतों पर बच्चे डी.जे. की धुन पर नाचते-गाते आगे बढ़े और यात्रा का भरपूर आनंद लिया।

मंदिर परिसर पहुंचने पर बच्चों का तिलक लगाकर और पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। इसके बाद सभी बच्चों ने भगवान शिव को जल अर्पित किया और अपने स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद बच्चों को प्रसाद ग्रहण कराया गया।

समाज को दिया समावेश और संवेदनशीलता का संदेश

इस विशेष कांवड़ यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन में भागीदारी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया गया—विशेष बच्चों को सहानुभूति नहीं, बल्कि समान अवसर, अपनापन, सहयोग और सामाजिक सहभागिता की आवश्यकता है।

जब समाज उनके साथ मिलकर धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी करता है, तो बच्चों का आत्मविश्वास और हौसला बढ़ता है। ऐसे समावेशी प्रयास विशेष बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह आयोजन इस बात का सुंदर उदाहरण बना कि आस्था का वास्तविक स्वरूप तभी सार्थक होता है, जब उसमें संवेदनशीलता, समानता और समावेश की भावना भी शामिल हो।

कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था परिवार की सुप्रभा, रेखा, ज्योति, अदिति, सपना और सुमन ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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