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बैन के बाद भी पर्दे पर कैसे बिकता है पान मसाला? शाहरुख-अजय-टाइगर को FDA नोटिस, जानिए ‘इलायची’ की आड़ में विज्ञापन का पूरा खेल

भारत में बैन है तो पान मसाला के विज्ञापन कैसे कर लेते हैं स्टार्स? ‘इलायची’ के पीछे छिपा करोड़ों का खेल समझिए

शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन को लेकर महाराष्ट्र FDA का नोटिस मिलने के बाद एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—जब तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध है और गुटखा जैसे उत्पादों पर सख्त नियम हैं, तो टीवी, सोशल मीडिया और बड़े आयोजनों में उन्हीं से जुड़े ब्रांड आखिर दिखाई कैसे देते हैं? इसका जवाब है—‘सरोगेट एडवरटाइजिंग’, यानी किसी दूसरे वैध उत्पाद की आड़ में मूल ब्रांड को लोगों की याद में बनाए रखना।

पहले समझिए—क्या पूरे भारत में पान मसाला बैन है?

इस मामले को समझने के लिए सबसे पहले एक जरूरी भ्रम दूर करना होगा। भारत में हर प्रकार के पान मसाला की बिक्री पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के National Tobacco Control Programme के मुताबिक COTPA, 2003 तंबाकू उत्पादों को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं करता, बल्कि उनके विज्ञापन, प्रचार और स्पॉन्सरशिप सहित कई गतिविधियों को नियंत्रित करता है। वहीं खाद्य पदार्थों में तंबाकू या निकोटीन मिलाने पर Food Safety Regulations के तहत रोक है, जिसके कारण गुटखा जैसे उत्पाद प्रतिबंध के दायरे में आते हैं।

यानी ‘तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध’, ‘गुटखा पर प्रतिबंध’ और ‘हर पान मसाला पर प्रतिबंध’—तीनों को एक ही बात समझना सही नहीं है।

फिर विज्ञापन में वही ब्रांड कैसे दिखाई देता है?

यहीं से शुरू होता है Surrogate Advertising यानी छद्म विज्ञापन का खेल।

मान लीजिए किसी कंपनी का मुख्य या बेहद चर्चित उत्पाद ऐसा है जिसका सीधे विज्ञापन करना कानून के कारण संभव नहीं है। वही कंपनी उसी या मिलते-जुलते ब्रांड नाम से कोई ऐसा उत्पाद बाजार में लाती है जिसका विज्ञापन किया जा सकता है—जैसे इलायची।

विज्ञापन में पैकेजिंग, लोगो, ब्रांड का नाम और दूसरी पहचान इतनी परिचित रखी जा सकती है कि दर्शक के दिमाग में उस ब्रांड से जुड़े दूसरे उत्पाद की याद भी ताजा हो जाए।

इसी रणनीति को लेकर नियामक एजेंसियां सवाल उठाती रही हैं कि कहीं वैध उत्पाद का विज्ञापन वास्तव में प्रतिबंधित उत्पाद की अप्रत्यक्ष ब्रांडिंग तो नहीं कर रहा।

अब शाहरुख, अजय और टाइगर को क्यों मिला नोटिस?

ताजा मामला ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन से जुड़ा है। महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को शो-कॉज नोटिस जारी किया है।

मामले में FDA यह जांच रहा है कि इलायची के नाम पर किया गया विज्ञापन कहीं प्रतिबंधित/नियंत्रित उत्पाद से जुड़ी अप्रत्यक्ष ब्रांडिंग यानी surrogate advertising तो नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार कलाकारों से उनके endorsement से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है और प्रचार सामग्री हटाने/प्रचार रोकने को कहा गया है।

FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार जुर्माना प्रति सेलिब्रिटी 10 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।

क्या ‘इलायची’ का विज्ञापन करना अपने-आप गैरकानूनी है?

नहीं। यही इस पूरे विवाद की सबसे महत्वपूर्ण बात है।

सिर्फ इसलिए कि किसी ब्रांड का नाम पान मसाला या किसी नियंत्रित उत्पाद से भी जुड़ा हुआ है, उसके हर दूसरे वैध उत्पाद का विज्ञापन अपने-आप गैरकानूनी घोषित नहीं हो जाता।

असली सवाल यह होता है कि क्या वह दूसरा उत्पाद वास्तविक और स्वतंत्र उत्पाद है, या उसका इस्तेमाल मुख्य रूप से उस उत्पाद/ब्रांड को प्रमोट करने के लिए किया जा रहा है जिसका सीधा प्रचार प्रतिबंधित है?

इसी अंतर की जांच नियामक संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण होती है।

कानून Surrogate Advertising पर क्या कहता है?

भारत में Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने Guidelines for Prevention of Misleading Advertisements and Endorsements for Misleading Advertisements, 2022 जारी की थीं। केंद्र सरकार के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार इन दिशानिर्देशों में surrogate advertisements पर रोक का स्पष्ट प्रावधान शामिल है।

इसके अलावा तंबाकू उत्पादों के मामले में COTPA के तहत प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर कड़े प्रतिबंध हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दस्तावेजों में Section 5 के संदर्भ में direct, indirect और surrogate promotion पर प्रतिबंध का उल्लेख किया गया है।

इसलिए सिर्फ विज्ञापन में तंबाकू खाते हुए व्यक्ति को न दिखाना या किसी दूसरे उत्पाद का नाम लिख देना हमेशा पर्याप्त बचाव नहीं हो सकता। विज्ञापन की वास्तविक प्रकृति और उससे उपभोक्ता तक पहुंचने वाला संदेश भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

सेलिब्रिटी सिर्फ चेहरा हैं या उनकी भी जिम्मेदारी है?

यह मामला इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विज्ञापन में केवल कंपनी ही नहीं, बल्कि उसे endorse करने वाले सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहा है।

CCPA की misleading advertisement guidelines में endorser को भी दायरे में रखा गया है। यानी किसी उत्पाद के प्रचार के लिए अपना चेहरा और प्रभाव देने वाले व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि endorsement कानून और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।

महाराष्ट्र FDA की मौजूदा कार्रवाई इसी बहस को फिर सामने लाती है—क्या कोई बड़ा स्टार केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से अलग हो सकता है कि उसने वैध ‘इलायची’ का विज्ञापन किया था, या उसे यह भी देखना चाहिए कि उसके प्रचार का व्यापक प्रभाव किस ब्रांड या उत्पाद को फायदा पहुंचा रहा है?

फिलहाल इसका अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगा।

आखिर कंपनियों को सेलिब्रिटी की जरूरत क्यों पड़ती है?

इसका सीधा संबंध Brand Recall से है।

जब करोड़ों लोगों द्वारा पहचाना जाने वाला अभिनेता किसी ब्रांड का नाम बार-बार बोलता या स्क्रीन पर उसके साथ दिखाई देता है, तो वह नाम दर्शकों की स्मृति में मजबूत होता जाता है।

यही वजह है कि surrogate advertising को केवल किसी एक उत्पाद की बिक्री के नजरिए से नहीं देखा जाता। सवाल यह भी होता है कि विज्ञापन आखिर किस ब्रांड पहचान को मजबूत कर रहा है।

क्या अब ऐसे विज्ञापन बंद हो जाएंगे?

तुरंत ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ जैसे बड़े सितारों को नोटिस भेजे जाने से यह साफ है कि नियामक एजेंसियां अब सेलिब्रिटी endorsements और surrogate advertising को गंभीरता से जांच रही हैं।

महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई का अंतिम परिणाम संबंधित कलाकारों और कंपनी के जवाब तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए इस स्तर पर कलाकारों को कानून का दोषी कहना उचित नहीं होगा—फिलहाल उन्हें नोटिस जारी किया गया है और मामला जांच के स्तर पर है।

आम उपभोक्ता के लिए सबसे जरूरी बात

अगली बार टीवी या सोशल मीडिया पर किसी बड़े अभिनेता को किसी परिचित पान-मसाला ब्रांड की ‘इलायची’, ‘माउथ फ्रेशनर’ या किसी अन्य वैध उत्पाद का प्रचार करते देखें, तो केवल स्क्रीन पर दिख रहे उत्पाद को न देखें।

यह भी समझने की कोशिश करें कि विज्ञापन किस उत्पाद को बेच रहा है और किस ब्रांड को आपके दिमाग में स्थापित कर रहा है।

यही अंतर सामान्य विज्ञापन और संभावित surrogate advertising की पूरी कहानी समझने की कुंजी है।

— शुभदा शक्ति (Shubhda Shakti)
जानकारी से जागरूकता, जागरूकता से अधिकार और अधिकार से सशक्तिकरण।

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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