शुरुआती 5 साल बच्चे की मेंटल ग्रोथ के लिए बेहद अहम होते हैं

बच्चों का दिमाग तेज करती हैं ये 7 आदतें, हर पैरेंट्स जरूर जानें डॉक्टर की सलाह

शुरुआती 5 साल बच्चे की मेंटल ग्रोथ के लिए बेहद अहम होते हैं। डॉक्टर कहती हैं कि इस दौरान अगर कुछ छोटी छोटी आदतें अपनाई जाएं, तो पैरेंट्स के जीनियस और कॉन्फिडेंट बच्चा रेज कर सकते हैं।

बच्चे की मेंटल ग्रोथ के लिए शुरुआत के 5 साल बहुत इंपॉर्टेंट होते हैं। इसी समय बच्चे का दिमाग तेजी से ग्रो होता है और उसकी नींव मजबूत होती है। यही वजह है कि इस समय पेरेंट्स अगर बच्चे पर अच्छे से ध्यान दें तो उसकी मेंटल ग्रोथ बहुत अच्छे तरीके से हो सकती है। चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. निमिषा अरोड़ा बताती हैं कि अगर माता-पिता कुछ छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान दें, तो बच्चे का मानसिक विकास तेजी से हो सकता है। उन्होंने कुछ ऐसे आसान और असरदार तरीके बताए हैं, जिन्हें अपना कर पेरेंट्स अपने बच्चों का मेंटल और इमोशनल ग्रोथ अच्छे से कर सकते हैं। चलिए जानते है ये तरीके कौन से है-

बच्चे से करें बात

डॉ. निमिषा अरोड़ा कहती हैं कि छोटे बच्चों से जितनी ज्यादा बातचीत करेंगे, उनका दिमाग उतना ही तेजी से विकसित होगा। चाहे आप उन्हें कहानियाँ सुनाएँ, राइम्स गाएँ या फिर दिनभर की सामान्य बातें ही करें। ये सब बच्चे के दिमाग की वायरिंग को मजबूत करते हैं। लगातार सुनने और समझने से बच्चा भाषा जल्दी सीखता है और साथ ही उसका ब्रेन भी डेवलप होता है।

बच्चे के सामने पढ़ें किताब

जब बच्चे ने बोलना भी शुरू ना किया हो, तब भी अगर आप उसे अपनी गोद में बिठाकर किताबें पढ़ते हैं तो इसका उसके दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। डॉ. निमिषा अरोड़ा बताती हैं कि इससे बच्चे की एकाग्रता यानी कंसंट्रेशन पावर स्ट्रांग होती है। बच्चों के सामने बुक रीड करने से उसकी इमेजिनेशन पावर और वोकैबुलरी भी स्ट्रांग होती है। आपकी ये आदत बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में इंटरेस्ट को भी इंप्रूव करेगी।

बच्चे को खुलकर खेलने दें

हर माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चे के साथ अलग-अलग गेम्स खेलें। डॉ. निमिषा अरोड़ा कहती हैं कि खेलना सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि ये बच्चे के दिमागी विकास के लिए भी जरूरी है। स्ट्रक्चर्ड गेम्स, जैसे पजल, ब्लॉक्स और अनस्ट्रक्चर्ड गेम्स जैसे फ्री गेम्स या इमैजिनेशन से जुड़े गेम खेलने से बच्चे की प्रॉब्लम सॉल्विंग कैपेसिटी और क्रिएटिविटी दोनों बढ़ती हैं।

बच्चे को एक्सप्लोर करने दें

बच्चों में शुरू से ही चीजों को जानने और समझने की क्यूरियोसिटी होती है। अगर पेरेंट्स उन्हें रोकने-टोकने के बजाय आस-पास के माहौल को एक्सप्लोर करने दें, तो उनकी सेंसिटिविटी और सोचने-समझने की शक्ति बढ़ती है। डॉ. निमिषा अरोड़ा बताती हैं कि जब बच्चा अपने आसपास की चीजों को छूता, देखता और अनुभव करता है, तभी उसका दिमाग मजबूत तरीके से सीखता है।

स्क्रीन टाइम कम करना है जरूरी

आजकल मोबाइल और टीवी हर घर में हैं, लेकिन छोटे बच्चों के लिए ये जहर की तरह काम कर सकते हैं। डॉ. निमिषा अरोड़ा साफ कहती हैं कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को बिल्कुल भी स्क्रीन के पास नहीं जाना चाहिए। बड़े बच्चों को भी स्क्रीन का समय बेहद सीमित रखना चाहिए। स्क्रीन से ज्यादा किताबें, खिलौने और बाहर खेलना उनकी मेंटल ग्रोथ के लिए अच्छा है।

प्यार और अपनापन देना जरूरी

बच्चों को प्यार और सुरक्षा का एहसास जितना ज्यादा मिलेगा, वे उतने ही भावनात्मक रूप से स्वस्थ बनेंगे। डॉ. निमिषा अरोड़ा बताती हैं कि माता-पिता को हमेशा धैर्य और शांति से बच्चों को संभालना चाहिए। उनकी जरूरतों को ध्यान से सुनना और समझना चाहिए। जब बच्चा अपने माता-पिता के साथ सिक्योर फील करेगा, तो वो जीवन में आत्मविश्वासी और मेंटली स्ट्रांग बनेगा।

खान-पान पर ध्यान दें

बच्चे का खान-पान उसकी मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की ग्रोथ पर इफेक्ट डालता है। डॉ. निमिषा अरोड़ा कहती हैं कि बच्चे को हेल्दी डाइट देना बेहद जरूरी है। दालें, हरी सब्जियाँ, फल, दूध और प्रोटीन से भरपूर आहार बच्चे के दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों से बचना चाहिए, ताकि उनका विकास सही दिशा में हो सके।

 

 

 

 

 

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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