क्रिकेट के दो महान कप्तान, दो बड़ी फिल्में और बॉक्स ऑफिस पर उलट कहानी! धोनी और कपिल में क्यों रहा इतना अन्तर ?

नई दिल्ली। भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की भावना है। यही वजह है कि जब क्रिकेट के महान खिलाड़ियों और ऐतिहासिक जीत की कहानी बड़े पर्दे पर आती है तो दर्शकों की उम्मीदें भी आसमान छूने लगती हैं। बॉलीवुड ने भारतीय क्रिकेट की दो बेहद चर्चित कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा—‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ और ‘83’। दोनों फिल्मों के केंद्र में विश्व कप विजेता कप्तान थे, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर दोनों की किस्मत बिल्कुल अलग रही।
धोनी की कहानी ने दर्शकों का जीता दिल
साल 2016 में रिलीज हुई ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर आधारित थी। फिल्म में दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने धोनी की भूमिका निभाई थी, जबकि दिशा पाटनी, कियारा आडवाणी और अनुपम खेर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए।
फिल्म में धोनी के एक साधारण परिवार से निकलकर रेलवे में टिकट कलेक्टर बनने और फिर भारतीय क्रिकेट टीम के सफलतम कप्तानों में शामिल होने तक के सफर को दिखाया गया। उपलब्ध बॉक्स ऑफिस आंकड़ों में स्रोत के अनुसार कुछ अंतर है। बॉलीवुड हंगामा फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस करीब ₹215.4 करोड़ बताता है, जबकि Box Office India इसे करीब ₹189.8 करोड़ दर्ज करता है।
फिल्म की कहानी, धोनी की लोकप्रियता और सुशांत सिंह राजपूत के अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। खासकर धोनी के संघर्ष और सफलता के पीछे की अनसुनी कहानी लोगों के लिए बड़ा आकर्षण बनी।
1983 की ऐतिहासिक जीत, फिर भी ‘83’ को नहीं मिला वैसा फायदा
दूसरी ओर रणवीर सिंह अभिनीत ‘83’ भारतीय क्रिकेट के उस ऐतिहासिक पल पर आधारित थी, जब कपिल देव की कप्तानी में भारत ने 1983 में पहली बार वनडे विश्व कप जीतकर दुनिया को चौंका दिया था।
फिल्म में रणवीर सिंह ने कपिल देव का किरदार निभाया और भारतीय टीम की उस अविश्वसनीय विश्व कप यात्रा को पर्दे पर जीवंत करने का प्रयास किया गया। फिल्म को समीक्षकों से सराहना मिली, लेकिन भारी लागत और तत्कालीन परिस्थितियों के बीच इसका बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ‘83’ दिसंबर 2021 में रिलीज हुई थी, जब सिनेमाघर कोविड-19 महामारी के असर से उबर ही रहे थे।
एक जैसा क्रिकेट प्रेम, लेकिन नतीजा अलग क्यों?
दोनों फिल्मों की तुलना बताती है कि केवल बड़ा विषय और भारी बजट किसी फिल्म की व्यावसायिक सफलता की गारंटी नहीं होते। धोनी की व्यक्तिगत संघर्ष-गाथा, उनकी जबरदस्त लोकप्रियता और सुशांत का अभिनय फिल्म की बड़ी ताकत बने, जबकि ‘83’ जैसी ऐतिहासिक कहानी को प्रशंसा मिलने के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर वैसी सफलता नहीं मिल सकी।
क्रिकेट की इन दो कहानियों ने एक बात जरूर साबित की—मैदान पर जीत का इतिहास लिखा जा सकता है, लेकिन बॉक्स ऑफिस की पिच पर नतीजा हमेशा दर्शक तय करते हैं।






