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यहाँ 2 हजार लोगों ने लिया नशा त्यागने का संकल्प

चम्पालाल जी महाराज ने दिया नशामुक्त समाज का संदेश

अजमेर। ग्राम राजगढ़ स्थित मसाणिया भैरवधाम में आयोजित नशामुक्त भारत महारैली आस्था, भक्ति और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम बनकर उभरी। नशामुक्त भारत अभियान की छठी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित सप्ताहभर के कार्यक्रमों के समापन अवसर पर निकाली गई इस महारैली में लगभग 8 हजार श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्राचीन मंदिर परिसर से प्रातः 6 बजे प्रारम्भ हुई महारैली को भैरवधाम के मुख्य उपासक चम्पालाल महाराज ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में श्रद्धालु हाथों में नशामुक्ति संबंधी संदेशों वाले पोस्टर, तख्तियां और बैनर लेकर नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो तथा नशा नहीं, शिक्षा अपनाओ जैसे नारों के साथ मुख्य मंदिर परिसर तक पहुंचे। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक जय प्रकाश चारण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अजमेर, सुशीला देवी चौरिटेबल सोसायटी तथा अपना थियेटर संस्थान अजमेर की टीमों ने भी सहभागिता निभाई। इस अवसर पर मुख्य उपासक चम्पालाल महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि नशा तन, मन, परिवार और समाज- चारों का विनाश करता है। सेवा, संयम, सत्संग और शिक्षा ही जीवन को सही दिशा देते हैं। उन्होंने सभी से आजीवन नशामुक्त रहने का संकल्प लेने का आह्वान किया। महाराज ने कहा कि राजगढ़ भैरवधाम वर्षों से नशाग्रस्त लोगों को आध्यात्मिक प्रेरणा के माध्यम से नया जीवन देने का कार्य कर रहा है। प्रत्येक रविवार यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या ऎसे लोगों की होती है, जो नशे की लत से मुक्ति पाने के उद्देश्य से धाम पहुंचते हैं। यहां उन्हें आज से नशा बंद का संकल्प दिलाया जाता है, जिसके बाद अनेक लोग नशा छोड़कर पुनः अपने परिवार सहित आशीर्वाद लेने आते हैं। धाम में किसी प्रकार का दान, चढ़ावा या उपहार स्वीकार नहीं किया जाता तथा सभी सेवाएं पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। अपने आशीर्वचन में श्री चम्पालाल जी महाराज ने राजस्थान सरकार से शराब, गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट एवं अन्य सभी प्रकार के नशीले उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपील करते हुए कहा कि इससे युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा तथा राजस्थान पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बन सकता है। महारैली के समापन पर भावुक दृश्य देखने को मिला, जब महाराज के आह्वान पर श्रद्धालुओं ने अपने साथ लाए हुए गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, शराब, अमल, डोडा, स्मैक, चरस, एम.डी., सोल्यूशन एवं अन्य नशीले पदार्थ सार्वजनिक रूप से त्यागकर भगवान को साक्षी मानते हुए जीवनभर नशा न करने की शपथ ली। लगभग 2 हजार लोगों ने मौके पर ही नशा छोड़ने का संकल्प लिया, इसके बाद एकत्रित नशीले पदार्थों का विधिवत निस्तारण किया गया। कार्यक्रम के दौरान अपना थियेटर संस्थान, अजमेर द्वारा नशे के दुष्परिणामों पर आधारित प्रभावशाली लघु नाटिका का मंचन किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहरा संदेश दिया। धाम के प्रवक्ता अविनाश सेन ने बताया कि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में रमेश सेन, राहुल सेन, ताराचंद सेन, कैलाश सेन, विष्णु सेन, कपिल सेन, यश, वेदांश, मुकेश सेन, मिलन, भव्य, युवराज, वैभव, मिताली, वंशिका, राजू चावड़ा, दीपक बसीटा, सत्यनारायण सेन, सुनील मेहता सहित अनेक स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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Author: sshakti

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