चुनाव से पहले नया साइबर फ्रॉड, मतदाता रहें सतर्क

जयपुर। निकाय चुनाव की हलचल के बीच साइबर अपराधी भी सक्रिय हो सकते हैं। मतदाताओं को WhatsApp और SMS पर वोटर लिस्ट, वोटर कार्ड अपडेट या मतदान केंद्र की जानकारी देने के नाम पर भेजे जाने वाले संदिग्ध लिंक से सावधान रहने की जरूरत है। ऐसे लिंक पर बिना सत्यापन क्लिक करना आपकी निजी और वित्तीय जानकारी को खतरे में डाल सकता है।
साइबर ठग लोगों की चुनाव संबंधी उत्सुकता का फायदा उठाकर “अपना नाम वोटर लिस्ट में देखें”, “आपका पोलिंग बूथ बदल गया है, नई लोकेशन यहां देखें” या वोटर कार्ड अपडेट करने जैसे संदेश भेज सकते हैं। संदेश को आधिकारिक समझकर किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना साइबर ठगी का रास्ता खोल सकता है।
संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले करें जांच
WhatsApp, SMS या सोशल मीडिया पर चुनाव और मतदाता सूची से संबंधित कोई लिंक मिलने पर उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट और निर्वाचन आयोग के अधिकृत माध्यमों से ही मतदाता सूची, मतदान केंद्र या वोटर कार्ड से संबंधित जानकारी प्राप्त करें।
किसी अनजान वेबसाइट पर अपना मोबाइल नंबर, आधार संबंधी जानकारी, बैंक विवरण, पासवर्ड, UPI PIN या अन्य संवेदनशील जानकारी दर्ज न करें।
OTP मांगे तो तुरंत हो जाएं सतर्क
वोटर कार्ड अपडेट करने, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या मतदान केंद्र बदलने का हवाला देकर यदि कोई व्यक्ति फोन या मैसेज के जरिए OTP मांगता है तो उसे साझा न करें। बैंकिंग OTP, UPI PIN, ATM PIN और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी को भी नहीं देनी चाहिए।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- अनजान नंबर से आए चुनाव संबंधी लिंक पर तुरंत क्लिक न करें।
- लिंक खोलने से पहले वेबसाइट का पता और उसकी प्रामाणिकता जांचें।
- वोटर लिस्ट में नाम देखने के लिए आधिकारिक निर्वाचन माध्यमों का इस्तेमाल करें।
- OTP, UPI PIN, बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड की गोपनीय जानकारी साझा न करें।
- संदिग्ध ऐप या APK फाइल डाउनलोड न करें।
- साइबर ठगी होने पर तत्काल अपने बैंक को सूचित करें और आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं।
Shubhda Shakti की अपील
डिजिटल दौर में जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव की सबसे मजबूत ढाल है। चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर आए हर संदेश पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक स्रोत से उसकी पुष्टि करें। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और ऐसे लोगों को भी इन खतरों के प्रति जागरूक करें जिन्हें डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल में सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।
नोट: वायरल संदेश या लिंक में किए गए दावों की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से करने के बाद ही कोई कार्रवाई करें।






