12वीं पास, 40 की उम्र तक किराये के घर में रहे; अब ₹711 करोड़ में पूरा टावर खरीदेंगे दिनेश ठक्कर
कभी शेयर बाजार में गंवाई थी बड़ी पूंजी, संघर्षों से उबरकर खड़ी की देश की प्रमुख ब्रोकिंग कंपनी ‘एंजेल वन’

मुंबई। सफलता केवल बड़ी डिग्री की मोहताज नहीं होती—यह बात एंजेल वन के संस्थापक, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दिनेश ठक्कर की कहानी साबित करती है। महज 12वीं तक औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने और 40 वर्ष की उम्र तक किराये के मकान में रहने वाले ठक्कर अब मुंबई के जुहू इलाके में लगभग 711 करोड़ रुपये का पूरा लग्जरी रिहायशी टावर खरीदने जा रहे हैं।
एम्बेसी डेवलपमेंट्स ने घोषणा की है कि दिनेश ठक्कर के साथ जुहू स्थित उसके अल्ट्रा-लग्जरी प्रोजेक्ट ‘एम्बेसी टेरेजा’ का पूरा टावर बेचने के लिए समझौता हुआ है। कंपनी के मुताबिक यह देश की सबसे बड़ी एकल आवासीय इकाई डील है। हालांकि इसे अभी खरीद पूरी होने के बजाय एक समझौते के रूप में देखना अधिक सटीक होगा।
सात मंजिल, 63 हजार वर्ग फुट का ‘एंजेलस’
यह जी-प्लस-सात मंजिला टावर करीब 63,000 वर्ग फुट RERA कारपेट एरिया में फैला है। यहां प्रत्येक मंजिल पर एक विशाल आवास होगा। समुद्र और शहर के खूबसूरत नजारे, हरियाली, निजी स्थान और आधुनिक सुविधाएं इसकी प्रमुख विशेषताएं बताई जा रही हैं।
ठक्कर ने अपने भावी निवास का नाम ‘एंजेलस’ रखा है। यह टावर उनके परिवार की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। करीब दो एकड़ में विकसित हो रहे एम्बेसी टेरेजा प्रोजेक्ट में कुल पांच टावर और लगभग 50 आवास प्रस्तावित हैं।
पढ़ाई छोड़ी, लेकिन सीखना नहीं

मुंबई के मुलुंड में कपड़ा व्यवसाय से जुड़े परिवार में जन्मे दिनेश ठक्कर ने ठाणे के सेंट जॉन द बैप्टिस्ट हाई स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मुंबई के किशनचंद चेलाराम कॉलेज में विज्ञान की पढ़ाई की, लेकिन 12वीं के बाद औपचारिक शिक्षा छोड़ दी। ठक्कर स्वयं पढ़ाई छोड़कर बिना उच्च शिक्षा के कारोबार खड़ा करने के फैसले को अपने जीवन का सबसे बड़ा जोखिम बता चुके हैं।
इसके बाद उन्होंने पारिवारिक कपड़ा कारोबार में हाथ बंटाया और फिर शेयर बाजार की ओर रुख किया। शुरुआती दौर में उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। हर्षद मेहता घोटाले और बाद में डॉट-कॉम संकट जैसे कठिन दौरों ने भी उनके कारोबारी सफर को झकझोरा। बताया जाता है कि डॉट-कॉम क्रैश के समय उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
संघर्ष से ‘एंजेल वन’ तक
दिनेश ठक्कर ने वर्ष 1996 में एंजेल ब्रोकिंग की स्थापना की, जिसे अब एंजेल वन के नाम से जाना जाता है। पारंपरिक ब्रोकिंग से शुरू हुई इस कंपनी ने आगे चलकर तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाया तथा देश की प्रमुख रिटेल स्टॉक ब्रोकिंग एवं वित्तीय सेवा कंपनियों में अपनी जगह बनाई।
कभी अपना घर खरीदने के बजाय किराये पर रहना पसंद करने वाले दिनेश ठक्कर का ₹711 करोड़ के पूरे टावर तक पहुंचना केवल आलीशान जीवनशैली की कहानी नहीं, बल्कि जोखिम उठाने, असफलताओं से सीखने और दोबारा खड़े होने की मिसाल भी है। उनकी यात्रा बताती है कि औपचारिक शिक्षा सीमित हो सकती है, लेकिन दूरदृष्टि, अनुशासन और सीखते रहने की इच्छाशक्ति सफलता के रास्ते खोल सकती है।






