UGC और CBSE से सुविधाओं का प्रभावी पालन सुनिश्चित कराने को कहा; स्कूल-कॉलेजों में कागजी निर्देशों के साथ जमीनी अमल पर जोर
नई दिल्ली | शुभदा शक्ति न्यूज़। स्कूल-कॉलेज में दाखिला मिलना पर्याप्त नहीं, वहां कक्षा, पुस्तकालय और शौचालय तक पहुंच भी सुगम होनी चाहिए। दिव्यांग विद्यार्थियों की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से शिक्षण संस्थानों में सुलभता संबंधी सुविधाओं की निगरानी मजबूत करने की सिफारिश की है। इनमें रैंप, व्हीलचेयर और सुलभ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं।
RTI अपीलों से सामने आया सुविधाओं का सवाल
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने दो अलग-अलग मामलों में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25(5) के तहत सुधार संबंधी सिफारिशें कीं। अपीलों में शिक्षण संस्थानों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए जरूरी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी मांगी गई थी।
बिहार विश्वविद्यालय ने बताई सुविधाओं की स्थिति
UGC से जुड़े मामले में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की सुविधाओं को लेकर शिकायत पर जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का विवरण मांगा गया था। विश्वविद्यालय ने आयोग को बताया कि प्रशासनिक भवन और प्रमुख विभागों तक पहुंच के लिए रैंप बनाए गए हैं। दिव्यांग पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग सुलभ शौचालयों का निर्माण जारी है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों को हैंडरेल वाले रैंप, सुलभ शौचालय, जरूरत के अनुसार लिफ्ट, आरक्षित पार्किंग, अनुकूल पुस्तकालय सुविधाएं और व्हीलचेयर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कॉलेजों से इनकी वास्तविक स्थिति का विवरण भी मांगा गया है।
UGC और CBSE को क्या सिफारिश मिली?
आयोग ने UGC से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप बाधारहित पहुंच के लिए उपयुक्त दिशा-निर्देश जारी करने और संबंधित विश्वविद्यालयों में उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की सिफारिश की।
CBSE से संबंधित दूसरी अपील बिहार और दिल्ली-एनसीआर के सरकारी एवं निजी स्कूलों में सुलभता सुविधाओं की शिकायतों से जुड़ी थी। बोर्ड ने बताया कि संबद्ध स्कूलों के लिए विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुविधाओं संबंधी अनिवार्य दिशा-निर्देश पहले से जारी हैं। आयोग ने आवश्यक निर्देश और निगरानी व्यवस्था के जरिए इनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की सिफारिश की।
नियम पहले से मौजूद, अब अमल पर जोर
CBSE के संबद्धता नियमों में व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए प्रवेश-निकास और शौचालयों तक रैंप जैसी सुविधाओं का प्रावधान है। ऐसे में सवाल केवल नियम बनाने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि विद्यार्थी वास्तव में उनका उपयोग कर सकें।
शुभदा शक्ति का सरोकार: समावेशी शिक्षा की सफलता का पैमाना सिर्फ नामांकन नहीं होना चाहिए। परिसर में सुरक्षित आवाजाही, सम्मानजनक सुविधाएं और यथासंभव स्वतंत्र पहुंच भी उतनी ही जरूरी हैं। नियमित निरीक्षण, सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का सत्यापन और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं।





