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आनासागर व वरूण सागर झील की डी सिल्टिंग की प्रक्रिया को रुकवाने का दावा खारिज

राज्य सरकार की ओर से राजकीय अधिवक्ता जे पी शर्मा ने की पैरवी 

अजमेर। आनासागर झील व वरुण सागर झील में प्रस्तावित डी सिल्टिंग कार्य को रोकने हेतु न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत स्थाई निषेधाज्ञा के वाद में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया। प्रकरण की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से राजकीय अधिवक्ता जे पी शर्मा ने याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत प्रतिनिधित्व वाद को विधिक दृष्टि से पोषणीय नहीं होने से इसी स्तर पर ख़ारिज किए जाने हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था।

याचिकाकर्ता राजकुमार जयपाल व सैयद फखरे मोइन ने आनासागर व वरुण सागर झीलों के लिए प्रस्तावित डी शिल्टिंग कार्य को रोकने के लिए जो जन प्रतिनिधित्व वाद न्यायालय सिविल न्यायाधीश अजमेर जिला उत्तर अजमेर के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, जिसमें राज्य सरकार की ओर से आदेश 7 नियम 11 सीपीसी का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर न्यायालय को बताया गया था कि उक्त वाद विधि द्वारा बाधित है, क्योंकि सिविल न्यायालय को उक्त वाद पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है एवं उक्त वाद पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार केवल मात्र राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण को ही प्राप्त है, क्योंकि वादीगण द्वारा उक्त वाद के माध्यम से झीलों की वेटलेन्ड/आर्द्रभूमियों के संरक्षण, वैज्ञानिक सीमांकन, जीव विविधता संरक्षण, जल गुणवत्ता एवं परिस्थितिकीय संतुलन बनाये रखने हेतु वाद प्रस्तुत किया गया है, जो विषय धारा 14 राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अधिनियम अनुसूची 1 में वर्णित है, जिसके लिए सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार को बाधित किया गया है एवं मामले की सुनवाई का एकमात्र क्षेत्राधिकार राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण को ही प्राप्त है, इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अधिनियम की धारा 29 के तहत सिविल कोर्ट की अधिकारिता को ऐसे मामलों की सुनवाई से बाधित किया हुआ है।

वाद राजनीतिक उद्देश्यों को न्यायपालिका के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास सहित कई तर्क दिए 

राजकीय अभिभाषक जे पी शर्मा ने यह भी बताया की याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत यह प्रतिनिधित्व वाद पूर्णतया राजनीतिक उद्देश्यों को न्यायपालिका के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास मात्र है। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2021 व वर्ष 2023 में सुरेंद्र सिंह शेखावत और अशोक मलिक की याचिकाओं पर आनासागर के भराव क्षेत्र में सेवन वंडर व पाथ वे को लेकर आदेश जारी किया व उनके संबंध में वर्तमान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भी अपील लंबित है, जिसमें भी समय-समय पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा जारी आदेशों के क्रम में आनासागर के भराव क्षेत्र में किए गए अतिक्रमणों में व उन अतिक्रमणों के माध्यम से आनासागर की भराव क्षमता में जो कमी आई है उनको हटाने के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए। विगत कुछ वर्षों से आनासागर के भराव क्षमता में कमी के चलते बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने के कारण राज्य सरकार ने आनासागर व वरुण सागर झीलों की भराव क्षमता में वृद्धि हो इसके लिए उसमें पड़े मलवे वह बरसात के साथ बहकर आई गाद को निकालने हेतु डिशेल्टिंग का कार्य करने का तय किया, किंतु याचिकाकर्ता न केवल मात्र रुकवाना चाहते हैं, बल्कि अवैध अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों को संरक्षण देने के लिए दुर्भावना से यह वाद प्रस्तुत किया गया है, क्योंकि पूर्व में आनासागर की भराव क्षेत्र में अवैध निर्माण व अतिक्रमण किए जाने के कारण अजमेर विकास प्राधिकरण द्वारा ऐसे अवैध निर्माण को चिन्हित कर उन्हें सीज़ किया गया है, उन्हीं में से एक व्यक्ति हरीश छतवानी ने गौरव पथ संघर्ष समिति के नाम से सीमा विवाद व सीमांकन विवाद बताकर आनासागर झील के वैज्ञानिक सीमांकन, गाद निष्कासन तथा वेटलैंड सीमा के निर्धारण के संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था, जिसके दस्तावेज याचिकाकर्ताओं द्वारा उक्त वाद में प्रस्तुत किए गए है, जिससे यह स्पष्ट है प्रतीत होता है कि उक्त याचिकार्ताओं व अवैध निर्माणकर्ताओं के मध्य दुर्भि संधि है एवं अवैध निर्माणकर्ताओं को यह अंदेशा है कि सरकार डिशेल्टिंग के माध्यम से अवैध निर्माण की संपत्ति को भी ध्वस्त कर सकती है, इसी मिलीभक्ति के चलते यह वाद प्रस्तुत किया गया है ताकि डिशेल्टिंग की प्रक्रिया को रुकवा कर अवैध निर्माणकर्ताओं को लाभ पहुंचाया जा सके। राजकीय अभिभाषक ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ताओं के किसी भी प्रकार का सिविल अधिकार को कोई नुकसान कारित नहीं हुआ है एवं वाद की प्रकृति सिविल नहीं होकर पर्यावरणीय ही है जिसकी सुनवाई का एकमात्र क्षेत्राधिकार राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण को ही प्राप्त है। मामले में याचिकाकर्ताओं ने दिनांक 24.07.2026 को सरकार से और से प्रस्तुत उक्त आवेदन का याचिकाकर्ताओं की ओर से विस्तृत जवाब पेश किया गया, तत्पश्चात न्यायालय द्वारा मामले में बहस सुनी गई एवं प्रकरण आदेश हेतु नियत किया गया था।

Amit
Author: Amit

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