विकलांगता को मात देने वाले हीरो, स्पर्श
हड्डियां जितनी कमजोर, हौसला उतना मजबूत जन्म के बाद माता-पिता को उस बच्चे को गोद में लेने के लिए भी करीब 6 महीनों तक इंतजार
हड्डियां जितनी कमजोर, हौसला उतना मजबूत जन्म के बाद माता-पिता को उस बच्चे को गोद में लेने के लिए भी करीब 6 महीनों तक इंतजार
मां-बेटी ने कायम की मिसाल: लोग दिव्यांगों को प्यार की नजर से देखें, तो बदल जाएगा दुनिया का नजरिया उस प्यार का जश्न मनाने के
मैं अपने शरीर से लाचार सही लोगों की नज़रों में बेकार सही, फिर भी मैंने अपने जीवन में माना कभी हार नहीं क्योंकि मैं दिव्यांग
शुभदा की मुहिम ” एक मुस्कान” क्या है? जानिये शुभदा एक ऐसी संस्था है, जिसका उदेश्य दिव्यांग बच्चों के जीवन को बेहतर और सम्मानियों बनाने
मन की आंखों से लिखे गीत, संगीत के इस नायक के बिना ‘रामायण’ भी होती अधूरी भारतवर्ष की धरती पर एक ऐसे संगीतकार और गीतकार
बाराबंकी में दिव्यांगजन रोजगार मेला:55 युवाओं का साक्षात्कार, 19 को नौकरी; स्वरोजगार की भी दी जानकारी बाराबंकी में दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विकास
दिव्यांगों के लिए 22 व 25 जुलाई को लगेंगे कैम्प कानपुर में दिव्यांग बच्चों के लिए 22 और 25 जुलाई को कैम्प आयोजित होंगे। इन
दिव्यांग बच्चों के चयन के लिए लगेगा मेडिकल असेसमेंट कैंप सोनभद्र। समग्र शिक्षा अभियान के तहत दिव्यांग बच्चों के लिए जिले में मेडिकल असेसमेंट कैंप
थैलेसीमिया से ग्रस्त ‘हर्षद’ बनेगा डॉक्टर, पहले ही प्रयास में क्लियर किया NEET, माता-पिता ने छोड़ दी थी बचने की आस सिरोही जिले के पिंडवाड़ा
*क्यों ज़रूरी है हमारे समाज को “शुभदा” जैसी संस्था?* दिव्यांग यानी दिव्य अंग वाले लोग हमारे समाज का अहम हिस्सा हैं। लेकिन क्या हम सच
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