अजमेर की सड़कों पर अब AI की नजर: 54 हाईटेक कैमरे संभालेंगे ट्रैफिक, दिव्यांगजनों के लिए भी बन सकती है राह आसान
अजमेर। अजमेर की सड़कों पर यातायात नियम तोड़ने वालों पर अब तकनीक की पैनी नजर होगी। जिले में ट्रैफिक व्यवस्था को हाईटेक बनाने की दिशा में 54 AI आधारित कैमरे लगाने की तैयारी है। ये कैमरे अजमेर के साथ किशनगढ़, पुष्कर, नसीराबाद और केकड़ी में लगाए जाएंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य यातायात नियमों की बेहतर निगरानी, सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और ट्रैफिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन 54 कैमरों में सबसे ज्यादा कैमरे अजमेर में लगाए जाएंगे।
कहां लगेंगे कितने कैमरे?

इस तरह अजमेर में 30, किशनगढ़ में 9, पुष्कर में 5, नसीराबाद में 4 और केकड़ी में 6 कैमरे लगाने की जानकारी सामने आई है। पांचों क्षेत्रों को मिलाकर कुल संख्या 54 होती है।
सिर्फ रिकॉर्डिंग नहीं, AI करेगा ट्रैफिक की निगरानी
सामान्य CCTV कैमरों के मुकाबले AI आधारित ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम ज्यादा स्मार्ट तरीके से काम कर सकता है। कैमरों से प्राप्त तस्वीरों और वीडियो का सॉफ्टवेयर के जरिए विश्लेषण कर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को चिन्हित किया जा सकता है।
राजस्थान में पहले से विकसित किए जा रहे Intelligent Traffic Management System (ITMS) में AI आधारित कैमरों के जरिए बिना हेलमेट वाहन चलाना, सीट बेल्ट का उल्लंघन, दोपहिया पर तीन सवारी, वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल, ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट और स्टॉप लाइन उल्लंघन जैसी गतिविधियों की पहचान करने की तकनीक शामिल है।
ऐसे सिस्टम Automatic Number Plate Recognition यानी ANPR के जरिए वाहन की नंबर प्लेट भी पढ़ सकते हैं। इससे नियम तोड़ने वाले वाहन की पहचान कर आगे की कार्रवाई आसान हो सकती है।
हालांकि अजमेर के इन 54 कैमरों में इनमें से कौन-कौन से फीचर सक्रिय किए जाएंगे, इसकी विस्तृत आधिकारिक तकनीकी सूची सामने आने के बाद ही प्रत्येक सुविधा की पुष्टि की जा सकेगी।
राजस्थान में तेजी से बढ़ रहा AI ट्रैफिक मैनेजमेंट
राजस्थान सरकार पहले ही AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। जयपुर में AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट का पायलट प्रोजेक्ट किया गया, जिसमें कैमरे लाइव ट्रैफिक की स्थिति को समझकर सिग्नल टाइमिंग को नियंत्रित कर सकते हैं।
राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के मुताबिक AI आधारित ट्रैफिक सिस्टम का उद्देश्य सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक अनुशासन को बेहतर करने के साथ प्रमुख चौराहों पर जाम कम करना भी है।
दिव्यांगजनों के लिए इस तकनीक के क्या मायने?

AI कैमरों की यह खबर केवल चालान और ट्रैफिक नियमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शुभदा शक्ति के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम दिव्यांगजनों के लिए सड़कों को ज्यादा सुरक्षित और सुलभ बनाने में भी मदद कर सकता है?
दृष्टिबाधित, व्हीलचेयर उपयोगकर्ता, चलने-फिरने में कठिनाई वाले और अन्य दिव्यांगजनों के लिए व्यस्त सड़क या चौराहा पार करना कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज रफ्तार वाहन, गलत दिशा में वाहन चलाना, जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन खड़े करना और पैदल यात्री क्षेत्र में अतिक्रमण जैसी समस्याएं उनके लिए जोखिम को और बढ़ा सकती हैं।
ऐसे में बेहतर ट्रैफिक निगरानी और नियमों का प्रभावी पालन दिव्यांगजनों सहित सभी पैदल यात्रियों की सुरक्षा में अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर सकता है।
AI सिस्टम को दिव्यांग-अनुकूल बनाया जाए तो मिल सकते हैं बड़े फायदे
भविष्य में अजमेर के स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम को Accessibility Features से जोड़ा जाए तो यह और उपयोगी साबित हो सकता है। उदाहरण के तौर पर—
1. जेब्रा क्रॉसिंग को खाली रखने में मदद:
कैमरों के जरिए जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन खड़ा करने जैसे उल्लंघनों की पहचान प्रभावी ढंग से हो तो व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं और दृष्टिबाधित लोगों को सड़क पार करने में सुविधा हो सकती है।
2. सड़क पार करने के लिए पर्याप्त समय:
स्मार्ट सिग्नल में पैदल यात्रियों की जरूरत के अनुसार पर्याप्त crossing time उपलब्ध कराया जाए तो कम गतिशीलता वाले लोगों और वरिष्ठ नागरिकों को फायदा हो सकता है।
3. दृष्टिबाधित लोगों के लिए Audible Signal:
रेड-ग्रीन लाइट के साथ आवाज या बीप आधारित संकेत जोड़े जाएं तो दृष्टिबाधित व्यक्ति यह समझ सकता है कि सड़क पार करने का सुरक्षित समय कब है।
4. रैम्प और फुटपाथ को बाधामुक्त रखने में मदद:
भविष्य में वीडियो एनालिटिक्स का उपयोग ऐसे स्थानों की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है जहां वाहनों की अवैध पार्किंग व्हीलचेयर रैम्प, फुटपाथ या pedestrian crossing को बाधित करती है।
5. खतरनाक ड्राइविंग पर नियंत्रण:
ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंपिंग और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सड़क पर मौजूद दिव्यांग पैदल यात्रियों के लिए भी सुरक्षा बढ़ा सकता है।
कानून भी Accessible Traffic Infrastructure पर देता है जोर
दिव्यांगजनों के लिए सड़क और परिवहन व्यवस्था को सुलभ बनाना केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि अधिकार और समान भागीदारी से भी जुड़ा मामला है।
सरकारी दिशा-निर्देशों में यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं को दिव्यांगजनों के लिए अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया गया है। इसमें दृष्टिबाधित व्यक्तियों की सहायता के लिए ट्रैफिक लाइट के साथ auditory signals, व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के अनुकूल सड़क/क्रॉसिंग डिजाइन और अन्य accessibility measures महत्वपूर्ण माने गए हैं।
ऐसे में अजमेर में लगने वाले नए AI कैमरों के साथ यदि भविष्य में Accessible Smart Traffic System विकसित किया जाता है तो यह तकनीक सिर्फ चालान काटने का माध्यम न रहकर समावेशी सड़क सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
शुभदा शक्ति का सवाल—क्या ‘स्मार्ट ट्रैफिक’ में दिव्यांगजन भी होंगे शामिल?
अजमेर में AI कैमरों का विस्तार निश्चित रूप से तकनीक आधारित ट्रैफिक व्यवस्था की ओर एक कदम है। लेकिन स्मार्ट सिटी और स्मार्ट ट्रैफिक की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब सड़कें समाज के हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित और सुलभ हों।
क्या अजमेर के प्रमुख चौराहों पर दृष्टिबाधित लोगों के लिए ऑडियो ट्रैफिक सिग्नल होंगे? क्या व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए रैम्प और बाधामुक्त जेब्रा क्रॉसिंग सुनिश्चित की जाएगी? क्या AI कैमरे दिव्यांगजन के लिए बनाए गए रास्तों पर अवैध पार्किंग की पहचान कर सकेंगे?
ये ऐसे सवाल हैं जिन पर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को तकनीक के विस्तार के साथ विचार करने की जरूरत है।
क्योंकि AI से ट्रैफिक ‘स्मार्ट’ होना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका ‘सुलभ और समावेशी’ होना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
शुभदा शक्ति | अजमेर
नोट: दिव्यांगजनों के लिए बताए गए AI आधारित संभावित लाभों को अजमेर के 54 कैमरों की घोषित विशेषताओं के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। ये ऐसी accessibility possibilities हैं जिन्हें स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था के साथ जोड़ा जा सकता है।
फैक्ट-चेक आधार: 54 कैमरों का उपलब्ध क्षेत्रवार ब्रेकअप—अजमेर 30, किशनगढ़ 9, पुष्कर 5, नसीराबाद 4 और केकड़ी 6—एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में मिलता है। � राजस्थान सरकार के दस्तावेज में AI ट्रैफिक सिस्टम के तहत हेलमेट, सीट बेल्ट, ट्रिपल राइडिंग, मोबाइल उपयोग, स्पीड और रेड-लाइट उल्लंघन जैसी क्षमताओं का उल्लेख है। � वहीं राजस्थान की AI/ML Policy 2026 में AI को inclusive, fair और citizen-centric रखने पर जोर दिया गया है। �






