114 पदकों से भारत ने रचा इतिहास, मोना अग्रवाल की स्वर्णिम उड़ान ने दुनिया को दिखाया दिव्यांग शक्ति का दम!
एशियन पैरा गेम्स में 30 स्वर्ण सहित 114 पदकों की ऐतिहासिक उपलब्धि; मोना अग्रवाल के दो स्वर्ण और विश्व रिकॉर्ड ने बढ़ाया देश का गौरव, लेकिन दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं और समान अवसरों पर उठे अहम सवाल।

शुभदा शक्ति न्यूज़ | विशेष खेल समीक्षा | 25 अक्टूबर 2026
अजमेर। जापान में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय दिव्यांग खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए दुनिया को अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दिया। भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य सहित कुल 114 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के बढ़ते सामर्थ्य का प्रमाण है। इस शानदार प्रदर्शन में पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल के दो स्वर्ण पदक और विश्व रिकॉर्ड विशेष आकर्षण रहे।
मोना अग्रवाल की ऐतिहासिक सफलता

भारतीय पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन्स SH1 स्पर्धा में 357.5 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड बनाया और अपना दूसरा स्वर्ण पदक जीता। उनका प्रदर्शन केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि दिव्यांग महिला खिलाड़ियों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है।
निशानेबाजी में एकाग्रता, मानसिक मजबूती और तकनीकी दक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है। मोना ने साबित किया कि उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिलने पर दिव्यांग खिलाड़ी विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा में असाधारण सफलता हासिल कर सकते हैं।
114 पदक: उपलब्धि बड़ी, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं
भारत की ऐतिहासिक सफलता के बावजूद देश में पैरा खेलों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल बने हुए हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली दिव्यांग खिलाड़ियों को आज भी सुलभ खेल मैदान, विशेष उपकरण, प्रशिक्षित कोच और आर्थिक सहायता प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण से पदक संख्या बढ़ना सकारात्मक संकेत है, लेकिन खेल व्यवस्था की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब अधिक से अधिक दिव्यांग बच्चों और युवाओं को शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा के समान अवसर मिलेंगे।
दिव्यांग महिला खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद
मोना अग्रवाल जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देती हैं। विशेषकर दिव्यांग महिलाओं के लिए खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान का सशक्त माध्यम बन सकता है।
सरकार और खेल संस्थाओं को जिला स्तर पर दिव्यांगजन-अनुकूल प्रशिक्षण केंद्र, सुरक्षित परिवहन, विशेषज्ञ प्रशिक्षक और आर्थिक सहायता की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों को भी उनकी क्षमताओं के अनुरूप खेल अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
शुभदा शक्ति का दृष्टिकोण: सम्मान के साथ समान अवसर भी जरूरी
शुभदा शक्ति न्यूज़ का मानना है कि दिव्यांग खिलाड़ियों की उपलब्धियों का वास्तविक सम्मान केवल पुरस्कार और सम्मान समारोहों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा, खेल, रोजगार और सामाजिक जीवन में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
भारत के 114 पदक और मोना अग्रवाल की स्वर्णिम सफलता एक स्पष्ट संदेश देते हैं—दिव्यांगता प्रतिभा की सीमा नहीं है। जरूरत है ऐसी समावेशी व्यवस्था की, जिसमें हर खिलाड़ी को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिले।
शुभदा शक्ति न्यूज़ — दिव्यांगों को दुनिया और दुनिया को दिव्यांगों से जोड़ना।





