पाकिस्तान से दोस्ती, लेकिन भारत की कीमत पर नहीं! ऑपरेशन सिंदूर पर मार्को रुबियो का बड़ा बयान
भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान हुई गोपनीय बातचीत पर चुप्पी, आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े रहने का भरोसा; अमेरिका ने कहा—नहीं चाहते एक और युद्ध।

शुभदा शक्ति न्यूज़। भारत और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बदलते कूटनीतिक संबंधों के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। भारत दौरे पर आए रुबियो ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका की बढ़ती नजदीकियां भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी को कमजोर नहीं करेंगी। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान तनाव, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी अमेरिका का पक्ष रखा।
पाकिस्तान से रिश्ते भारत की कीमत पर नहीं
मुंबई के ऐतिहासिक ताज महल पैलेस होटल में आजतक को दिए विशेष साक्षात्कार में रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंध किसी भी स्थिति में भारत के साथ उसकी साझेदारी की कीमत पर नहीं हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि आतंकवाद को लेकर भारत और अमेरिका की चिंताएं समान हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों में ताज होटल भी आतंकियों का निशाना बना था।
ऑपरेशन सिंदूर की गोपनीय बातचीत पर क्या बोले?
पहलगाम आतंकी हमले के बाद मई 2025 में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर और 10 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान अमेरिकी कूटनीतिक प्रयासों पर भी रुबियो से सवाल किया गया। उनसे दोनों देशों के नेतृत्व के साथ हुई बातचीत का विवरण पूछा गया, लेकिन उन्होंने गोपनीय चर्चा सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। रुबियो का तर्क था कि ऐसी बातचीत का खुलासा करने से भविष्य में कूटनीतिक संवाद के प्रति दूसरे देशों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
भारत-पाकिस्तान के बीच एक और युद्ध नहीं चाहता अमेरिका
रुबियो ने कहा कि जब दो देशों के बीच तनाव बड़े सैन्य संघर्ष में बदलने की आशंका पैदा करता है, तब अमेरिका तनाव कम करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने का प्रयास करता है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका दोनों पड़ोसी देशों के बीच एक और युद्ध नहीं देखना चाहता। उनके अनुसार, संवाद और व्यापारिक सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता तथा आर्थिक समृद्धि के अवसर बढ़ा सकते हैं।
आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दिया उदाहरण
अमेरिकी विदेश मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ अपने देश की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा के विरुद्ध चलाए गए अभियानों का उदाहरण दिया। उन्होंने ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अमेरिकी अभियान का भी जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि आतंकवाद और चरमपंथ से उत्पन्न खतरे केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्या मायने?
रुबियो के बयानों से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन भारत के साथ रणनीतिक सहयोग बनाए रखते हुए पाकिस्तान के साथ भी कूटनीतिक संपर्क जारी रखना चाहता है। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका की वास्तविक भूमिका और पर्दे के पीछे हुई बातचीत को लेकर उन्होंने कोई नया विस्तृत खुलासा नहीं किया। ऐसे में भारत की सुरक्षा चिंताओं और पाकिस्तान के साथ अमेरिकी संबंधों के बीच संतुलन भविष्य में भी कूटनीतिक चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।
शुभदा शक्ति न्यूज़ का विश्लेषण: दक्षिण एशिया की सुरक्षा परिस्थितियों में भारत-अमेरिका साझेदारी का महत्व लगातार बना हुआ है। रुबियो के आश्वासन के बावजूद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और पाकिस्तान से संबंधों के मामले में अमेरिका की घोषित नीति उसके व्यावहारिक कदमों में किस तरह दिखाई देती है।






