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‘पाकिस्तान हमें बचा रहा है’—फारूक के बयान पर बवाल!

‘पाकिस्तान हमें बचा रहा है’—फारूक अब्दुल्ला के बयान पर सियासी घमासान, भाजपा ने की कार्रवाई की मांग

बारामूला की रैली में दिल्ली की नीयत पर उठाए सवाल, कश्मीर की पहचान और अनुच्छेद 370 का मुद्दा उठाया; भाजपा ने बयान को राष्ट्रविरोधी बताते हुए मांगी कार्रवाई।

शुभदा शक्ति न्यूज़ | श्रीनगर / अजमेर | 25 अक्टूबर 2026

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। शनिवार, 24 अक्टूबर को उत्तर कश्मीर के बारामूला में आयोजित पार्टी सम्मेलन में उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और कश्मीर के भविष्य को लेकर सवाल उठाए। पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठाए जाने को लेकर उनकी टिप्पणी पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

दिल्ली से न्याय की उम्मीद पर उठाए सवाल

पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने पूछा कि आखिर दिल्ली से क्या उम्मीद की जा सकती है और क्या केंद्र से न्याय मिलने की आशा रखी जा सकती है। उन्होंने लोगों से अपने अधिकारों और पहचान के लिए मजबूती से खड़े होने की अपील की। उनका कहना था कि यदि लोग अपनी आवाज नहीं उठाएंगे तो उनकी पहचान और भविष्य प्रभावित हो सकते हैं।

पाकिस्तान को लेकर क्या बोले फारूक अब्दुल्ला?

अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का पड़ोसी देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार कश्मीर का मुद्दा उठा रहा है और इसे अभी तक अनसुलझा बता रहा है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण दिल्ली चुप है और पड़ोसी की यह सक्रियता कश्मीरियों को बचा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए। उनके इसी बयान ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है।

भाजपा का विरोध, कानूनी कार्रवाई की मांग

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने टिप्पणी को राष्ट्रविरोधी और राजद्रोहपूर्ण करार देते हुए पुलिस से मामले की जांच तथा कानूनी कार्रवाई की मांग की। भाजपा का आरोप है कि ऐसे बयान पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी रुख को राजनीतिक समर्थन देते हैं। हालांकि, यह भाजपा का आरोप है और इससे किसी अपराध का कानूनी रूप से सिद्ध होना नहीं माना जा सकता।

अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर की पहचान का सवाल

सम्मेलन में फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की पहचान और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने स्वयं को भारतीय मानने से कभी इनकार नहीं किया। उनके अनुसार, कश्मीर के भारत में विलय को स्वीकार करने का इतिहास रहा है।

कश्मीर की राजनीति में बयान के मायने

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक अधिकारों, संवैधानिक प्रावधानों और केंद्र तथा स्थानीय नेतृत्व के संबंधों पर बहस जारी है। फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता अपने अधिकारों और पहचान के मुद्दे उठाते रहे हैं, वहीं भाजपा ने पाकिस्तान संबंधी टिप्पणी पर आपत्ति दर्ज कराई है।

इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि अब्दुल्ला ने पाकिस्तान की ओर से कश्मीर मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की बात कही थी। इसे पाकिस्तान द्वारा वास्तविक सुरक्षा उपलब्ध कराने के सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। फिलहाल यह बयान राजनीतिक बहस और विरोध का विषय बना हुआ है।

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APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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