रवाड़ा, SOG की जांच में चौंकाने वाला खुलास

सरकारी नौकरी में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा

जयपुर, 6 अगस्त (हि.स.)। एओजी ने सरकारी नौकरी में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। एसओजी पुलिस अधीक्षक ज्ञान चंद ने बताया कि विभिन्न स्त्रोतों से सूचना मिली कि विगत समय से विभिन्न सरकारी नौकरियों में अनेक चयनित उम्मीदवारों ने दिव्यांग नहीं होते हुए भी गलत दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनवा कर सरकारी नौकरी प्राप्त कर ली है।

राजस्थान में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का सनसनीखेज मामला सामने आया है. एसओजी की जांच में खुलासा हुआ कि कई लोगों ने झूठे प्रमाण-पत्रों से सरकारी नौकरियां हासिल की है.

सूचना मिलने के बाद एसओजी अतिरक्त पुलिस अधीक्षक भवानी शंकर मीणा के नेतृत्व में जांच दल गठित कर एसएमएस मेडीकल कॉलेज के विभिन्न विशेषज्ञों का बोर्ड गठित करवा कर दिव्यांग श्रेणी के लोक सेवकों का पुन मेडीकल करवाया गया । जिसमें 29 दिव्यांग लोक सेवकों की मेडीकल के माध्यम से रिपोर्ट प्राप्त की। जिसमें से मात्र 5 लोक सेवकों की दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक होना पाया गया और इनके अलावा 24 तथाकथित दिव्यांगों को मेडीकल बोर्ड ने दिव्यांग कैटेगरी के लिए अनफिट बताया। श्रव्यबाधित 13 में से 13 लोक सेवक दिव्यांग कैटेगरी के लिए अनफिट पाए गए। दृष्टिबाधित कथाकथित 8 दिव्यांग में से 6 दिव्यांग कैटेगरी के नहीं पाए गए। इसी तरह लोकोमोटर एवं अन्य प्रकार के दिव्यांग वाले 8 लोक सेवकों में से 5 दिव्यांग कैटेगरी के लिए अनफिट पाए गए।

मेडीकल परीक्षण ये लोग पाए अयोग्य

महेंद्र पाल पुत्र गिरधारी सिंह, तहसील पुलिस थाना भीम राजसमंद, सवाई सिंह गुर्जर टिगरिया का पुरा,हिण्डौन ,करौली, हन्टु गुर्जर चंदवाजी जयपुर,मनीष कुमार कटारा बरौली,रुपवास ,भरतपुर,केशव उर्फ खुब्बाराम रेनवाल, कविता रेनवाल, बिकेश कुमार नदबई ,भरतपुर, भानुप्रतान कटारा,रुपवास ,नफीस जुरहरा ,भरतपुर, रणजीत सिंह बयाना ,भरतपुर,कलुआ राम बयाना भरतपुर, पवन कुमार आबूरोड सिरोही,विनोद कंवर आबू रोड सिरोही, दिनेश कुमार ,धौरीमन्ना बाड़मेर,लोकेश नदबई भरतपुर, संजय नोखा बीकानेर, दीपू डीडवाना ,कुचामन,गेपू बलूपुरा पाली,प्रशांत सिं गांधी नगर सिरोही,छिन्द्रपाल सिंह केसरीसिंहपुरा गंगानगर,आसी कुमारी मारुडी, बाड़मेर, डॉ शंकर लाल मीणा देवपुरा बूंदी, जगदीश चौधरी रुपनगढ जिला अजमेंर, किशोर सिंह सबलपुर डीडवाना कुचामन।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट ने खोली पोल 

मेडिकल बोर्ड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ. 29 में से केवल 5 कर्मचारी ही 40% या उससे अधिक दिव्यांगता की श्रेणी में आए. बाकी 24 कर्मचारियों को दिव्यांगता के लिए अयोग्य पाया गया. श्रवण बाधित (कान से सुनने में अक्षम) 13 कर्मचारियों में से सभी 13 फर्जी पाए गए. दृष्टि बाधित (आंखों से कम दिखने वाले) 8 कर्मचारियों में से 6 अयोग्य निकले. इसी तरह, लोकोमोटर (हाथ-पैर की अक्षमता) और अन्य श्रेणियों के 8 कर्मचारियों में से 5 को भी अनफिट घोषित किया गया.

 

 

 

 

 

 

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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