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जी, सुना क्या?? नेपाल आपदा, चीन नहीं सुधरेगा ?

नेपाल की तबाही के बीच चीन पर ‘सूचना का पहरा’! वीडियो गायब, सरकारी आंकड़ों से अलग दावा किया तो जेल-जुर्माना; कोरोना काल की याद क्यों आई?

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद एक तरफ हजारों परिवार अपनों की तलाश और तबाही से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ चीन में आपदा से जुड़ी सूचनाओं पर कथित नियंत्रण ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। तिब्बत के प्रभावित इलाकों से सामने आने वाली तस्वीरों और वीडियो के सोशल मीडिया से गायब होने की खबरों के बीच सवाल उठ रहा है—आखिर चीन दुनिया से क्या छिपाना चाहता है?

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने रसुवा सहित कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। इसका असर नेपाल से लगी तिब्बत सीमा के दूसरी ओर भी दिखाई दिया। अब चीन के तिब्बती क्षेत्र, विशेषकर गिरोंग (Gyirong) पोर्ट से आपदा की स्वतंत्र जानकारी सामने आने में कथित पाबंदियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ स्थानीय वीडियो और पोस्ट चीनी सोशल मीडिया से हटाए जाने के दावे सामने आए हैं।

सरकारी आंकड़ों से अलग दावा पड़ा भारी

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की साइबर सुरक्षा पुलिस ने गिरोंग क्षेत्र में भूस्खलन और बाढ़ से जुड़ी कथित अफवाहों के मामले में 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। चीनी अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों ने बिना प्रमाण के हताहतों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई और लोगों को गुमराह किया।

रिपोर्ट के अनुसार, एक इंटरनेट यूजर ने हजारों लोगों के लापता होने का दावा किया, जबकि दूसरे ने चीनी क्षेत्र में 3,000 से अधिक मौतों की बात लिखी। चीन ने ऐसे दावों को गलत बताया और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। चीनी कानून के तहत आपदा से संबंधित जानबूझकर अफवाह फैलाने पर हिरासत और जुर्माने का प्रावधान है, जबकि गंभीर मामलों में कई साल की जेल भी हो सकती है।

कोरोना काल से क्यों हो रही तुलना?

इस घटनाक्रम की तुलना 2020 में कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर से की जा रही है। उस समय भी चीन की सूचना नीति और महामारी से जुड़ी शुरुआती जानकारियों के नियंत्रण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे थे। हालांकि कोरोना महामारी और मौजूदा प्राकृतिक आपदा बिल्कुल अलग घटनाएं हैं, लेकिन दोनों मामलों में सरकारी सूचना और स्वतंत्र रूप से सामने आने वाली जानकारी के बीच अंतर को लेकर बहस समान दिखाई देती है।

तिब्बत से सूचनाओं का स्वतंत्र प्रवाह पहले से संवेदनशील विषय रहा है। मौजूदा आपदा के दौरान भी स्थानीय वीडियो के गायब होने और प्रभावित इलाकों तक स्वतंत्र पहुंच की सीमाओं की खबरों ने संदेह को और बढ़ाया है।

चीन ने आरोपों को किया खारिज

हालांकि इस पूरे मामले में चीन का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। बीजिंग का कहना है कि आपदा से जुड़ी गलत और भ्रामक सूचनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है। वहीं नेपाल को समय रहते पर्याप्त चेतावनी और डेटा नहीं देने के आरोपों को भी चीन ने खारिज किया है।

चीनी दूतावास का कहना है कि नेपाल के साथ महत्वपूर्ण सूचनाएं समय पर साझा की गईं और दोनों देशों के बीच आपदा संबंधी डेटा साझा करने की व्यवस्था पर काम जारी है। चीन ने नेपाल को राहत और आर्थिक सहायता देने की बात भी कही है। नेपाल हालांकि अब चीन से अधिक प्रभावी और रियल-टाइम आपदा डेटा साझा करने की व्यवस्था चाहता है।

नेपाल की इस त्रासदी ने इसलिए केवल हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक खतरों को ही उजागर नहीं किया है, बल्कि एक बड़ा सवाल भी सामने रखा है—आपदा के समय लोगों तक सही और पारदर्शी जानकारी पहुंचना क्या राहत और बचाव जितना ही जरूरी नहीं है?

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Author: APOORV SEN

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