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जी, सुना क्या??दुनिया को कर्ज बांटने वाला अब खुद क्यों मांग रहा कर्ज़ ?

दुनिया को कर्ज बांटने वाला सऊदी अरब खुद क्यों मांग रहा अरबों डॉलर का लोन? क्राउन प्रिंस सलमान के ‘Vision 2030’ पर बढ़ा आर्थिक दबाव

रियाद। दशकों से अपनी तेल संपदा और विशाल आर्थिक ताकत के लिए पहचाना जाने वाला सऊदी अरब अब खुद अंतरराष्ट्रीय बैंकों से अरबों डॉलर जुटाने की तैयारी में है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब कम से कम 8 अरब डॉलर यानी करीब 7.6 खरब रुपये के नए कर्ज के लिए बैंकों से शुरुआती बातचीत कर रहा है। सवाल उठता है कि दुनिया के कई देशों में अरबों डॉलर का निवेश और आर्थिक सहायता करने वाले सऊदी अरब को आखिर इतने बड़े कर्ज की जरूरत क्यों पड़ रही है?

8 अरब डॉलर के नए कर्ज की तैयारी

रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी अरब का National Debt Management Center (NDMC) संभावित सिंडिकेटेड लोन के लिए बैंकों से बातचीत कर रहा है। सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco भी अलग से वित्त जुटाने के विकल्प तलाश रही है। हालांकि बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और सौदा अंतिम नहीं हुआ है।

सऊदी अरब की वित्तीय जरूरत केवल इस 8 अरब डॉलर तक सीमित नहीं है। सरकार ने 2026 के लिए अपनी कुल वित्तीय जरूरत लगभग 217 अरब सऊदी रियाल आंकी थी। इसमें अनुमानित 165 अरब रियाल का बजट घाटा और करीब 52 अरब रियाल के परिपक्व हो रहे कर्ज की मूल राशि का भुगतान शामिल है।

युद्ध और तेल के बीच अर्थव्यवस्था पर दबाव

मध्य पूर्व में जारी क्षेत्रीय संघर्ष ने व्यापार, सप्लाई चेन और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले आवागमन पर दबाव बढ़ाया है। इसका असर खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ा है। सऊदी अरब ने 2026 की दूसरी तिमाही में करीब 34.3 अरब रियाल यानी 9.1 अरब डॉलर का बजट घाटा दर्ज किया। हालांकि इस साल ब्रेंट क्रूड की ऊंची औसत कीमतों ने सऊदी सरकार को कुछ राहत भी दी है।

सबसे बड़ा खर्च—मोहम्मद बिन सलमान का Vision 2030

कर्ज की बढ़ती जरूरत के पीछे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की महत्वाकांक्षी Vision 2030 योजना भी महत्वपूर्ण कारण है। इसका उद्देश्य सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर अत्यधिक निर्भरता से निकालकर पर्यटन, मनोरंजन, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में विस्तार देना है।

इसी परिवर्तन के तहत सऊदी अरब बड़े विकास और निवेश कार्यक्रमों पर भारी रकम खर्च कर रहा है। साथ ही उसका करीब 900 अरब डॉलर का Public Investment Fund (PIF) भी अब बाहरी पूंजी पर अधिक जोर देने, परिपक्व परिसंपत्तियों को निजी क्षेत्र में स्थानांतरित करने तथा लिस्टिंग और विनिवेश जैसे विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।

क्या सऊदी अरब आर्थिक संकट में है?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अरबों डॉलर का नया कर्ज लेने का अर्थ यह नहीं है कि सऊदी अरब ‘कंगाल’ हो गया है। सऊदी वित्त मंत्रालय के अनुसार 2026 में सरकारी कर्ज लगभग GDP के 32.7 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं IMF ने भी सऊदी सरकारी कर्ज को फिलहाल टिकाऊ माना है और sovereign stress के समग्र जोखिम को कम बताया है।

लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है। एक तरफ सऊदी अरब अपनी तेल संपदा के बल पर दुनिया भर में निवेश करने वाली आर्थिक शक्ति बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ Vision 2030, बजट घाटे और विशाल निवेश योजनाओं के लिए उसे लगातार बाजार से पूंजी जुटानी पड़ रही है।

यानी सऊदी अरब की कहानी फिलहाल ‘पैसा खत्म होने’ की नहीं, बल्कि एक तेल आधारित अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए खरबों रुपये खर्च करने और उस परिवर्तन को कर्ज तथा बाहरी पूंजी से भी वित्तपोषित करने की है। आने वाले वर्षों में Vision 2030 की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि यह भारी निवेश कितनी तेजी से नई और स्थायी कमाई में बदलता है।

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Author: APOORV SEN

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