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जी,सुना क्या?? समय रैना फिर विवाद मैं कॉमेडी या संवेदनाओं से खिलवाड़

कॉमेडी या संवेदनाओं से खिलवाड़? समय रैना के शो में ‘बिहारी-कश्मीरी’ मजाक पर मचा बवाल, नेताओं ने जताई कड़ी नाराजग

नई दिल्ली, 29 अगस्त। कॉमेडियन समय रैना का चर्चित शो ‘India’s Got Latent Season 2’ एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार विवाद की वजह शो में बिहार और कश्मीरी पंडित समुदाय की पहचान को लेकर की गई रोस्टिंग है। समय रैना और कॉमेडियन शेरोन वर्मा के बीच हुई नोकझोंक के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक नेताओं से लेकर आम यूजर्स तक ने इस पर सवाल उठाए हैं।

आखिर शो में ऐसा क्या हुआ?

नए एपिसोड में शेरोन वर्मा और समय रैना एक-दूसरे की क्षेत्रीय पृष्ठभूमि को लेकर रोस्ट करते दिखाई दिए। समय ने शेरोन के बिहार से होने को लेकर भाषा और रोजगार के लिए मुंबई आने से जुड़ी टिप्पणियां कीं।

इसके जवाब में शेरोन ने समय रैना की कश्मीरी पहचान को निशाना बनाते हुए पत्थरबाजी से जुड़ा कटाक्ष किया। इसके बाद उनकी एक और टिप्पणी को कश्मीरी पंडितों के विस्थापन से जोड़कर देखा गया। यही हिस्सा सोशल मीडिया पर विवाद की सबसे बड़ी वजह बन गया।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

क्लिप सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि आखिर कॉमेडी की सीमा कहां समाप्त होती है और संवेदनहीनता कहां से शुरू होती है?

आलोचना करने वाले लोगों का कहना है कि किसी राज्य के लोगों को रूढ़ धारणाओं से जोड़ना या किसी समुदाय के विस्थापन और ऐतिहासिक पीड़ा का इस्तेमाल हास्य के लिए करना संवेदनशील मामला है। वहीं यह पूरा प्रसंग एक ‘रोस्ट’ का हिस्सा था, जिसमें दोनों कॉमेडियन एक-दूसरे की पृष्ठभूमि पर कटाक्ष कर रहे थे।

राम कदम ने जताई नाराजगी

महाराष्ट्र के बीजेपी विधायक राम कदम ने मामले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों को मजाक का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे विवादों के पीछे प्रचार हासिल करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया।

बिहार से भी आया कड़ा विरोध

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने देश के किसी भी नागरिक के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि ऐसी बातें समाज में विभाजन पैदा कर सकती हैं।

वहीं शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कॉमेडी में जाति, राज्य और धर्म जैसे संवेदनशील विषयों को घसीटने पर सवाल उठाए।

कश्मीरी पंडित समुदाय से भी उठी आपत्ति

रिपोर्ट्स के मुताबिक कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने भी इस तरह की कॉमेडी पर नाराजगी जाहिर की है। उनका तर्क है कि विस्थापन और उससे जुड़ी पीड़ा को केवल हास्य की सामग्री के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि प्रतिक्रियाएं एकरूप नहीं हैं और इस पूरे प्रकरण ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है।

कॉमेडी की आजादी बनाम सामाजिक जिम्मेदारी

यह विवाद एक बड़ा सवाल छोड़ता है—क्या कॉमेडी के नाम पर हर संवेदनशील विषय पर मजाक किया जा सकता है?

व्यंग्य और रोस्ट कॉमेडी में सीमाओं को चुनौती देना नई बात नहीं है। लेकिन जब हास्य किसी समुदाय की पहचान, विस्थापन, संघर्ष या सामाजिक रूढ़ियों को छूता है, तो उसकी प्रतिक्रिया मनोरंजन से आगे बढ़कर सामाजिक और राजनीतिक बहस का रूप ले सकती है।

। बनाएं समय रैना और शेरोन वर्मा के इस एपिसोड के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। अब चर्चा सिर्फ यह नहीं है कि मजाक कितना ‘डार्क’ था, बल्कि यह भी है कि हास्य कलाकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समाज के प्रति उसकी संवेदनशीलता के बीच सीमा आखिर कहां खींची जानी चाहिए ।

कही ऐसा तो नहीं इन जैसे लोग खुद को सिर्फ चर्चा में बनाएं रखने के लिए जानबूझ कर ये सब करते हैं?

 

— शुभदा शक्ति डेस्क

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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