Toggle Test

जब रक्षाबंधन के दिन छलक पड़े थे आंसू, बोलीं ‘पंचायत’ की रिंकी – “हम बहनें ही एक-दूसरे को राखी बांधते थे”

 

 

 

‘पंचायत’ की रिंकी यानी सान्विका अपने अभिनय के साथ-साथ अपनी सादगी और भावनात्मक गहराई के लिए भी जानी जाती हैं। रक्षाबंधन के मौके पर जब उनसे इस त्यौहार से जुड़ी यादें साझा करने को कहा गया, तो उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि कैसे बचपन में बहनों के बीच ही राखी का पर्व खास अंदाज़ में मनाया जाता था।

 

“हमारे घर में कोई भाई नहीं था, लेकिन रक्षाबंधन कभी अधूरा नहीं लगा”

 

सान्विका ने मुस्कुराते हुए लेकिन नम आंखों से बताया, “हमारे परिवार में सिर्फ बहनें थीं। भाई न होने के बावजूद रक्षाबंधन की खुशियां कभी कम नहीं हुईं। हम बहनें आपस में एक-दूसरे को राखी बांधती थीं और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत बन गया। बचपन की वो मिठास आज भी दिल को छू जाती है।”

 

उन्होंने आगे कहा, “रक्षाबंधन, जन्मदिन और दीवाली — यही तीन मौके होते थे जब हमें नए कपड़े मिलते थे। इसीलिए इन दिनों का बेसब्री से इंतजार रहता था। मम्मी-पापा के साथ बाजार जाना, मिठाइयां लेना और राखियां चुनना, इन सब पलों की अब बहुत याद आती है।”

 

“मेरी बहनें ही मेरी ढाल हैं”

 

अपनी बहनों के साथ रिश्ते पर बात करते हुए सान्विका बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “मेरी बहनें सिर्फ बहनें नहीं, मेरे लिए मां जैसी हैं। उनमें जो जज्बा है, जो हिम्मत है, वो किसी से कम नहीं। लोगों ने कई बार कहा कि हमारे घर में बेटा नहीं है, लेकिन मेरी बहनों ने हर बार यह साबित किया कि बेटियां भी किसी से कम नहीं होतीं।”

 

सान्विका ने यह भी कहा, “हमारे बीच कभी-कभी बहस हो जाती है, लेकिन जो समझ और अपनापन है, वो हमेशा बना रहता है। वो बिना बोले भी समझ जाती हैं कि मैं क्या सोच रही हूं, क्या महसूस कर रही हूं। यही रिश्ता रक्षाबंधन के धागे से भी कहीं ज्यादा मजबूत है।”

 

रक्षाबंधन: एक एहसास, एक अटूट रिश्ता

 

सान्विका के लिए रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि बचपन की यादों, बहनों के साथ साझा किए गए हंसी-आंसुओं और न टूटने वाले रिश्ते की डोर है। वो मानती हैं कि ये त्योहार उन्हें हमेशा यह याद दिलाता है कि परिवार का मतलब सिर्फ खून का रिश्ता नहीं, बल्कि दिल से जुड़े रिश्ते भी उतने ही अहम होते हैं।

sshakti
Author: sshakti

Leave a Comment

और पढ़ें