भाजपा सरकार ने दिव्यांग विश्वविद्यालयों का काम क्यों रोका ? गहलोत ने भाजपा सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने लिखा कि “एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विकलांग शब्द को दिव्यांग करवाते हैं और उन्हें सम्मान देने की बात करते हैं और दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी की सरकार राजस्थान में दिव्यांगों के हित में घोषित की गईं दो यूनिवर्सिटी का काम रोक कर बैठी है
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार पर दिव्यांगों की शिक्षा के प्रति उदासीनता बरतने के आरोप लगाए हैं।उन्होंने सरकार से पूछा है कि हमारी सरकार ने दो दिव्यांगों से जुड़े विश्वविद्यालय खेाले, लेकिन भाजपा सरकार ने इन विश्वविद्यालयों में में शिक्षा देने की अपेक्षा काम ही रोक दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भजनलाल सरकार द्वारा इन दिव्यांगों के प्रति की जा रही उपेक्षा के बारे में पोस्ट किया है।

सिर्फ दिव्यांग नाम देने से नहीं, उन्हें शिक्षा के अवसर देने के काम आगे बढ़ाए सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने लिखा कि “एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विकलांग शब्द को दिव्यांग करवाते हैं और उन्हें सम्मान देने की बात करते हैं और दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी की सरकार राजस्थान में दिव्यांगों के हित में घोषित की गईं दो यूनिवर्सिटी का काम रोक कर बैठी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संज्ञान लेकर इन दोनों विश्वविद्यालयों का काम जल्द से जल्द आगे बढ़ाना चाहिए।”
उच्च शिक्षा में दिव्यांगों की सहभागिता 5 प्रतिशत से भी कम
गहलोत ने आगे लिखा कि “भारत में उच्च शिक्षा में दिव्यांगों की सहभागिता 5 प्रतिशत से भी कम है। तमाम चुनौतियों के कारण दिव्यांग चाहकर भी उच्च शिक्षा में दाखिल नहीं हो पाते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने बजट 2022-23 में जयपुर में बाबा आम्टे दिव्यांग यूनिवर्सिटी एवं बजट 2023-24 में जोधपुर में महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय की घोषणा की थी। यह नए तरह के विश्वविद्यालय थे इसलिए इनके कोर्स डिजाइन करने एवं अन्य औपचारिकताओं में समय लगना लाजिमी था। इसके लिए जयपुर में यूजीसी में लम्बा अनुभव रखने वाले डॉ देवस्वरूप को एवं जोधपुर में दिव्यांग सेवा में पूरा जीवन लगाने वाली कुसुमलता भंडारी को वाइस चांसलर नियुक्त किया गया था। इसके बाद हमारी सरकार बदल गई।”
भाजपा सरकार ने इन दोनों प्रोजेक्ट्स को अघोषित तरीके से रोका
गहलोत ने आरोप लगाया कि “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार ने इन दोनों प्रोजेक्ट्स को अघोषित तरीके से रोक दिया है। कुसुमलता भंडारी लगातार सरकार से उन्हें स्टाफ एवं वित्तीय सहायता देने की मांग करती रहीं पर उन्हें सरकार ने कोई सहायता नहीं दी। दो महीने पूर्व उनका देहांत हो जाने के बाद अब तक किसी नए व्यक्ति को यह जिम्मेदारी नहीं दी गई है। जयपुर में भी दिव्यांग विश्वविद्यालय के काम को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।”







