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एक ऐसा स्कूल जो दिव्यांग बच्चों को दे रहा है नया हौसला …

मानसिक रूप से बीमार बच्चों के लिए जीवन कितना कठिन? रीवा के इस स्कूल में ऐसे मिलती है शिक्षा

मानसिक विकलांग विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को विशेष शिक्षा और प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है. मानसिक बीमारी में आमतौर पर सीखने संबंधी कठिनाइयां नहीं होती हैं.

मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को सीखने में कठिनाई होती है और विकास संबंधी परेशानियां आती हैं. इन कठिनाइयों के साथ विद्यालयों के शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इन स्पेशल बच्चों को स्वतंत्र होने और स्वाभिमान और सम्मान के साथ जीने में मदद करने के लिए विशेष शिक्षा और प्रशिक्षण की आवश्यकता है. मानसिक बीमारी में आमतौर पर सीखने संबंधी कठिनाइयां नहीं होती हैं; यदि रोग के बढ़ने के कारण ऐसी कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं, तो उन्हें उपचार द्वारा ठीक किया जा सकता है.

व्यवहार तकनीक का योगदान

मानसिक मंद व्यक्तियों के प्रशिक्षण में व्यवहार तकनीक ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है. रिसर्च से यह साफ होता है कि सभी मानसिक मंद बच्चे, चाहे उनकी उम्र, लिंग या परिस्थिति कुछ भी हो, उन्हें क्रमबद्ध प्रशिक्षण पद्धति द्वारा सिखाया जा सकता है. अच्छी तरह से प्रशिक्षित शिक्षक इन बच्चों को उनकी क्षमताओं के अनुसार शिक्षा प्रदान कर सकते हैं.

आती हैं कई चुनौतियां

एक मानसिक विकलांग विद्यालय के निरीक्षक डी.के. वर्मा ने कहा कि उनके विद्यालय में कुल 28 ऐसे बच्चे हैं जो मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं. बता दें कि मानसिक रूप से विकलांग बच्चे बचपन में अन्य बच्चों की तरह तेजी से विकसित नहीं होते हैं और सामान्य वयस्कों की तरह पूरी मानसिक क्षमता हासिल नहीं कर पाते हैं. विकलांगता की गंभीरता अलग-अलग हो सकती है; गंभीर मामलों में वयस्क जीवन में भी विकास एक छोटे बच्चे की मानसिक क्षमता से आगे नहीं बढ़ता. हल्की विकलांगता अधिक सामान्य होती है, जबकि गंभीर विकलांगता कम आम है.
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Author: sshakti

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