नई दिल्ली। देश में दिव्यांगजनों (Persons with Disabilities) के लिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुगम और समावेशी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। भारतीय रेलवे, विभिन्न मेट्रो रेल नेटवर्क और देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर ऐसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दिव्यांगजन सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वतंत्र रूप से यात्रा कर सकें।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016 के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ सभी सार्वजनिक परिवहन एजेंसियों पर बाधारहित (Barrier-Free) और सुलभ (Accessible) सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है। इसी दिशा में बीते कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं।
रेलवे स्टेशनों पर बढ़ रही हैं सुविधाएं
भारतीय रेलवे देशभर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर दिव्यांग यात्रियों के लिए लगातार सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। अब अनेक स्टेशनों पर व्हीलचेयर रैंप, लिफ्ट, एस्केलेटर, दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए टैक्टाइल पाथ (स्पर्श आधारित मार्ग), दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, आरक्षित पार्किंग और विशेष टिकट काउंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इसके अलावा जरूरतमंद यात्रियों के लिए व्हीलचेयर सहायता, बैटरी चालित वाहन (Battery Operated Cart) तथा कई ट्रेनों में दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित कोच भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मेट्रो सेवाएं बनीं समावेशी परिवहन की मिसाल
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोच्चि सहित देश के कई महानगरों की मेट्रो सेवाओं में दिव्यांगजनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
- ब्रेल युक्त लिफ्ट बटन
- व्हीलचेयर अनुकूल प्रवेश एवं निकास
- टैक्टाइल गाइडिंग पाथ
- ऑडियो एवं विजुअल अनाउंसमेंट सिस्टम
- सुलभ टिकट काउंटर
- दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित सीटें
शामिल हैं। इन सुविधाओं ने हजारों दिव्यांग यात्रियों के लिए स्वतंत्र यात्रा को पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान बनाया है।

हवाई अड्डों पर भी बढ़ा विशेष सहयोग
देश के कई प्रमुख एयरपोर्ट अब दिव्यांग यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इनमें व्हीलचेयर सहायता, विशेष हेल्प डेस्क, प्राथमिकता सुरक्षा जांच (Priority Security Check), दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, रैंप, लिफ्ट, आरक्षित पार्किंग तथा प्रशिक्षित सहायता कर्मियों की व्यवस्था शामिल है।
दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित और चलने-फिरने में असमर्थ यात्रियों के लिए अलग-अलग सहायता सेवाओं का भी विस्तार किया जा रहा है, जिससे हवाई यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके।
अभी भी कई चुनौतियां बाकी
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े शहरों में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन देश के अनेक छोटे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन व्यवस्था अभी भी पूरी तरह दिव्यांग-अनुकूल नहीं बन पाई है।
दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल सुविधाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित रखरखाव, कर्मचारियों का संवेदनशील प्रशिक्षण और समय-समय पर एक्सेसिबिलिटी ऑडिट भी उतना ही आवश्यक है।
विशेषज्ञ यह भी सुझाव देते हैं कि परिवहन सुविधाओं की योजना और निर्माण के दौरान स्वयं दिव्यांगजनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि वास्तविक जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित किए जा सकें।
समावेशी भारत की दिशा में मजबूत पहल
सुलभ परिवहन केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक भागीदारी तक समान पहुंच सुनिश्चित करने का आधार भी है। भारत जिस गति से अपने सार्वजनिक परिवहन ढांचे को आधुनिक बना रहा है, उसी गति से यदि दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं का विस्तार होता रहा, तो यह एक अधिक समावेशी और समान अवसरों वाले भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।






