ऑटो डेस्क। पेट्रोल या डीजल कार का बोनट खोलते ही सबसे पहले नजर आता है उसका इंजन। इंजन के आसपास ऑयल, बेल्ट, पाइप और कई दूसरे मैकेनिकल पार्ट्स दिखाई देते हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक कार यानी EV का बोनट खोलने पर तस्वीर काफी अलग हो सकती है।
इसकी वजह बेहद दिलचस्प है—पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार में पेट्रोल-डीजल कार जैसा Internal Combustion Engine (ICE) होता ही नहीं है। उसकी जगह इलेक्ट्रिक मोटर और हाई-वोल्टेज बैटरी कार को चलाने का काम करती हैं।
और इसी बदलाव का एक फायदा यह भी है कि कुछ EV कंपनियां बोनट के नीचे बची जगह को सामान रखने के लिए अतिरिक्त स्टोरेज में बदल देती हैं। इसे आमतौर पर Frunk कहा जाता है।

आखिर क्या होता है ‘Frunk’?
Frunk = Front + Trunk
यानी कार के पीछे मिलने वाले boot/trunk की तरह आगे बोनट के नीचे मौजूद luggage/storage compartment को Frunk या Front Trunk कहा जाता है।
इसमें मॉडल के अनुसार छोटा बैग, चार्जिंग केबल या दूसरी उपयोगी चीजें रखी जा सकती हैं। यानी कुछ EV में आपको पीछे के boot के अलावा आगे भी अतिरिक्त storage space मिल सकता है।
हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—हर इलेक्ट्रिक कार में Frunk नहीं मिलता। यह कार के डिजाइन, इलेक्ट्रिक मोटर की स्थिति, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे components की packaging पर निर्भर करता है।
फिर बिना इंजन के EV चलती कैसे है?
पेट्रोल-डीजल कार में ईंधन इंजन के अंदर combustion के जरिए ऊर्जा पैदा करता है और यही ताकत पहियों तक पहुंचती है। EV में यह प्रक्रिया पूरी तरह अलग होती है।
इलेक्ट्रिक कार में मुख्य तौर पर एक बड़ा Battery Pack बिजली को स्टोर करता है। यह बिजली inverter और power electronics के जरिए electric motor तक पहुंचती है। मोटर इस electrical energy को mechanical energy में बदलकर पहियों को घुमाती है।
सरल भाषा में समझें तो—
Battery → Power Electronics/Inverter → Electric Motor → Wheels
यही कारण है कि EV को चलाने के लिए पारंपरिक पेट्रोल या डीजल इंजन की जरूरत नहीं पड़ती।
बैटरी बोनट के अंदर ही होती है?
यह एक आम गलतफहमी हो सकती है। ज्यादातर आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों का बड़ा traction battery pack बोनट के अंदर नहीं, बल्कि कार के floor के नीचे लगाया जाता है।
इसे नीचे लगाने से केबिन में जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और भारी बैटरी नीचे होने से वाहन का centre of gravity भी कम रखने में मदद मिलती है।
वहीं electric motor आगे, पीछे या दोनों तरफ लगाई जा सकती है। इसी आधार पर EV front-wheel drive, rear-wheel drive या all-wheel drive हो सकती है।
EV में होते हैं काफी कम moving parts
इलेक्ट्रिक मोटर की बनावट Internal Combustion Engine की तुलना में काफी सरल होती है। पेट्रोल-डीजल इंजन में pistons, valves, crankshaft, spark plugs और कई दूसरे components मिलकर काम करते हैं।
EV में इनमें से बहुत से हिस्सों की जरूरत समाप्त हो जाती है।
इसी वजह से pure EV में आमतौर पर engine oil change, spark plug replacement और traditional engine servicing जैसी जरूरतें नहीं होतीं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि EV maintenance-free होती है—ब्रेक, टायर, suspension, coolant और दूसरे components की समय-समय पर जांच फिर भी जरूरी होती है।
सिर्फ स्टोरेज नहीं, EV डिजाइन की आजादी भी बढ़ी
इलेक्ट्रिक मोटर पेट्रोल-डीजल इंजन के मुकाबले काफी compact हो सकती है। इससे automobile designers को वाहन के अंदर और बाहर उपलब्ध जगह का अलग तरीके से इस्तेमाल करने की आजादी मिलती है।
यही वजह है कि कुछ electric vehicles में लंबे wheelbase, flat floor, ज्यादा cabin space और front storage जैसे फायदे देखने को मिलते हैं।
क्या भविष्य में कार का बोनट ‘दूसरा बूट’ बन जाएगा?
ऐसा हर EV में होना जरूरी नहीं है। कुछ कंपनियां bonnet के नीचे की जगह में motor, inverter, cooling system और दूसरे electrical components रखती हैं, जबकि कुछ निर्माता बेहतर packaging के जरिए वहां अलग storage compartment उपलब्ध करा देते हैं।
इसलिए EV खरीदते समय केवल यह मान लेना सही नहीं होगा कि इंजन नहीं है तो बोनट के नीचे पूरा खाली स्थान मिलेगा।
लेकिन Frunk निश्चित रूप से इलेक्ट्रिक कारों की उन खूबियों में शामिल है जो पारंपरिक कारों से उन्हें अलग बनाती हैं।
पेट्रोल कार बनाम EV: बड़ा अंतर

निष्कर्ष: अगली बार किसी इलेक्ट्रिक कार का बोनट खोलें और वहां इंजन की जगह सामान रखने का compartment दिखाई दे तो हैरान होने की जरूरत नहीं है। EV में पारंपरिक इंजन की जरूरत ही नहीं होती। बैटरी बिजली स्टोर करती है और electric motor उस ऊर्जा से पहियों को चलाती है। बेहतर packaging के कारण कुछ कंपनियां इंजन से खाली हुई जगह को ‘Frunk’ यानी Front Trunk में बदल देती हैं—और यही इलेक्ट्रिक कारों की बदलती इंजीनियरिंग की एक दिलचस्प झलक है।






