मोर्चरी में महिलाओं के शव के साथ दुष्कर्म? कांग्रेस विधायक के सनसनीखेज दावे से हड़कंप, अस्पताल ने आरोप नकारे

मध्य प्रदेश के रीवा से सामने आए एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप ने अस्पतालों की मोर्चरी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय की मोर्चरी को लेकर दावा किया है कि वहां सुंदर महिलाओं के शवों के साथ दुष्कर्म जैसी अमानवीय घटनाएं होती हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज किया है और फिलहाल इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विधायक के बयान से मचा हड़कंप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने अस्पताल और उसकी मोर्चरी की व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा इतना संवेदनशील है कि यदि इसमें जरा भी सच्चाई पाई जाती है तो यह न केवल आपराधिक मामला होगा, बल्कि मानवीय गरिमा और अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाएगा।

मिश्रा के आरोपों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अस्पतालों की मोर्चरी में शवों की सुरक्षा के लिए आखिर क्या व्यवस्था होती है और वहां आने-जाने वाले कर्मचारियों तथा अन्य व्यक्तियों की निगरानी किस प्रकार की जाती है।
अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार
इस पूरे मामले का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अस्पताल के CMO अलख प्रकाश ने विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार और असत्य बताया है।
अब तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में ऐसी किसी विशिष्ट घटना, पीड़ित परिवार की शिकायत, पुलिस FIR अथवा जांच के निष्कर्ष का प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे विधायक के इस गंभीर आरोप की पुष्टि की जा सके। इसलिए इन आरोपों को स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
आरोप गंभीर, इसलिए निष्पक्ष जांच भी जरूरी
भले ही आरोप की अभी पुष्टि नहीं हुई हो, लेकिन इसकी प्रकृति इतनी गंभीर है कि मामले में स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। यदि कोई जनप्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से ऐसा आरोप लगाता है तो उससे जुड़े तथ्य, साक्ष्य और आधार भी सामने आने चाहिए।
साथ ही संबंधित प्रशासन के लिए भी यह जरूरी हो जाता है कि वह मोर्चरी की सुरक्षा व्यवस्था, CCTV निगरानी, कर्मचारियों की आवाजाही और शवों को सौंपने तथा सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करे।
शव की गरिमा भी है महत्वपूर्ण सवाल
यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव के सम्मान और गरिमा की रक्षा एक अत्यंत संवेदनशील सामाजिक और कानूनी विषय है। अस्पताल और मोर्चरी जैसी जगहों पर सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था मृतक के परिजनों के भरोसे से भी जुड़ी होती है।
शुभदा शक्ति का मानना है कि ऐसे संवेदनशील आरोपों को सनसनी के बजाय तथ्यों और निष्पक्ष जांच की कसौटी पर परखा जाना चाहिए। आरोप सही हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और यदि आरोप गलत हैं तो वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए।
नोट: यह खबर मीडिया में सामने आए विधायक के आरोप और अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।






