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जी,सुना क्या?? बच्चों की फोटो पोस्ट करने से पहले 10 बार सोचें !

सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो डालने से पहले सावधान! AI-डीपफेक से पहचान चोरी तक खतरा, पेरेंट्स अपनाएं ये 10 सेफ्टी टिप्स

नई दिल्ली। बच्चे का जन्मदिन हो, स्कूल का पहला दिन, फैमिली ट्रिप या कोई उपलब्धि—माता-पिता अक्सर खुशी के इन पलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं। लेकिन यही तस्वीरें अगर गलत हाथों में पहुंच जाएं तो बच्चे की डिजिटल सुरक्षा और प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकती हैं। देश में बढ़ते साइबर अपराध, AI आधारित फोटो मैनिपुलेशन, फर्जी प्रोफाइल, साइबर बुलिंग और ऑनलाइन ग्रूमिंग जैसे खतरों को देखते हुए बच्चों से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो गई है।

असम पुलिस ने हाल में स्कूलों और शिक्षण संस्थानों को बच्चों की पहचान बताने वाली तस्वीरें, वीडियो और निजी जानकारी सोशल मीडिया पर डालने से बचने की सलाह दी है। इस पहल को गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के साइबर जागरूकता प्लेटफॉर्म CyberDost से भी व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया।

हालांकि मामला किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। भारत सरकार भी बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर ऑनलाइन दुर्व्यवहार, साइबर बुलिंग और हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट जैसे जोखिमों को स्वीकार करती है। अगस्त 2026 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण देने के लिए IT Act, IT Rules और Digital Personal Data Protection Act जैसे कानूनी एवं नियामक प्रावधान मौजूद हैं।

एक फोटो से कितनी जानकारी मिल सकती है?

सोशल मीडिया पर डाली गई तस्वीर में केवल बच्चे का चेहरा ही नहीं होता। स्कूल यूनिफॉर्म, आईडी कार्ड, घर या स्कूल का स्थान, वाहन नंबर, आसपास के बोर्ड और पोस्ट के साथ लिखी लोकेशन जैसी चीजें अनजाने में बच्चे की पहचान या दिनचर्या से जुड़ी जानकारी उजागर कर सकती हैं।

पुलिस की हालिया एडवाइजरी में बच्चों का पूरा नाम, कक्षा, पहचान पत्र, फोन नंबर, घर का पता और परिवहन संबंधी जानकारी प्रकाशित न करने की सलाह दी गई है। बच्चों की तस्वीरों के संभावित दुरुपयोग में AI आधारित इमेज मैनिपुलेशन, प्रतिरूपण, ग्रूमिंग, सेक्सटॉर्शन, साइबर बुलिंग और पहचान की चोरी जैसे खतरे बताए गए हैं।

पेरेंट्स के लिए 10 जरूरी साइबर सेफ्टी टिप्स

  1. बच्चे की पहचान स्पष्ट करने वाली फोटो सार्वजनिक रूप से पोस्ट करने से बचें।
  2. स्कूल का नाम, यूनिफॉर्म, आईडी कार्ड, पता और फोन नंबर जैसी जानकारी छिपाएं।
  3. फोटो या पोस्ट के साथ बच्चे की रियल-टाइम लोकेशन शेयर न करें।
  4. सोशल मीडिया अकाउंट की Privacy Settings मजबूत रखें।
  5. अनजान लोगों की Friend/Follow Request स्वीकार करने में सावधानी बरतें।
  6. बच्चों से ऑनलाइन ग्रूमिंग, बुलिंग और साइबर स्टॉकिंग के बारे में नियमित बातचीत करें।
  7. बच्चे की तस्वीर पोस्ट करने से पहले उसकी उम्र के अनुसार उसकी सहमति और भावनाओं का सम्मान करें।
  8. जन्मदिन, स्कूल टाइमिंग, रोजाना का रूट और अन्य निजी जानकारी सार्वजनिक न करें।
  9. बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फोन/कंप्यूटर को अपडेट रखें और जरूरी सुरक्षा व पेरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करें।
  10. फर्जी अकाउंट, फोटो के दुरुपयोग, धमकी या अन्य साइबर अपराध का पता चलते ही सबूत सुरक्षित रखें और शिकायत दर्ज कराएं।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल भी अभिभावकों को बच्चों से ग्रूमिंग, बुलिंग और स्टॉकिंग के खतरों पर बातचीत करने, उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान देने, मजबूत प्राइवेसी सेटिंग रखने तथा सोशल मीडिया पर लोकेशन सेवाएं बंद रखने की सलाह देता है।

दुरुपयोग हो जाए तो चुप न रहें

यदि बच्चे की फोटो से फर्जी प्रोफाइल बनाई गई हो, फोटो से छेड़छाड़ हुई हो, धमकी या ब्लैकमेल किया जा रहा हो अथवा कोई अन्य साइबर अपराध सामने आए तो मामले को नजरअंदाज न करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराधों सहित विभिन्न मामलों की ऑनलाइन शिकायत की सुविधा उपलब्ध है।

शुभदा शक्ति साइबर लिटरेसी संदेश: डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा की शुरुआत घर से होती है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले एक बार जरूर सोचें—जिस तस्वीर को आप खुशी में दुनिया के साथ साझा कर रहे हैं, उस पर आपका नियंत्रण हमेशा के लिए नहीं रह सकता।

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Author: APOORV SEN

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