नशा सिर्फ शरीर नहीं, भविष्य भी छीन सकता है: क्या नशीले पदार्थ बन सकते हैं दिव्यांगता की वजह?
Shubhda Shakti विशेष रिपोर्ट
शराब, ड्रग्स और दूसरे नशीले पदार्थों को अक्सर लत, अपराध या स्वास्थ्य समस्या के नजरिए से देखा जाता है। लेकिन इसका एक पहलू ऐसा भी है जिस पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है—क्या नशा किसी व्यक्ति में स्थायी शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या न्यूरोलॉजिकल क्षति और दिव्यांगता का कारण बन सकता है?
इसका उत्तर है—कुछ परिस्थितियों में हाँ। हालांकि यह स्पष्ट करना भी उतना ही जरूरी है कि प्रत्येक दिव्यांगता का संबंध नशे से नहीं होता और न ही नशा करने वाला प्रत्येक व्यक्ति दिव्यांगता का शिकार होता है। दिव्यांगता अनेक जन्मजात, आनुवंशिक, चिकित्सकीय, पर्यावरणीय और दुर्घटना संबंधी कारणों से हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया में करीब 1.3 अरब लोग यानी वैश्विक आबादी का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा महत्वपूर्ण दिव्यांगता का अनुभव करता है। दिव्यांगता किसी स्वास्थ्य स्थिति और व्यक्ति के पर्यावरण तथा व्यक्तिगत परिस्थितियों के बीच जटिल अंतःक्रिया का परिणाम है।
नशा किस तरह बढ़ा सकता है दिव्यांगता का खतरा?
नशीले पदार्थों का प्रभाव केवल कुछ घंटों के नशे तक सीमित नहीं रहता। विशेषकर लंबे समय तक या अत्यधिक सेवन शरीर के विभिन्न अंगों, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचा सकता है।
WHO के अनुसार शराब एक विषाक्त (toxic), psychoactive और dependence-producing substance है। इसके हानिकारक सेवन से दुनिया भर में लाखों लोगों की मृत्यु के साथ बीमारी और दिव्यांगता का बड़ा बोझ जुड़ा हुआ है।

1. मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर असर
लंबे समय तक अत्यधिक शराब और कुछ अन्य नशीले पदार्थों का सेवन मस्तिष्क तथा तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। गंभीर स्थितियों में याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता, समन्वय, संतुलन और दैनिक कार्य करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए नशे से उत्पन्न क्षति को केवल “लत” तक सीमित करके देखना सही नहीं है। कुछ मामलों में इसके स्वास्थ्य परिणाम लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
2. नशे में दुर्घटना और स्थायी दिव्यांगता
नशे और दिव्यांगता के बीच सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष संबंधों में से एक दुर्घटनाएँ हैं।
WHO की जुलाई 2026 की जानकारी के अनुसार दुनिया में हर साल लगभग 1.16 मिलियन लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु होती है, जबकि 20 से 50 मिलियन लोग गैर-घातक चोटों का सामना करते हैं और इनमें से कई लोगों को बाद में दिव्यांगता होती है। शराब या psychoactive drugs के प्रभाव में वाहन चलाने से गंभीर अथवा जानलेवा दुर्घटना का खतरा बढ़ता है।
दुर्घटना में गंभीर brain injury, spinal cord injury या अंगों को स्थायी नुकसान व्यक्ति के जीवन को हमेशा के लिए बदल सकता है।
WHO के अनुसार चोटें और हिंसा वैश्विक स्तर पर years lived with disability के लगभग 10% के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि इस पूरे 10% को नशे के कारण मानना गलत होगा, क्योंकि चोटों के अनेक अन्य कारण भी होते हैं।
3. गर्भावस्था में शराब—बच्चे पर जीवनभर का प्रभाव
यह नशे और संभावित developmental disability के बीच सबसे गंभीर संबंधों में से एक है।
गर्भावस्था के दौरान शराब के संपर्क में आने से बच्चे में Fetal Alcohol Spectrum Disorders (FASDs) हो सकते हैं। इनमें सीखने, व्यवहार, स्मृति, भाषा, बौद्धिक क्षमता और शारीरिक विकास से जुड़ी समस्याएँ शामिल हो सकती हैं। कुछ बच्चों में दृष्टि या श्रवण संबंधी समस्याएँ भी हो सकती हैं।
CDC के अनुसार गर्भावस्था के दौरान शराब की कोई ज्ञात सुरक्षित मात्रा और कोई ज्ञात सुरक्षित समय नहीं है। बीयर, वाइन और अन्य प्रकार की शराब भी जोखिम पैदा कर सकती हैं।
इसका अर्थ यह नहीं कि गर्भावस्था में शराब पीने पर हर बच्चे को FASD होगा; लेकिन यह पहले से तय करना संभव नहीं है कि कौन-सा बच्चा प्रभावित होगा। इसलिए रोकथाम सबसे सुरक्षित उपाय है।
4. मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक कार्यक्षमता
Substance-use disorder स्वयं एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। लंबे समय तक नशीले पदार्थों पर निर्भरता व्यक्ति के व्यवहार, निर्णय क्षमता, सामाजिक जीवन, रोजगार और दैनिक गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी और चिकित्सकीय अंतर समझना आवश्यक है—हर नशे की लत को अपने-आप “दिव्यांगता” घोषित नहीं किया जा सकता। किसी व्यक्ति की स्थिति को दिव्यांगता माना जाएगा या नहीं, यह संबंधित चिकित्सकीय स्थिति, कार्यक्षमता और लागू कानून/मानदंडों पर निर्भर करता है।

भारत में नशे की समस्या कितनी बड़ी?
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराई गई 2018 के राष्ट्रीय सर्वेक्षण की जानकारी के अनुसार देश में शराब सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला psychoactive substance पाया गया था।
सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 16 करोड़ लोग शराब, करीब 3.1 करोड़ लोग cannabis products और लगभग 2.26 करोड़ लोग opioids का इस्तेमाल करते थे। करीब 5.7 करोड़ लोगों को harmful या dependent alcohol use के कारण सहायता की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया था।
लेकिन यहां एक बहुत महत्वपूर्ण बात है—इन आंकड़ों को नशे के कारण दिव्यांग हुए लोगों की संख्या नहीं समझा जाना चाहिए। ये substance use और dependence से जुड़े आंकड़े हैं। भारत में “कुल दिव्यांगता में कितने प्रतिशत मामले सीधे नशे के कारण हुए” का कोई ऐसा विश्वसनीय राष्ट्रीय प्रतिशत इन आंकड़ों से निर्धारित नहीं किया जा सकता।
नशा → दुर्घटना → दिव्यांगता: रोकने योग्य कड़ी
भारत में भी सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना एक जोखिम कारक है। WHO India ने सड़क दुर्घटनाओं के कारणों में speeding के साथ driving under the influence of alcohol को भी योगदान देने वाले कारकों में शामिल किया है।
यानी कई मामलों में नशे का नुकसान केवल नशा करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। नशे में वाहन चलाने वाला व्यक्ति किसी पैदल यात्री, दूसरे वाहन चालक या यात्री को ऐसी चोट पहुँचा सकता है जिसके परिणाम जीवनभर रह सकते हैं।
क्या नशे से होने वाली दिव्यांगता को रोका जा सकता है?
कई जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए नशे की शुरुआत रोकना, substance dependence को केवल इच्छाशक्ति की कमी न मानकर स्वास्थ्य समस्या के रूप में उपचार उपलब्ध कराना, गर्भावस्था में शराब से पूरी तरह बचना, नशे में वाहन न चलाना और समय पर counselling, treatment तथा rehabilitation उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
भारत सरकार का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भी drug abuse को psycho-socio-medical problem के रूप में देखता है और जागरूकता, उपचार तथा पुनर्वास आधारित रणनीति पर जोर देता है।
Shubhda Shakti का संदेश
नशे के खिलाफ जागरूकता केवल नशामुक्ति की बात नहीं है। यह दुर्घटनाओं को रोकने, गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा करने, युवाओं को सुरक्षित रखने और ऐसी गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों के जोखिम को कम करने की भी कोशिश है जिनका प्रभाव जीवनभर रह सकता है।
नशे को रोकना केवल एक व्यक्ति को लत से बचाना नहीं—कई बार एक परिवार को जीवनभर की पीड़ा और एक संभावित रोकथाम योग्य दिव्यांगता से बचाना भी हो सकता है।
शुभदा शक्ति — दिव्यांगों को दुनिया और दुनिया को दिव्यांगों से जोड़ने की एक पहल।
- नोट: यह लेख जागरूकता और सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है। नशे की निर्भरता या उससे संबंधित स्वास्थ्य समस्या में योग्य चिकित्सक/नशामुक्ति विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।






