* “बांग्लादेश की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां ‘मुजीबवाद’ के गढ़ कहे जाने वाले गोपालगंज में खून-खराबा हो गया। चार लोगों की मौत और दर्जनों घायल होने की घटना केवल एक रैली में टकराव नहीं, बल्कि गहराते राजनीतिक असंतोष और सत्ता परिवर्तन की कोशिश का संकेत देती है।
एनसीपी (नेशनल सिटिजन पार्टी), जो हाल ही में चर्चा में आई है, ने जब गोपालगंज में रैली का ऐलान किया, तो इसे महज़ एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि सत्ता की परंपरागत संरचना को चुनौती देने के तौर पर देखा गया। एनसीपी नेता नाहिद इस्लाम का बयान — “गोपालगंज को मुजीबवाद से मुक्त करेंगे” — एक सीधी टक्कर की घोषणा थी।
हालांकि, रैली शुरू होने से पहले ही कथित रूप से अवामी लीग समर्थकों ने हमला कर माहौल को हिंसक बना दिया। स्थिति इतनी बिगड़ी कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। इससे पता चलता है कि बांग्लादेश में राजनीतिक असहिष्णुता कितनी गहराई तक जा चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरिम सरकार को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अवामी लीग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आग और फैल सकती है।
गोपालगंज अब सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति की नई लड़ाई का केंद्र बन चुका है – जहां एक ओर सत्ता की परंपरा है, तो दूसरी ओर नया राजनीतिक प्रयोग।