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*प्रशासन सोता रहा, जनता ने बनाई ‘जुगाड़ पुलिया’ — अंतिम यात्रा को मिली राह*

 

 

 

सुजानगढ़ के भोजलाई बास में हर साल की तरह इस बार भी भारी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई। स्कूल, गौशाला और श्मशान घाट – सभी इलाके पानी में डूब गए। मगर इस बार बात एक बुजुर्ग की अंतिम यात्रा की थी, और कोई रास्ता नहीं बचा था।

 

नगर परिषद हमेशा की तरह ‘बरसात के बाद देखेंगे’ के अपने रटे-रटाए जवाब में गुम थी। तब सामने आए पार्षद प्रतिनिधि कमल दाधीच, जिन्होंने न बजट देखा, न फाइलें — बस एक कार्यकर्ता की संवेदना से एक अस्थाई पुलिया तैयार करवा दी।

 

प्रशासनिक सिस्टम की सुस्ती के बीच ये ‘जुगाड़ पुलिया’ सिर्फ एक रास्ता नहीं थी, बल्कि एक बड़ा सवाल खड़ा करती है — अगर हर बार जनता को खुद ही रास्ता बनाना है, तो नगर परिषद किसलिए? हर साल जलभराव, हर बार वही बहाने और हर बार जनता की परेशानी?

 

कमल दाधीच का यह कदम निश्चित ही सराहनीय है, मगर यह भी सोचने की बात है कि क्या हर बार अंतिम यात्रा की गरिमा किसी जुगाड़ की मोहताज होगी?

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Author: sshakti

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