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बेसहारा जानवरों की मदद से लिए आगे आए डॉक्टर.

दिव्यांग पशुओं को नया जीवन दे रहा यहां डॉक्टर, कृत्रिम हाथ पैर लगाकर उन्हें बना रहे सशक्त.

राजस्थान की राधनी जयपुर में डॉ. तपेश माथुर जिन्होंने अब तक 300 से भी अधिक दिव्यांग या सड़क दुघर्टना से ग्रसित जानकारों के कृत्रिम हाथ पैर लगा चुके हैं. डॉ. तपेश कृष्णा लिंब नाम की एक संस्था चलते हैं.डॉक्टर तपेश ने कहा कि सड़कों पर कई ऐसे आवारा मवेशी और बेजुबान घूमते जानवर हैं, जो अक्सर किसी सड़क हादसे का बुरी तरह शिकार हो जाते हैं. उस घटना में ये बेजुबान पशु अपने हाथ या पैर खो देते हैं. ऐसे में एक डॉक्टर होने के नाते यह उनका दायित्व है कि वह उनके जीवन को संवारने में अपना जितना समय होता है वो देते हैं.

इंसान हो‌ या पशु अगर वे दिव्यांग होते हैं. तो उनका जीवन बहुत कठिनाइयों से भरा रहता है. ऐसी ही कठिनाइयों और दुःख भरे जीवन में खुशहाली का रंग भरते हैं जयपुर में एक डॉक्टर जो पशुओं को आर्टिफिशियल हाथ-पैर लगाकर उनके जीवन को एक नई उड़ान देते हैं. डॉ. तपेश माथुर जिन्होंने अब तक 300 से भी अधिक दिव्यांग या सड़क दुघर्टना से ग्रसित जानकारों के कृत्रिम हाथ पैर लगा चुके हैं. डॉ. तपेश कृष्णा लिंब नाम की एक संस्था चलते हैं. डॉक्टर तपेश एक सरकारी पशु चिकित्सक है पर अपनी ड्यूटी से सप्ताह में दो दिन का समय निकालकर वह दिव्यांग जानवरों की भलाई के लिए जरूर करते हैं. डॉक्टर तपेश और उनकी पत्नी शिप्रा दोनों अधिक से अधिक समय निकालकर इन बेजुबानों के लिए काम करते हैं.

कृष्णा लिंब संस्थान के माध्यम से डॉक्टर तपेश माथुर छुट्टी के समय पूरा वक्त अपनी इस संस्था को देते है. डॉक्टर तपेश ने कहा कि सड़कों पर कई ऐसे आवारा मवेशी और बेजुबान घूमते जानवर हैं, जो अक्सर किसी सड़क हादसे का बुरी तरह शिकार हो जाते हैं. उस घटना में ये बेजुबान पशु अपने हाथ या पैर खो देते हैं. ऐसे में एक डॉक्टर होने के नाते यह उनका दायित्व है कि वह उनके जीवन को संवारने में अपना जितना समय होता है वो देते हैं. डॉ. तपेश ने आगे कहा  कि अधिकतर मामले सामान्य रूप से गाय, कुत्तों से जुड़े ही आते हैं, जो सड़को पर दुघर्टना ग्रस्त हो जाते हैं. उस समय जानवरों की परिस्थिति के हिसाब से उसका इलाज किया जाता है तथा उनकी देखभाल की सलाह लोगों को देते हैं.
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Author: sshakti

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