Trending Story
Advertisement

स्पाइडरमैन’ से ‘सुपरमैन’ तक, उज्जैन में दिव्यांग बच्चों ने बनाई अनोखी राखियां, कीमत भी किफायती

 

उज्जैन के दिव्यांग बच्चों का हुनर देख रह जाएंगे दंग, हर उम्र के लिए बनाई खूबसूरत राखियां

धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित जवाहर नगर के मनोविकास विशेष शिक्षा विद्यालय में रक्षाबंधन का उत्साह इन दिनों चरम पर है। विद्यालय में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चे राखियों की तैयारियों में पूरी तन्मयता और उत्साह से जुटे हुए हैं। इन बच्चों को भले ही रंगों की पहचान और अक्षर लिखने में कठिनाई होती हो, लेकिन त्योहारों को लेकर उनका उत्साह किसी से कम नहीं है। रक्षाबंधन के इस पावन पर्व को खास बनाने के लिए वे सुंदर-सुंदर राखियां तैयार कर रहे हैं। कार्टून कैरेक्टर जैसे स्पाइडरमैन और सुपरमैन से लेकर ‘Bro’ और ‘Sis’ जैसी मॉडर्न राखियों तक, हर वर्ग को ध्यान में रखकर राखियां बनाई जा रही हैं।

दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाई गई राखियों की कीमत 10 रुपये से लेकर 80 रुपये तक हैं. बारीक कारीगरी वाली राखियों के दाम ज्यादा हैं. इसमें धागा, मोती और अन्य सजावट वाले सामान का उपयोग किया गया है. बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर, स्पाइडर मैन, सुपरमैन और इससे जुड़े अन्य कैरेक्टर वाली राखियां बनाई गई हैं.

विद्यालय से जुड़े फादर जॉर्ज ने बताया कि बच्चे राखियों को सजाने के लिए खुद सुनहरे मोती चुनते हैं और उन्हें चिपकाने से लेकर सूखाने तक हर काम में पूरी लगन दिखाते हैं। बच्चों की बारीक कारीगरी देखकर हर कोई उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाता। यही प्रशंसा उनके आत्मविश्वास को और बढ़ा देती है।

 

मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में जवाहर नगर स्थित मनोविकास विशेष शिक्षा विद्यालय में इन दिनों दिव्यांग बच्चे रक्षाबंधन को खास बनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं. मनोविकास केंद्र में ऐसे 200 छात्र हैं, जिन्हें मनोविकास विकलांग सहायता समिति कौशल शिक्षा भी दे रही है. दरअसल 2003 में सिस्टर आंसी के मार्गदर्शन में व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत हुई थी. विद्यालय से जुड़े फादर जॉर्ज ने लोकल 18 से कहा कि त्योहार के क्या मायने होते हैं, कोई इन बच्चों से सीखे. इन्हें रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों का बेसब्री से इंतजार रहता है. रंग-बिरंगी राखियों को सजाने के लिए बच्चे खुद सुनहरे मोती चुनते हैं. उन्हें अच्छे से चिपकाने के साथ सुखाने तक हर काम पर एक कुशल कारीगर की तरह नजर रखते हैं. निरीक्षण के दौरान उन्हें अपना काम उत्साह से बताते हैं. कोई कमी se होने पर उसे पूरी तन्मयता से सुधारते भी हैं.

सिस्टर आंसी ने कहा कि ये बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हैं लेकिन इनके हुनर की चर्चा पूरे उज्जैन में है क्योंकि ये बच्चे रक्षाबंधन पर रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए खूबसूरत राखियां बनाते हैं. इनकी बनाई राखियों की डिमांड बढ़ती जा रही है. बच्चे बाजार से बहुत कम दाम पर ऐसी राखी बनाते हैं, जिन्हें देखकर हर कोई मोहित हो जाता है. इस बार भी इन्होंने दो महीने की कड़ी मेहनत के बाद अभी तक हजारों राखियां बनाई हैं. बच्चों का लक्ष्य 10 से 12 हजार राखी बनाना है. राखी बनाने के बाद बच्चों को अलग-अलग स्कूलों में स्टॉल लगाकर खुद के बनाए प्रोडक्ट को बेचना भी सिखाया जाता है, जिससे होने वाली आमदनी इनके आत्मविश्वास को बढ़ाती है.

वर्ष 2003 में सिस्टर आंसी के मार्गदर्शन में इस व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र की नींव रखी गई थी। दीवाली पर भी ये बच्चे दीये और मोमबत्तियां बनाकर अपने हुनर से उजाला फैलाते हैं। त्योहारों के माध्यम से ये नन्हे कलाकार न केवल आत्मनिर्भर बनते हैं, बल्कि समाज को यह संदेश भी देते हैं कि सच्चा उत्सव वही है जिसमें भागीदारी और समर्पण हो।

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

Leave a Comment

Advertisement
Trending Story
Toggle Dark Mode

Menu