
जब एफआईएच प्रो लीग में भारत का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया, तब कई सवाल उठे। लेकिन पूर्व कप्तान और अनुभवी गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने इस असफलता को हार नहीं, बल्कि एक ज़रूरी सबक बताया।
“खिलाड़ियों ने वास्तव में मेहनत की, मौके बनाए, चुनौती दी… लेकिन कभी-कभी खेल में किस्मत भी अहम भूमिका निभाती है। हमें हार को सिर्फ नतीजा नहीं, एक सीख की तरह देखना चाहिए,” बुधवार रात एक कार्यक्रम में श्रीजेश ने यह बातें कहीं।
प्रो लीग के यूरोपीय चरण में भारत आठवें स्थान पर रहा, जो निश्चित रूप से संतोषजनक नहीं है। लेकिन श्रीजेश मानते हैं कि कोचों के पास अब पर्याप्त समय है कि वे इन अनुभवों का विश्लेषण करें और आगामी एशियाई खेलों व विश्व कप के लिए बेहतर रणनीति तैयार करें।
उन्होंने भावनात्मक रूप से कहा, “मैं अब जूनियर टीम के साथ हूं, लेकिन मेरी सुबह आज भी उसी सोच के साथ शुरू होती है — खिलाड़ियों को तैयार करना, उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाना। अब मैं खुद मैदान में नहीं उतरता, पर हर दिन उनके प्रदर्शन में खुद को देखता हूं।”
श्रीजेश की यह सोच बताती है कि भारतीय हॉकी में अब भी जुनून और उम्मीद ज़िंदा है। भले ही परिणाम निराशाजनक रहे हों, लेकिन तैयारी और सुधार की दिशा में कदम बढ़ चुके हैं।





