राजस्थान में फर्जी दिव्यांग शिक्षक भर्ती मामले में एक्शन, राजस्थान सरकार ने बनाई जांच कमेटी
राजस्थान में महाघोटाला, मूक-बधिर बनकर हासिल कर ली सरकारी नौकरी, पोल खुली तो जॉब छोड़कर भागे 44 कर्मचारी

फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 67 नामों की सूची सामने आई, जिनमें 31 अभी नौकरी कर रहे हैं और शेष ने गिरफ्तारी के डर से नौकरी छोड़ दी.
राजस्थान में सरकारी नौकरियों में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाकर भर्ती होने वाले रैकेट का खुलासा होने के बाद राज्य सरकार ने सख्ती दिखाई है. आजतक की रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल डायरेक्टर नरोत्तम शर्मा की अध्यक्षता में सात सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है.
कमेटी ने बुधवार से ही जांच शुरू कर दी है और रिकॉर्ड की पड़ताल के लिए सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल पहुंची. यहां ईएनटी विभाग के सहयोग से प्रमाणपत्रों की वैधता की जांच की जा रही है. अब तक 100 से ज्यादा ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिन्होंने मूक-बधिर या दृष्टिहीन होने के फर्ज़ी प्रमाणपत्र बनवाकर छोटी-बड़ी सरकारी नौकरियां हासिल की हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ लोग मुख्यमंत्री कार्यालय और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) जैसी अहम संस्थाओं में भी काम कर रहे हैं.
राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के माध्यम से बड़ी जालसाजी का पर्दाफाश हुआ है. ये सारा खेल दिव्यांग कोटे 2% आरक्षण के तहत नौकरी पाने के लिए हुआ है. बड़ी बात ये है कि ये जालसाज फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए RPSC जैसे संवैधानिक संस्थान में भी नौकरी हासिल करने में कामयाब हो गए हैं.
फिर से हुआ मेडिकल टेस्ट
एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, भवानी शंकर मीणा के नेतृत्व में गठित जांच दल ने 29 लोक सेवकों का एसएमएस मेडिकल कॉलेज में फिर से मेडिकल करवाया. रिपोर्ट में केवल 5 कर्मचारियों की वास्तविक दिव्यांगता 40% या उससे ज्यादा पाई गई. बाकी 24 दिव्यांग कर्मचारियों को मेडिकल बोर्ड ने दिव्यांग श्रेणी के लिए अयोग्य करार दिया. इनमें सुनने में समस्या वालों में 13 में से सभी 13, दृष्टिबाधित 8 में से 6 और लोकोमोटर के साथ अन्य प्रकार की दिव्यांगता वाले 8 में से 5 अयोग्य मिले हैं.
जैसलमेर, भरतपुर से आए केस सामने
इसके अलावा जैसलमेर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोहनगढ़ में अंग्रेज़ी पढ़ा रही दामिनी कंवर कान (EAR) के लिए जाली प्रमाणपत्र जमा कर चुकी थीं. भरतपुर के सरकारी कॉलेज बयाना में अंग्रेजी लेक्चरर सवाई सिंह गुर्जर के प्रमाणपत्र में मूक और बधिर दोनों लिखा हुआ था. दोनों मामलों में कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेज जमा कर नौकरी हासिल की थी.
दरअसल फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 67 नामों की सूची सामने आई, जिनमें 31 अभी नौकरी कर रहे हैं और शेष ने गिरफ्तारी के डर से नौकरी छोड़ दी. एसओजी फिलहाल बाकी बचे हुए लोगों की तलाश में भी जुटी है.