अब ब्रह्मा मंदिर तक लिफ्ट से पहुंच सकेंगे भक्त, बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेगी ये बड़ी राहत
पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर में अब लिफ्ट लगाई जाएगी. इसके लिए भामाशाह ने सहयोग किया है. लिफ्ट लगने से बुजुर्ग और दिव्यांग भी मंदिर के दर्शन कर पाएंगे.

राजस्थान (Rajasthan) की टेंपल सिटी पुष्कर (Temple City Pushkar) में विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर (Brahma Mandir) आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत की खबर है. जगतपिता के मंदिर में अब जल्द ही लिफ्ट लगाई जाएगी. इसके लिए जिला प्रशासन ने हरी झंडी दी है. ऐसा होने से यहां आने वाले बुजुर्गों और दिव्यांगों को भी भगवान का दर्शन आसानी से हो सकेगा.
अब तक मंदिर की ऊंचाई के कारण यहां चढ़ना मुश्किल था. मंदिर की सीढ़ियां नहीं चढ़ पाने के कारण देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) और प्रदेश के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह (Kalyan Singh) भी दर्शन नहीं कर पाए थे. उन्होंने सीढ़ियों पर बैठकर ही पूजा-अर्चना की थी. अभी लिफ्ट के अभाव में कई श्रद्धालु दर्शन किए बिना ही मायूस होकर लौट जाते हैं.
प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 50 लाख
ब्रह्मा मंदिर (Brahma Temple) में लिफ्ट लगाने के काम में करीब 50 लाख रुपए खर्च होंगे. इस राशि से ब्रह्मा मंदिर के पीछे की तरफ बने देवी मंदिर के पास 25-25 श्रद्धालुओं की क्षमता वाली दो लिफ्ट लगाई जाएगी. भामाशाहों के सहयोग से यह लिफ्ट लगवाई जाएगी. मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष व जिला कलेक्टर अंशदीप और सचिव व उपखंड अधिकारी सुखाराम पिंडेल ने विशेष बैठक कर मानसिंगका ग्रुप चेयरमैन के आवेदन पत्र पर लिफ्ट लगाने की स्वीकृति प्रदान की.
![]()
अगले सप्ताह जारी होगी कार्य अनुमति
उपखंड अधिकारी पिंडेल के मुताबिक, भामाशाह ने लिफ्ट लगाने का तकमीना, नक्शा प्रदान किया है. इस पर तकनीकी राय, विचार-विमर्श के बाद संभवत: अगले सप्ताह कार्य की अनुमति जारी कर दी जाएगी. भामाशाह ने बताया कि अनुमति मिलते ही कार्य शुरू कर देंगे. दोनों लिफ्ट लगाने में करीब छह माह का वक्त लगेगा.
पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर में अब लिफ्ट लगाई जाएगी. इसके लिए भामाशाह ने सहयोग किया है. लिफ्ट लगने से बुजुर्ग और दिव्यांग भी मंदिर के दर्शन कर पाएंगे.
भामाशाह बोले भाई को करवाना चाहता था दर्शन:
भामाशाह महावीर प्रसाद बताते हैं कि 3 वर्ष पहले वह अपने छोटे भाई के साथ किसी शादी में पुष्कर आए थे. यहां जगतपिता ब्रह्मा के मंदिर दर्शन के लिए दोनों भाई पंहुचे थे. मेरा भाई मुझसे 10 साल छोटा था. हम दोनों सीढ़ियां चढ़कर मंदिर के दरवाजे तक पहुंचे. जहां मेरे भाई ने मुझे कहा कि भाई साहब ऊपर चढ़ो, मैंने उसे कहा कि 10 साल छोटे हो, तुम पहले चढ़ो. तब छोटा भाई वहीं बैठ गया और कहा कि मेरे तो यहीं दर्शन हो गए और मैं जैसे तैसे दर्शन करने पहुंच गया.

दर्शन करने के बाद वहां उपस्थित लोगों से मैंने पूछा कि यहां की व्यवस्थाएं किसके जिम्मे है. तब मुझे पता चला कि यहां मंदिर की व्यवस्थाएं सरकार के अधीन हैं. वहां तहसीलदार मुझे मिल गए. मैंने वहीं पर उन्हें आवेदन पत्र लिख कर दिया और कहा कि मैं मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए लिफ्ट लगाना चाहता हूं. मुझे 15 दिन पहले ही लिफ्ट लगाने की परमिशन मिली है. उन्होंने भावुक होकर कहा कि जिसके लिए मैं लिफ्ट लगा रहा था वह इस दुनिया से चला गया.
भामाशाह महावीर प्रसाद ने कहा कि लिफ्ट की परमिशन मिली है, तो उस काम को पूरा भी करेंगे. लिफ्ट के लिए दिल्ली से आर्किटेक्ट को बुलाया गया है. उन्होंने लिफ्ट के लिए कुछ प्रारूप बनाए हैं. उनमें से एक कलेक्टर ने स्वीकृत किया है. उन्होंने कहा कि कार्य निर्माण की स्वीकृति मिलते ही फाउंडेशन का काम शुरू कर दिया जाएगा. इसके लिए जरूरी है कि बरसात से पहले फाउंडेशन का काम पूरा हो सके.
आपको बता दें कि अभी ब्रह्मा मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 30 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी होती हैं. इस वजह से दिव्यांग और बुजुर्ग मंदिर तक पहुंचकर दर्शन नहीं कर पाते. उन्हें बिना दर्शन किए ही मायूस होकर लौटना होता है.