दिव्यांगता के फर्जी सर्टिफिकेट से हासिल की सरकारी नौकरी:SOG ने मेडिकल बोर्ड से कराई 29 अधिकारियों-कर्मचारियों की जांच, सिर्फ 5 दिव्यांग पाए गए
एसओजी की जांच में केवल 5 कर्मचारियों के प्रमाण पत्र सही पाए गए. अन्य 24 दिव्यांग कर्मचारियों को मेडिकल बोर्ड ने दिव्यांग श्रेणी के लिए अयोग्य करार दिया.

राजस्थान में दिव्यांगता के फर्जी सर्टिफिकेट से 24 लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल कर ली। इसका खुलासा स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने किया है। इनमें सबसे ज्यादा 10 ग्रेड थर्ड टीचर हैं।
SOG ने शिकायतों के आधार पर दिव्यांगता के फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी पाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जांच की। प्रारंभिक जांच में 42 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई।
पहले चरण में जयपुर के SMS मेडिकल कॉलेज के विशेष मेडिकल बोर्ड से 29 कर्मचारियों-अधिकारियों की जांच करवाई गई। जांच में पाया गया कि 29 में से 24 सरकारी कर्मचारी-अधिकारी फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी कर रहे थे।
RPSC को दिया चकमा
यह पूरा खेल दिव्यांग कोटे में 2 फीसदी आरक्षण के तहत नौकरी पाने के लिए हुआ. हैरानी की बात तो यह है कि इस फर्जी प्रमाण पत्र के ज़रिए RPSC जैसे संवैधानिक संस्थान को चकमा देकर अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी हासिल कर ली. एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भवानी शंकर मीणा के नेतृत्व में गठित जांच दल ने मामले की जांच की. 29 लोक सेवकों का एसएमएस मेडिकल कॉलेज में पुनः मेडिकल करवाया. रिपोर्ट में केवल 5 कर्मचारियों की वास्तविक दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक पाई गई.
इनमें श्रव्य बाधित श्रेणी के सभी 13 कर्मचारियों के सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। दृष्टिबाधित श्रेणी के 8 में से 6 और लोकोमोटर दिव्यांग श्रेणी के 8 में से 5 कर्मचारियों के फर्जी सर्टिफिकेट निकले। सिर्फ 5 कर्मचारी ही वास्तव में दिव्यांग पाए गए।
एसओजी ने फर्जी सर्टिफिकेट वाले सभी 24 कर्मचारियों
अधिकारियों की सूचना उनके संबंधित विभागों को भेज दी है। इनके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी। वहीं, शेष संदिग्ध मामलों की भी जांच की जा रही है।
मेडिकल बोर्ड से जांच करवाई SOG के एसपी ज्ञानचंद यादव ने बताया- SOG को हेल्पलाइन पर सूचना मिली रही थी कि कुछ लोग फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट देकर सरकारी नौकरी पर लगे हुए हैं। शिकायत का वेरिफिकेशन करने के लिए एसओजी ने पहले अपनी टीम को मौके पर भेज कर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी पर नजर रखी।
इसके बाद SMS मेडिकल कॉलेज से संपर्क कर एक बोर्ड बनाया गया। SOG की टीम ने संदिग्ध 29 सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों को एसओजी मुख्यालय बुलाकर उनकी जांच कराई। जांच में केवल 5 कर्मचारी सही पाए गए। बाकी के 24 ने फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट देकर नौकरी ली।
67 लोग रडार पर, कई नौकरी छोड़ भागे
इसके अलावा जैसलमेर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोहनगढ़ में अंग्रेज़ी पढ़ा रही दामिनी कंव भी फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर चुकी थीं. भरतपुर के सरकारी कॉलेज बयाना में अंग्रेज़ी लेक्चरर सवाई सिंह गुर्जर के प्रमाणपत्र में मूक और बधिर दोनों लिखा हुआ था. दोनों मामलों में जालसाजी पकड़ में आ गई है. दरअसल, फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 67 नामों की सूची सामने आई, जिनमें 31 अभी नौकरी कर रहे हैं. इनमें शामिल अन्य लोगों ने गिरफ़्तारी के डर से नौकरी छोड़ दी. एसओजी फिलहाल शेष लोगों की तलाश में भी जुटी है.
एसपी ज्ञानचंद यादव ने बताया- एसओजी आने वाले दिनों में फर्जी सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी प्राप्त करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई करेगी। एसओजी ने इन 24 कर्मचारियों-अधिकारियों की जानकारी उनके विभाग के साथ साझा कर दी है।
सिर्फ 5 कर्मचारियों की दिव्यांगता 40% से ज्यादा मिली एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भवानी शंकर मीणा के नेतृत्व में इस मामले की जांच की चल रही है। मीणा ने मुख्यालय में मिल रही शिकायतों का वेरिफिकेशन के लिए SMS मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विशेषज्ञों का बोर्ड गठित करवाकर दिव्यांग श्रेणी के लोक सेवकों (सरकारी कर्मचारियों) का दोबारा से मेडिकल करवाया था। 5 सरकारी कर्मचारियों की दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक होना पाया गया है।