
इस्लामाबाद — पाकिस्तान में हाल के दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बीच हुई उच्चस्तरीय मुलाकातों ने सत्ता परिवर्तन और प्रणाली में बदलाव की अटकलों को जन्म दे दिया है।
मंगलवार को पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति जरदारी से मुलाकात की, इसके बाद सेना प्रमुख से भी बातचीत की। इन मुलाकातों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि देश में संसदीय व्यवस्था की जगह राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है और इसके लिए 27वें संविधान संशोधन की संभावना भी जताई जा रही है।
राष्ट्रपति बदलने की अटकलें, सेना की भूमिका पर सवाल
कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया जा रहा है कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर को अगला राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। हालांकि इस पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इन संभावनाओं ने सेना की भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
सरकार की सफाई: कोई असामान्य स्थिति नहीं
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और सेना प्रमुख के बीच ऐसी बैठकें सामान्य हैं और इनका गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की राजनीति में कोई रुचि नहीं है और वह अपने सैन्य कर्तव्यों पर केंद्रित हैं।
संविधान संशोधन की संभावना से इनकार नहीं
27वें संविधान संशोधन की अटकलों पर पूछे गए सवाल के जवाब में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि “संविधान संशोधन एक वैधानिक प्रक्रिया है और अतीत में भी इस तरह के संशोधन होते रहे हैं। हालांकि इसका यह मतलब नहीं कि व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो रहा है।”