नर्मदापुरम में दिव्यांग बच्चों ने गणेश जी की मनमोहक ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं तैयार की. इनकी बाजार में डिमांड
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नर्मदापुरम :कहते भी हैं कि कुदरत अगर किसी को इस धरती पर भेजती है और उसमें कोई शारीरिक कमी है तो उसे कुछ अतरिक्त कला और शक्ति जरूर देती है. नर्मदापुरम में संचालित भविष्य दिव्यांग विद्यालय के बच्चे इस बात की गवाही दे रहे हैं. ये बच्चे यहां बीते 16 वर्षों से ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं बना रहे हैं. इन्हें बाजार में उतारा जाता है, जिसे लोग काफी पसंद करते हैं. ये बच्चे ढंग से बोल नहीं सकते, किसी के हाथ तो किसी का पैर ढंग से काम नहीं करते लेकिन प्रतिमाएं बेहद सुंदर बनाते हैं. इन सजीव और बोलती प्रतिमाओं को बनाकर ये नि:सशक्त बच्चे अपने हुनर का प्रदर्शन करते हैं.

मिट्टी और रुई की मदद से प्रतिमाएं तैयार
ये दिव्यांग बच्चे मिट्टी, गोंद, रुई को मिलाकर प्रतिमाएं बनाते हैं. विद्यालय प्रबंधन के मुताबिक मिट्टी की प्रतिमाओं को बनाने में इन विशेष बच्चों में यह थैरेपी का काम करती है और शरीर के लिए यह थैरेपी महत्वपूर्ण है. इस बार भी बच्चों ने हर बार की तरह नई थीमों पर गणेश जी की प्रतिमाओं को तैयार किया है. विद्यार्थी मुनमुनबताती हैं “गणेश जी बना रहे हैं. गणेश जी की प्रतिमा बनाने के लिए मिट्टी लेते हैं, इसमें पानी मिलाते हैं फिर रुई मिलाते हैं. मैडम और सर ने हम सबको सिखा दिया है. मैंने भी बहुत सारे गणेश जी बनाए हैंं.”