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जी,सुना क्या ?? “सेंसर बोर्ड में बड़े सितारों की एंट्री: प्रीति जिंटा-पंकज त्रिपाठी समेत 18 सदस्य”

सेंसर बोर्ड में 9 साल बाद बड़ा बदलाव: प्रीति जिंटा-पंकज त्रिपाठी,सुनील शेट्टी समेत 18 नए चेहरे, जानिए क्या है CBFC और क्यों है जरूरी

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की फिल्मों को प्रमाणित करने वाली संस्था केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) में केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। करीब नौ साल बाद बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए फिल्म, टेलीविजन, संगीत और कला जगत की कई चर्चित हस्तियों को इसमें जगह दी गई है। नए बोर्ड में प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, प्रियदर्शन और रूपाली गांगुली जैसे जाने-पहचाने नाम शामिल हैं। नया बोर्ड तत्काल प्रभाव से तीन वर्ष की अवधि के लिए गठित किया गया है।

फिल्म और कला जगत के 18 चेहरे बोर्ड में

नए CBFC बोर्ड में अलग-अलग भाषाओं और रचनात्मक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुल 18 सदस्य शामिल किए गए हैं। इनमें प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, प्रियदर्शन और रूपाली गांगुली के अलावा पल्लवी जोशी, प्रोसेनजीत चटर्जी, मनोज जोशी, ऑस्कर विजेता संगीतकार रिकी केज, हंसराज हंस, नीला माधब पांडा, विनोद अनुपम, अभिषेक जैन, सुप्रिया यारलागड्डा, यतींद्र मिश्र, निशिगंधा वाड, वामन केंद्रे और रमेश पतंगे शामिल हैं।

इस समय CBFC की कमान चेयरपर्सन शशि शेखर वेम्पति के पास है।

आखिर क्या है CBFC?

CBFC का पूरा नाम Central Board of Film Certification यानी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड है। आम बोलचाल में इसे अक्सर ‘सेंसर बोर्ड’ कहा जाता है। यह भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करने वाली एक वैधानिक संस्था है और इसका मुख्यालय मुंबई में है। इसका काम सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 और मौजूदा प्रमाणन नियमों के तहत भारत में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को प्रमाणित करना है।

सीधे शब्दों में कहें तो कोई फिल्म सिनेमाघरों में किस दर्शक वर्ग के लिए दिखाई जा सकती है, इसका प्रमाणन CBFC करता है। भारत में सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले फिल्म का CBFC से प्रमाणित होना आवश्यक है।

क्यों जरूरी है फिल्म सर्टिफिकेशन?

फिल्में मनोरंजन का माध्यम होने के साथ समाज पर व्यापक प्रभाव डालने वाला माध्यम भी हैं। प्रमाणन व्यवस्था का उद्देश्य फिल्म की विषयवस्तु और उसके संभावित दर्शकों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त श्रेणी तय करना है। कानून में भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता या नैतिकता, मानहानि, अदालत की अवमानना और अपराध के लिए उकसावे जैसे विषयों से संबंधित मानदंड भी निर्धारित हैं।

यानी CBFC का काम केवल फिल्मों में ‘कट लगाना’ भर नहीं है। इसकी मूल भूमिका फिल्मों को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए जांचना और कानून के मुताबिक प्रमाणित करना है।

2024 में भी बदले थे प्रमाणन के नियम

सरकार ने सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 लागू कर पुराने 1983 के नियमों की जगह नई व्यवस्था लागू की थी। फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए CBFC का e-Cinepramaan सिस्टम भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसका उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।

चर्चित कलाकारों की मौजूदगी से बढ़ी दिलचस्पी

पंकज त्रिपाठी, प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी और प्रियदर्शन जैसे लंबे समय से भारतीय सिनेमा से जुड़े चेहरों का बोर्ड में शामिल होना इस पुनर्गठन को खास बनाता है। इनके साथ क्षेत्रीय सिनेमा, संगीत, टेलीविजन, रंगमंच और साहित्य से जुड़े लोगों को भी प्रतिनिधित्व मिला है।

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Author: APOORV SEN

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