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जयपुर रेलवे स्टेशन पर थप्पड़ और डंडों की आवाज़ ने इंसानियत को शर्मिंदा कर दिया।

जयपुर रेलवे स्टेशन का वायरल वीडियो: दिव्यांग पर बरसे थप्पड़ और डंडे

 

जयपुर रेलवे स्टेशन से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां रविवार रात एक दिव्यांग व्यक्ति को कभी यात्री ने थप्पड़ मारे तो कभी होमगार्ड जवान ने उसकी व्हीलचेयर पर डंडे बरसाए।

जयपुर रेलवे स्टेशन से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां रविवार रात एक दिव्यांग व्यक्ति को कभी यात्री ने थप्पड़ मारे तो कभी होमगार्ड जवान ने उसकी व्हीलचेयर पर डंडे बरसाए। सोशल मीडिया पर जैसे ही इस घटना का वीडियो वायरल हुआ, इंसानियत पर उठ रहे सवाल और समाज की संवेदनशीलता पर चर्चा तेज हो गई।

स्टेशन के मेन गेट एंट्री पर एक दिव्यांग अपनी व्हीलचेयर पर बैठकर अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। तभी नशे में धुत होने की वजह से उसने आसपास मौजूद यात्रियों से गाली-गलौज शुरू कर दी। उसकी बदजुबानी से परेशान होकर एक बुजुर्ग यात्री ने अपना आपा खो दिया और गुस्से में उसे थप्पड़ जड़ दिए। यह दृश्य वहां मौजूद हर किसी को चुभने वाला था—क्योंकि यह थप्पड़ सिर्फ एक चेहरे पर नहीं पड़ा, बल्कि समाज की संवेदनशीलता को भी चोट दे गया।

इसके बाद मामला यहीं नहीं थमा। जब दिव्यांग वहां से हटने को तैयार नहीं हुआ, तो ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड जवान आगे आया। उसने दिव्यांग को चेतावनी दी, लेकिन जब बात नहीं बनी तो व्हीलचेयर पर डंडे से दो-तीन वार कर दिए। एक शारीरिक रूप से असहाय इंसान पर डंडों की यह चोट इंसानियत को लहूलुहान कर गई। मदद और सहारे की उम्मीद में आया वह दिव्यांग डर और अपमान के साए में अपनी व्हीलचेयर घसीटता हुआ स्टेशन से बाहर निकल गया।

घटना का यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग गुस्से और दुख से भर गए। हर कोई यह सवाल करने लगा कि क्या किसी दिव्यांग के साथ पेश आने का यही तरीका होना चाहिए? भले ही वह नशे में था और यात्रियों से उलझ रहा था, लेकिन क्या उसका इलाज थप्पड़ और डंडे हो सकते हैं?

वीडियो सामने आने के बाद आरपीएफ हरकत में आई। इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि जांच की गई और यह पुष्टि हुई कि वीडियो जयपुर रेलवे स्टेशन के मेन गेट का ही है। दिव्यांग व्यक्ति नशे की हालत में यात्रियों से गाली-गलौज कर रहा था। इस वजह से पहले एक यात्री ने और फिर होमगार्ड जवान ने उससे सख्ती की। लेकिन जांच के नतीजे ने सवालों को शांत नहीं किया, बल्कि और गहरा दिया कि नशे और बदतमीजी से निपटने का यही तरीका क्यों चुना गया।

किसी दिव्यांग को थप्पड़ और डंडों से काबू करना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि समाज की सोच पर एक आईना है। दिव्यांग पहले ही जिंदगी की कठिनाई से जूझता है। उसकी सबसे बड़ी ताकत इंसानियत का सहारा होती है। लेकिन जब वही सहारा हिंसा में बदल जाए, तो लाचारी और गहरी हो जाती है।

वीडियो पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। लोग कह रहे हैं कि चाहे गलती कितनी भी बड़ी क्यों न हो, किसी दिव्यांग पर हाथ उठाना अमानवीय है। वहीं कुछ लोग यह तर्क भी दे रहे हैं कि नशे में गाली-गलौज करने वालों से सख्ती करनी ही चाहिए। लेकिन इन बहसों के बीच सच यही है कि उस पल एक असहाय इंसान की गरिमा को सबके सामने कुचल दिया गया।

यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं हम अपनी संवेदनशीलता खो तो नहीं बैठे। सहानुभूति और करुणा के लिए जाने जाने वाला समाज अब गुस्से और हिंसा में इतना डूब गया है कि एक व्हीलचेयर पर बैठे दिव्यांग को भी बख्श नहीं पाया।

उस रात जयपुर रेलवे स्टेशन पर थप्पड़ और डंडों की आवाज़ ने इंसानियत को शर्मिंदा कर दिया।

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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