क्यों पैदा होते हैं मानसिक रूप से कमजोर बच्चे, प्रेग्नेंसी से क्या है इसका कनेक्शन?
डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान अपनी मेंटल हेल्थ का भी ध्यान रखना चाहिए. खराब मेंटल हेल्थ की वजह से बच्चे कई तरह की बीमारियों का शिकार हो सकते हैं.

अकसर आपने देखा होगा कि जन्म के बाद कुछ बच्चों का मानसिक विकास सही तरीके से नहीं हो पाता. बढ़ती उम्र के साथ उनमें कई तरह की मानसिक समस्याएं देखी जाती हैं. अधिकतर मामलों में माता-पिता को यह पता ही नहीं होता कि उनके बच्चे का मानसिक विकास क्यों नहीं हो रहा है. आइए हम आपको इस बारे में डिटेल में बताते हैं.
प्रेग्नेंसी के 3 महीने पहले से प्रेग्नेंसी की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. तीन महीने पहले सभी जरूरी टेस्ट मसलन थायरॉयड, सिस्ट आदि का टेस्ट जरूरी है. इसके अलावा हर महिला को प्रेग्नेंसी के 3 महीने पहले से ही फॉलिक एसिड का सेवन शुरू कर देना चाहिए. ताकि बच्चे और मां में खून की कमी न हो और इसकी वजह से कोई कॉम्पिलिकेशन्स न आएं.

इन पांच वजहों से विकलांग पैदा होते हैं बच्चे, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
पब्लिक एरिया में कई तरह के इंफेक्शन का डर होता है, जिसकी वजह से बच्चे के सुनने और बोलने की क्षमता प्रभावित होती है. बच्चा गूंगा और बहरा पैदा हो सकता है.
प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा शोरगुल वाले माहौल में नहीं रहना चाहिए. इससे बच्चा बहरा पैदा हो सकता है. हाल ही में आई एक अध्ययन की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है ध्वनि प्रदूषण बच्चों को गर्भ में ही बहरा बना देता है. ऐसे बच्चों के बोलने की क्षमता भी प्रभावित हो जाती है, क्योंकि बच्चा जब तक कुछ सुनेगा नहीं, तो बोलना सिखेगा कैसे.

बाहर का खाना बिल्कुल ना खाएं. प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों के कारण कुछ चटपटा और अलग-अलग जायका टेस्ट करने का दिल करता है. ऐसे में बच्चे की सेहत के लिए जरूरी है कि आप अपनी जुबान पर थोड़ा कंट्रोल रखें.
कोल्ड ड्रिंक्स और बाहर का जूस तो भूल ही जाएं. प्रेग्नेंसी में जूस पीना फायदेमंद होता है, लेकिन बाहर का जून पीने में कई खतरा भी है. बाहर का जूस बैक्टीरिया इंफेक्टेड हो सकता है. वहीं कोल्ड ड्रिंक्स में उच्च मात्रा में प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल होता है.

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बच्चे की खराब मेंटल हेल्थ का संबंध मां से है. अगर प्रेगनेंसी के दौरान कोई महिला मानसिक तनाव में रहती है तो होने वाले बच्चे को मानसिक बीमारी होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है. इन बीमारियों में सबसे ज्यादा मामले एडीएचडी डिसऑर्डर और पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के आते हैं.
मेडिकल जर्नल ब्रिटिश जर्नल ऑफ़ साइकाइट्री में हुई रिसर्च बताती है कि प्रेग्नेंसी के दौरान जिन महिलाओं ने मेंटल स्ट्रेस लिया था उनके बच्चे जन्म के कुछ सालों बाद मानसिक बीमारियों से पीड़ित हो जाते हैं. बढ़ती उम्र के साथ समस्या में इजाफा होता रहता है. ऐसे बच्चे दूसरे बच्चों की तुलना में मानसिक रूप से कमजोर होते हैं. 20 से 30 फीसदी मामलों में बच्चों को हुई इन बीमारियों का कारण गर्भावस्था के दौरान मां की खराब मानसिक सेहत होती है.

होती है एडीएचडी बीमारी
गाजियाबाद के जिला अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ ए. के विश्वकर्मा बताते हैं कि एडीएचडी एक मानसिक बीमारी है. इससे पीड़ित बच्चा किसी काम में सही तरीके से ध्यान नहीं लगा पाता है. उसका आईक्यू भी कम रहता है और व्यवहार सामान्य बच्चों की तरह नहीं होता है. एडीएचडी की वजह से बच्चे किसी भी चीज को आसानी से याद नहीं रख पाते हैं. इस बीमारी के लक्षण बच्चों में 6 साल की उम्र के बाद ही दिखाई देने लगते हैं. माता-पिता समझ ही नहीं पाते कि बच्चा को ये समस्या क्यों हो रही है. लेकिन कई मामलों में महिला की खराब मेंटल हेल्थ बच्चे कि इन बीमारी का कारण होती है.
खराब मेंटल हेल्थ के अलावा गर्भावस्था में महिला को जरूरी पोषण न मिलना. माता-पिता को कोई जेनेटिक बीमारी. महिला को लगी कोई चोट भी बच्चे के मानसिक रूप से कमजोर होने का कारण बन सकती है.

परिवार की खराब आर्थिक स्थिति से भी होती है ये समस्या
दिल्ली में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल वर्मा बताती हैं कि परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के कारण भी होने वाले बच्चे की मेंटल हेल्थ खराब हो सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में गर्भवती महिला को सही तरीके से पोषण नहीं मिल पाता है. वह अच्छी डाइट नहीं ले पाती हैं. इस कारण बच्चा का मानसिक विकास नहीं हो पाता है. कई मामलों में ये प्रीमच्योर बर्थ ( 9 महीने से पहले जन्म) का भी कारण बन सकता है.
इसके अलावा माता-पिता में किसी नशे की आदत, लंबे समय तक महिला को वायरल संक्रमण रहना और हर्पीस बीमारी भी होने वाले बच्चे की मानसिक सेहत पर असर कर सकती है.

- प्रेगनेंसी में मेंटल स्ट्रेस को कैसे कम करें
- इसके लिए सबसे जरूरी है कि घर में अच्छा माहौल रहे.
- महिला को अगर किसी भी तरह की परेशानी है तो वो इसके अपने परिजनों से साझा करे.
- अगर सेहत से संबंधित कोई भी परेशानी हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.
- नींद पूरी लें और अपने खानपान का ध्यान रखें.