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ब्रह्मा जी की पूजा सिर्फ पुष्कर में क्यों होती है ?

पुरे भारत में सिर्फ़ पुष्कर में क्यों है ब्रह्मा जी का मंदिर ?

जानिए इसके पीछे का राज

राजस्थान के पुष्कर में बना भगवान ब्रह्मा का मंदिर अपनी एक अनोखी विशेषता की वजह से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र है, यह ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है। हिन्दू धर्म में भगवान ब्रह्मा को संसार का रचनाकार माना जाता है।
ब्रह्मा जी को सृष्टि के रचयिता के रूप में जाना जाता है. पूरे भारत में ब्रह्मा जी का सिर्फ एक ही मंदिर स्थित है, जो राजस्थान के पुष्कर में है. तो चलिए जानते हैं कि आखिर क्यों ब्रह्मा जी का एक मात्र मंदिर है और क्या है इसके पीछे की कहानी.

एक ऐसा तीर्थ स्थल जिसके बिना अधूरी कोई भी तीर्थ यात्रा
राजस्थान का पुष्कर जगतपिता बृह्माजी के लिए प्रसिद्ध है. दुनिया में हिन्दू मान्यता के अनुसार पांचवा तीर्थ भी पुष्कर को माना जाता है. हरिद्वार की तरह ही पुष्‍कर भी हिन्‍दुओं का बड़ा तीर्थस्‍थल है. तीर्थों में सबसे बड़ा तीर्थ स्थल होने के कारण ही इसे तीर्थराज पुष्‍कर कहा जाता है. इसी तीर्थ स्थल पर पुष्कर सरोवर है, जिसके चारों ओर कुल 52 घाट बने हुए हैं. ये 52 घाट अलग अलग राजपरिवारों, पंडितों और समाजों द्वारा बनवाये गए हैं, जिसमें सबसे बड़ा घाट गऊघाट कहलाता है.

पत्नी सरस्वती ने ब्रह्मा जी को क्यों दिया था श्राप?
हिन्दू धर्मग्रन्थ पद्म पुराण के मुताबिक धरती पर वज्रनाश नामक राक्षस ने उत्पात मचा रखा था। ब्रह्मा जी ने जब उसका वध किया तो उनके हाथों से तीन जगहों पर पुष्प गिरा, इन तीनों जगहों पर तीन झीलें बनी। इसी घटना के बाद इस स्थान का नाम पुष्कर पड़ा। इस घटना के बाद ब्रह्मा ने यज्ञ करने का फैसला किया।

पूर्णाहुति के लिए उनके साथ उनकी पत्नी सरस्वती का होना जरूरी था, लेकिन उनके न मिलने की वजह से उन्होंने गुर्जर समुदाय की एक कन्या ‘गायत्री’ से विवाह कर इस यज्ञ को पूर्ण किया। उसी दौरान देवी सरस्वती वहां पहुंची और ब्रह्मा के बगल में दूसरी कन्या को बैठा देख क्रोधित हो गईं।
उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि देवता होने के बावजूद कभी भी उनकी पूजा नहीं होगी, हालांकि बाद में इस श्राप के असर को कम करने के लिए उन्होंने यह वरदान दिया कि एक मात्र पुष्कर में उनकी उपासना संभव होगी। भगवान विष्णु ने भी इस काम में ब्रह्मा जी की मदद की थी। इसलिए देवी सरस्वती ने विष्णु जी को भी श्राप दिया था कि उन्हें पत्नी से विरह का कष्ट सहन करना पड़ेगा। इसी कारण राम (भगवान विष्णु का मानव अवतार) को जन्म लेना पड़ा और 14 साल के वनवास के दौरान उन्हें पत्नी से अलग रहना पड़ा था।

कब और कैसे हुआ पुष्कर मंदिर का निर्माण?
इतिहासकार और धर्माचार्यों में पुष्कर मंदिर के निर्माण को लेकर मतभेद चलता रहता है. धार्मिक जानकारों के अनुसार, ब्रह्मा जी के प्रमुख मंदिर का पुनर्निर्माण आठवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा किया गया था. इसके बाद महाराजा जावत राज ने पुनः मंदिर का निर्माण कराया था. इसी मंदिर के पीछे देवी सावित्री का भी एक मंदिर है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवी सावित्री का क्रोध शांत हुआ, तब वह पुष्कर के पास मौजूद इन्हीं पहाड़ियों पर तपस्या में लीन हो गई थीं.


पुष्कर धाम में ब्रह्मा जी की उपासना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग यहां पर ब्रह्मा जी की उपासना करते हैं, उन्हें विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है और अच्छे स्वास्थ्य व सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है. मंदिर के बगल में बने पुष्कर झील में जो व्यक्ति स्नान करता है, उन्हें आरोग्यता, सुख-समृद्धि और सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है. एक मान्यता यह भी है कि चार धाम अर्थात- बद्रीनारायण, जगन्नाथ, रामेश्वरम और द्वारका की यात्रा करने वाले तीर्थ यात्री जब तक पुष्कर के पवित्र जल में स्नान नहीं करते हैं तब तक उनकी यह यात्रा पूर्ण नहीं होती है.

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Author: sshakti

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