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पहली बार घर में गणेश जी की स्थापना कर रहे हैं? जानें जरूरी नियम  

 

 

 

 

 

 

शुभ तिथि और मुहूर्त देखें

 

गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है।

 

स्थापना प्रातःकाल या शुभ मुहूर्त में करें।

 

शुद्धि और साफ-सफाई

 

घर को अच्छे से साफ करें। पूजा स्थान को गंगाजल या स्वच्छ जल से पवित्र करें।

 

पूजा का आसन लकड़ी या पीढ़े पर लाल या पीले कपड़े से सजाएँ।

 

प्रतिमा की दिशा

 

गणपति जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में स्थापित करें।

 

मूर्ति ऐसी हो जिसमें गणेश जी बैठे हुए हों और उनका मुख मुख्य द्वार की ओर हो।

 

मूर्ति का चयन

 

पहली बार स्थापना के लिए मिट्टी (शाडू माटी) की प्रतिमा लेना शुभ माना जाता है।

 

मूर्ति का आकार बहुत बड़ा न हो, ताकि विसर्जन में सुविधा हो।

 

व्रत और संकल्प

 

स्थापना से पहले स्नान कर पीले या लाल वस्त्र पहनें।

 

पूजा शुरू करने से पहले गणेश जी का संकल्प लें।

 

पूजा सामग्री रखें तैयार

 

मोदक, दूर्वा घास, पान के पत्ते, सुपारी, नारियल, लाल फूल, दीपक, अगरबत्ती आदि जरूर रखें।

 

गणपति को लाल रंग और मिठाई विशेष प्रिय है।

 

दैनिक पूजा और आरती

 

पूरे 10 दिनों तक सुबह-शाम आरती करें, मंत्र जपें और भोग लगाएँ।

 

घर का वातावरण पवित्र और शांत रखें।

 

विसर्जन का नियम

 

अनंत चतुर्दशी (10वें दिन) या परिवार की सुविधा अनुसार प्रतिमा का विसर्जन करें।

 

विसर्जन जल में ही करें और पर्यावरण का ध्यान रखें।पहली बार गणपति स्थापना के लिए जरूरी नियम

 

शुभ तिथि और मुहूर्त देखें

 

गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है।

 

स्थापना प्रातःकाल या शुभ मुहूर्त में करें।

 

शुद्धि और साफ-सफाई

 

घर को अच्छे से साफ करें। पूजा स्थान को गंगाजल या स्वच्छ जल से पवित्र करें।

 

पूजा का आसन लकड़ी या पीढ़े पर लाल या पीले कपड़े से सजाएँ।

 

प्रतिमा की दिशा

 

गणपति जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में स्थापित करें।

 

मूर्ति ऐसी हो जिसमें गणेश जी बैठे हुए हों और उनका मुख मुख्य द्वार की ओर हो।

 

मूर्ति का चयन

 

पहली बार स्थापना के लिए मिट्टी (शाडू माटी) की प्रतिमा लेना शुभ माना जाता है।

 

मूर्ति का आकार बहुत बड़ा न हो, ताकि विसर्जन में सुविधा हो।

 

व्रत और संकल्प

 

स्थापना से पहले स्नान कर पीले या लाल वस्त्र पहनें।

 

पूजा शुरू करने से पहले गणेश जी का संकल्प लें।

 

पूजा सामग्री रखें तैयार

 

मोदक, दूर्वा घास, पान के पत्ते, सुपारी, नारियल, लाल फूल, दीपक, अगरबत्ती आदि जरूर रखें।

 

गणपति को लाल रंग और मिठाई विशेष प्रिय है।

 

दैनिक पूजा और आरती

 

पूरे 10 दिनों तक सुबह-शाम आरती करें, मंत्र जपें और भोग लगाएँ।

 

घर का वातावरण पवित्र और शांत रखें।

 

विसर्जन का नियम

 

अनंत चतुर्दशी (10वें दिन) या परिवार की सुविधा अनुसार प्रतिमा का विसर्जन करें।

 

विसर्जन जल में ही करें और पर्यावरण का ध्यान रखें।पहली बार गणपति स्थापना के लिए जरूरी नियम

 

शुभ तिथि और मुहूर्त देखें

 

गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है।

 

स्थापना प्रातःकाल या शुभ मुहूर्त में करें।

 

शुद्धि और साफ-सफाई

 

घर को अच्छे से साफ करें। पूजा स्थान को गंगाजल या स्वच्छ जल से पवित्र करें।

 

पूजा का आसन लकड़ी या पीढ़े पर लाल या पीले कपड़े से सजाएँ।

 

प्रतिमा की दिशा

 

गणपति जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में स्थापित करें।

 

मूर्ति ऐसी हो जिसमें गणेश जी बैठे हुए हों और उनका मुख मुख्य द्वार की ओर हो।

 

मूर्ति का चयन

 

पहली बार स्थापना के लिए मिट्टी (शाडू माटी) की प्रतिमा लेना शुभ माना जाता है।

 

मूर्ति का आकार बहुत बड़ा न हो, ताकि विसर्जन में सुविधा हो।

 

व्रत और संकल्प

 

स्थापना से पहले स्नान कर पीले या लाल वस्त्र पहनें।

 

पूजा शुरू करने से पहले गणेश जी का संकल्प लें।

 

पूजा सामग्री रखें तैयार

 

मोदक, दूर्वा घास, पान के पत्ते, सुपारी, नारियल, लाल फूल, दीपक, अगरबत्ती आदि जरूर रखें।

 

गणपति को लाल रंग और मिठाई विशेष प्रिय है।

 

दैनिक पूजा और आरती

 

पूरे 10 दिनों तक सुबह-शाम आरती करें, मंत्र जपें और भोग लगाएँ।

 

घर का वातावरण पवित्र और शांत रखें।

 

विसर्जन का नियम

 

अनंत चतुर्दशी (10वें दिन) या परिवार की सुविधा अनुसार प्रतिमा का विसर्जन करें।

 

विसर्जन जल में ही करें और पर्यावरण का ध्यान रखें।

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Author: sshakti

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