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जी, सुना क्या ?? iPhone बना आखिरी चिंगारी? महाराष्ट्र में तीन मौतों के पीछे सामने आए कई चौंकाने वाले कारण

iPhone की EMI ही नहीं, कई दर्द समेटे था परिवार: महाराष्ट्र की घटना की Ground Report में सामने आई पूरी कहानी

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की घटना को शुरुआत में iPhone की बकाया EMI से जोड़कर देखा गया। लेकिन अब सामने आई ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि कहानी इतनी सीधी नहीं थी। परिवार में महीनों से विवाद, छह साल पहले बड़े बेटे की बीमारी से मौत, पिता का लंबे समय तक घर से बाहर रहना और युवक के पहले भी इसी पहाड़ी पर पहुंचने जैसी कई बातें सामने आई हैं।
छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के वालूज इलाके में खवड्या पहाड़ी पर हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद शुरुआती तौर पर यह चर्चा तेजी से फैली कि iPhone की EMI को लेकर हुए विवाद के कारण एक परिवार उजड़ गया। हालांकि, घटना की तह तक जाने पर पारिवारिक परिस्थितियों की कहीं अधिक जटिल तस्वीर सामने आती है।
स्थानीय पुलिस से हुई बातचीत के आधार पर कई ऐसी जानकारियां सामने आई हैं, जो बताती हैं कि iPhone की बकाया किस्त को इस घटना की अकेली वजह मानना उचित नहीं होगा।

क्या हुआ था 21 अगस्त को?

पुलिस अधिकारी रामेश्वर गाडे के मुताबिक, 21 अगस्त को पुलिस को 112 पर सूचना मिली कि एक परिवार पहाड़ी पर पहुंचा है और वहां आत्महत्या का खतरा है। पुलिस मौके पर पहुंची और युवक कुणाल को समझाने का प्रयास किया।
पुलिस के अनुसार, काफी देर की बातचीत के बाद ऐसा लग रहा था कि कुणाल का मन बदल रहा है। इसी दौरान उसके पिता मुरलीधर वहां पहुंचे। बेटे को बचाने की कोशिश के दौरान कुणाल नीचे गिरा और उसका हाथ पकड़े पिता भी उसके साथ खाई में गिर गए। इसके तुरंत बाद वहां मौजूद कुणाल की मां संगीता ने भी छलांग लगा दी। तीनों की मौत हो गई

iPhone की EMI को लेकर हुआ था विवाद

ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, कुणाल के iPhone की EMI का भुगतान बाकी था और इसी मुद्दे पर पिता-पुत्र के बीच तीखी बहस हुई थी। इसके बाद कुणाल खवड्या पहाड़ी पर चला गया और उसकी मां भी उसके पीछे वहां पहुंचीं।
लेकिन इस एक विवाद से आगे परिवार की परिस्थितियों को देखने पर कई दूसरे पहलू सामने आते हैं।

महीनों से चल रहा था पारिवारिक विवाद

पड़ोसियों ने ग्राउंड रिपोर्ट में बताया कि मुरलीधर का अपनी पत्नी संगीता और बेटे कुणाल के साथ पिछले कुछ महीनों से विवाद चल रहा था। स्थिति ऐसी थी कि पिता अलग गांव में रह रहे थे, जबकि मां और बेटा दूसरी जगह रह रहे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार करीब चार महीने पहले एकदंत नगर में किराए के मकान में रहने आया था और आसपास के लोगों से भी उनका ज्यादा मेल-जोल नहीं था।
तीनों की मौत के बाद अंतिम संस्कार भी अलग-अलग जिलों में किए गए। मुरलीधर का अंतिम संस्कार जालना जिले के उनके पैतृक गांव धनगर पिंपलगांव में हुआ, जबकि संगीता और कुणाल का अंतिम संस्कार संभाजीनगर के मुकुंदवाड़ी में किया गया।
छह साल पहले बड़े बेटे की मौत ने भी परिवार को झकझोरा था
इस परिवार की कहानी का एक और दुखद पहलू सामने आया है। मुरलीधर और संगीता के दो बेटे थे। करीब छह साल पहले उनके बड़े बेटे की बीमारी के कारण मौत हो गई थी।
रिपोर्ट में सामने आई जानकारी के मुताबिक, बड़े बेटे की मौत के बाद परिवार में अनबन बढ़ने लगी थी। मुरलीधर पेशे से ट्रक ड्राइवर थे और काम के सिलसिले में लगातार घर से बाहर रहने लगे थे। घटना से पहले भी वह करीब तीन महीने से शहर से बाहर बताए गए हैं।

दो दिन पहले घर लौटे थे पिता

बताया गया है कि मुरलीधर घटना से करीब दो दिन पहले वापस लौटे थे, जिसके बाद परिवार में फिर विवाद शुरू होने की चर्चा है।
इसी दौरान iPhone की बकाया EMI का मुद्दा भी सामने आया और पिता-पुत्र के बीच बहस हुई। हालांकि, सामने आई पूरी पारिवारिक पृष्ठभूमि बताती है कि इसे केवल महंगे फोन की मांग से जोड़कर देखना घटनाक्रम का अधूरा चित्र पेश कर सकता है।

पिछले साल भी इसी पहाड़ी पर पहुंचा था कुणाल

मामले का शायद सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह पहली बार नहीं था जब कुणाल इस पहाड़ी पर पहुंचा था।
ग्राउंड रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिछले साल भी कुणाल आत्महत्या के इरादे से इसी पहाड़ी पर आया था। उस समय एमआईडीसी वालूज और चिकलथाना पुलिस ने उसे समझाकर सुरक्षित नीचे उतार लिया था।
यह जानकारी घटना को सिर्फ iPhone या एक दिन के पारिवारिक झगड़े तक सीमित करके देखने के बजाय लंबे समय से मौजूद भावनात्मक और पारिवारिक संकट की ओर भी ध्यान खींचती है।

पड़ोसी ने भी बताई पहले की घटना

मुरलीधर के साथ काम करने वाले पड़ोसी महादेव ने बताया कि वह उन्हें करीब सात-आठ साल से जानते थे। उनके मुताबिक, पहले भी एक बार परिवार पहाड़ी पर गया था, लेकिन उस समय सभी वापस लौट आए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि घटना वाले दिन सुबह उनकी मुरलीधर से बात हुई थी और उन्हें अंदाजा तक नहीं था कि कुछ ही समय बाद इतनी बड़ी त्रासदी हो जाएगी।

सोशल मीडिया पर सक्रिय थीं संगीता

रिपोर्ट में यह जानकारी भी सामने आई कि संगीता सोशल मीडिया पर सक्रिय थीं और उनका अपना YouTube चैनल था, जिस पर करीब 29 हजार सब्सक्राइबर बताए गए हैं। वह अपने बेटे कुणाल के साथ वीडियो पोस्ट करती थीं। रिपोर्ट के अनुसार, मौत से पहले उन्होंने बिगड़ते रिश्तों से जुड़ा एक वीडियो भी पोस्ट किया था।

एक iPhone से कहीं बड़ी है इस घटना की कहानी

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर किसी ने बेटे को जिम्मेदार ठहराया तो किसी ने माता-पिता की भूमिका पर सवाल उठाए। लेकिन सामने आ रही जानकारियां बताती हैं कि किसी एक व्यक्ति या एक वस्तु को तीन मौतों के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराना मामले का अत्यधिक सरलीकरण हो सकता है।
iPhone की EMI को लेकर विवाद इस घटनाक्रम का एक हिस्सा जरूर था, लेकिन परिवार में महीनों से चल रहा विवाद, बड़े बेटे की छह साल पहले हुई मौत के बाद पैदा हुई परिस्थितियां, पिता का लंबे समय तक घर से बाहर रहना और कुणाल का पहले भी आत्महत्या के इरादे से उसी पहाड़ी पर पहुंचना—ये सभी तथ्य इस त्रासदी की कहीं अधिक जटिल पृष्ठभूमि सामने रखते हैं।

शुभदा शक्ति की अपील

ऐसी घटनाओं को केवल किसी महंगे फोन, जिद या एक पारिवारिक झगड़े की कहानी बनाकर देखना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी व्यक्ति में बार-बार जीवन समाप्त करने की बात करना, अत्यधिक निराशा, खुद को अलग कर लेना या आत्मघाती व्यवहार जैसे संकेत दिखाई दें, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और तत्काल पेशेवर सहायता तक पहुंच बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
साथ ही, ऐसी संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया पर चर्चा करते समय मृतकों को दोषी ठहराने, घटना के वीडियो को सनसनीखेज तरीके से प्रसारित करने या आत्महत्या के तरीके का अनावश्यक विवरण देने से बचना जिम्मेदार व्यवहार है।

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Author: APOORV SEN

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