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धरती पर हर हलचल अब रडार पर — ISRO-NASA का ‘NISAR’ मिशन लॉन्च

ISRO की एक और ऐतिहासिक छलांग: सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ NISAR सैटेलाइट, 12 दिन में बनाएगा धरती का विस्तृत नक्शा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष की ओर एक और बड़ी छलांग लगाई है। बुधवार को श्रीहरिकोटा से इसरो के GSLV-MkII रॉकेट ने निसार उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह उपग्रह अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ मिलकर बनाया गया है और आने वाले वर्षों में धरती की बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा।

12,500 करोड़ की लागत, भारत-अमेरिका की साझा ताकत

इस महत्वाकांक्षी मिशन की कुल लागत करीब 1.5 बिलियन डॉलर (लगभग 12,500 करोड़ रुपये) है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी लगभग 788 करोड़ रुपये की है। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच अब तक का सबसे बड़ा स्पेस कोलैबोरेशन माना जा रहा है।

निसार क्या करेगा?

निसार (NISAR) उपग्रह धरती की सतह का विस्तृत सर्वे करेगा। केवल 12 दिनों में यह पूरी धरती और बर्फ से ढकी सतहों का हाई-रेजोल्यूशन मैप तैयार कर सकेगा। इस डेटा से पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति, पर्यावरण और जलवायु बदलावों को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।

खास तकनीक: दो अलग-अलग बैंड्स वाला रडार

इस उपग्रह में Synthetic Aperture Radar (SAR) लगा है, जो दो बैंड्स –

L-बैंड (नासा द्वारा विकसित)

S-बैंड (इसरो द्वारा विकसित)

इनके माध्यम से यह उपग्रह धरती की सतह को गहराई और विस्तार से स्कैन करेगा।

L-बैंड कम फ्रीक्वेंसी (1-2 GHz) पर काम करता है, जो मिट्टी, जंगल और बर्फ के भीतर तक झांक सकता है।

S-बैंड हाई फ्रीक्वेंसी (2-4 GHz) पर काम करता है, जो सतह की बारीक जानकारी देने में सक्षम है – जैसे शहरी ढांचा, बाढ़ क्षेत्र, तूफान की स्थिति आदि।

क्यों खास है निसार?

वजन: 2393 किलोग्राम

ऊंचाई: 747 किमी की कक्षा में परिक्रमा करेगा

संचालन: इसरो उपग्रह की कमांडिंग करेगा, जबकि नासा इसकी रडार प्रणाली को संभालेगा

संचालन अवधि: 5 साल

डेटा प्राप्ति: तस्वीरें ISRO और NASA दोनों के ग्राउंड स्टेशन पर डाउनलोड होंगी, प्रोसेसिंग के बाद यह डेटा यूजर्स तक पहुंचेगा।

किन बदलावों पर नजर रखेगा निसार?

दुनिया भर के जंगलों में हो रहे परिवर्तन

फसल और कृषि पैटर्न की निगरानी

पानी से भरी भूमि में बदलाव

हिमखंडों, समुद्री बर्फ और ग्लेशियरों की स्थिति

भूकंप, ज्वालामुखी और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक घटनाओं की पहचान

निसार सिर्फ एक उपग्रह नहीं, बल्कि एक “धरती की आंख” है – जो पर्यावरण, जलवायु और आपदाओं पर वैज्ञानिक दृष्टि से हमारी समझ को और मजबूत बनाएगी।

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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